Rahul Gandhi FIR: राहुल गांधी के खिलाफ FIR, रामलीला मैदान शुद्धिकरण विवाद ने पकड़ा तूल

हल्द्वानी पुलिस ने SC/ST एक्ट और BNS की धाराओं में केस दर्ज किया, सियासत तेज

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Rahul Gandhi FIR: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। मामला हल्द्वानी के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में कांग्रेस की जनसभा के बाद आयोजित किए गए कथित ‘शुद्धिकरण अनुष्ठान’ को लेकर दिए गए उनके बयानों से जुड़ा हुआ है। अनुसूचित जाति के एक स्थानीय युवक की शिकायत पर हल्द्वानी कोतवाली पुलिस ने यह प्राथमिकी दर्ज की है।
शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि राहुल गांधी ने एक सामान्य धार्मिक अनुष्ठान और स्वच्छता अभियान को जातिगत रंग देकर समाज में वैमनस्य फैलाने का प्रयास किया, जिससे वाल्मीकि समाज और अनुसूचित वर्ग की भावनाएं आहत हुई हैं। इस कानूनी कार्रवाई के सामने आने के बाद उत्तराखंड से लेकर दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर शुरू हो गया है।

Rahul Gandhi FIR: वाल्मीकि समाज के अमित कुमार की शिकायत पर कोतवाली में मुकदमा

हल्द्वानी सिटी कोतवाली पुलिस ने यह प्राथमिकी (FIR No. 0297/2026) 30 अगस्त की देर रात दर्ज की। शिकायतकर्ता 26 वर्षीय अमित कुमार हल्द्वानी की जवाहर नगर कॉलोनी के निवासी हैं और वाल्मीकि समुदाय से संबंध रखते हैं। अमित स्वयं को सामाजिक संगठन ‘श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास’ का पदाधिकारी बताते हैं।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(r) व 3(1)(u) के तहत मामला दर्ज किया है। इसके साथ ही विभिन्न समुदायों के बीच कटुता व शत्रुता को बढ़ावा देने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 196 तथा धार्मिक भावनाओं को आहत करने से संबंधित धारा 299 के प्रावधान लगाए गए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए नैनीताल पुलिस ने इस प्रकरण की जांच पुलिस उपाधीक्षक (DSP) अमित कुमार को सौंपी है।

विवाद की जड़: खड़गे की जनसभा, सफाई अभियान और ‘शुद्धिकरण यज्ञ’

इस पूरे विवाद की शुरुआत 8 अगस्त 2026 को हुई थी, जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में पार्टी की ‘विजय शंखनाद’ रैली को संबोधित किया था। रैली संपन्न होने के कुछ दिन बाद यानी 11 अगस्त को स्थानीय हिंदू संगठनों और सेवा न्यास के सदस्यों ने मैदान में एक धार्मिक अनुष्ठान और हवन का आयोजन किया।
आयोजकों का कहना था कि राजनीतिक जनसभा के उपरांत मैदान में भारी मात्रा में कचरा, जूठन और कथित तौर पर शराब की खाली बोतलें पड़ी हुई थीं। उन्होंने मैदान में साफ-सफाई अभियान चलाया और प्रभु श्रीराम के पवित्र लीला स्थल की शुचिता बहाल करने के उद्देश्य से पारंपरिक शांति व शुद्धिकरण हवन किया। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि इस धार्मिक प्रक्रिया में किसी भी व्यक्ति विशेष को निशाना नहीं बनाया गया था और इसमें सभी वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया था।

राहुल गांधी का तीखा हमला: ‘यह छुआछूत और दलित विरोधी मानसिकता’

कांग्रेस पार्टी ने इस अनुष्ठान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे एक वरिष्ठ दलित राजनेता का अपमान बताया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद में भी इस मुद्दे पर अपनी पीड़ा व्यक्त की थी। इसके बाद 29 अगस्त को नई दिल्ली में एक राष्ट्रीय प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने इस मामले को जोर-शोर से उठाया।
राहुल गांधी ने संविधान की प्रति दिखाते हुए आरोप लगाया कि खड़गे की रैली के बाद कार्यक्रम स्थल का शुद्धिकरण कराना भारतीय समाज में आज भी मौजूद ‘अस्पृश्यता और छुआछूत’ की सोच का सीधा प्रमाण है। उन्होंने इसे बीजेपी और आरएसएस की दलित विरोधी विचारधारा से जोड़ते हुए सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की थी कि अनुष्ठान करने वाले लोगों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।

शिकायतकर्ता का तर्क: ‘बिना जांच किए हमें ही बना दिया आरोपी’

कोतवाली में दी गई अपनी शिकायत में अमित कुमार ने कहा कि वे स्वयं वाल्मीकि समाज से आते हैं और 11 अगस्त को आयोजित स्वच्छता एवं हवन कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे। उनका कहना है कि राहुल गांधी ने राष्ट्रीय मंच से बिना किसी तथ्य सत्यापन के इस सेवा कार्य को छुआछूत और जातिगत भेदभाव का रूप दे दिया।
शिकायत में तर्क दिया गया है कि राहुल गांधी के बयानों के चलते समाज में यह गलत संदेश गया कि सफाई और हवन में शामिल लोग जातिवादी भेदभाव के दोषी हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस बयानबाजी से सामाजिक सौहार्द बिगड़ा है, समाज के विभिन्न वर्गों के बीच अविश्वास बढ़ा है और कार्यक्रम में शामिल अनुसूचित जाति के युवाओं की सामाजिक प्रतिष्ठा को भारी आघात पहुंचा है। इसी आधार पर उन्होंने पुलिस से राहुल गांधी के खिलाफ दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है।

Rahul Gandhi FIR: उत्तराखंड में गरमाई सियासत, बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने

इस एफआईआर के दर्ज होने के बाद उत्तराखंड की राजनीति पूरी तरह गर्मा गई है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस पर बिना मुद्दों की राजनीति करने और शांत पर्वतीय राज्य के सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने का आरोप लगाया है। भाजपा प्रदेश नेतृत्व का कहना है कि भगवान राम की पावन भूमि पर केवल स्वच्छता और पवित्रता का अनुष्ठान हुआ था, जिसे कांग्रेस ने अपनी चुनावी राजनीति चमकाने के लिए जातिवादी चश्मे से देखा।
दूसरी ओर, कांग्रेस संगठन ने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी के शीर्ष दलित नेता के आत्मसम्मान और सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ने वाले नेता प्रतिपक्ष की आवाज को दबाने के लिए पुलिस और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है। पुलिस द्वारा जांच शुरू किए जाने के साथ ही यह मामला अब केवल स्थानीय विवाद न रहकर राष्ट्रीय स्तर पर दलित राजनीति, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानूनी दांव-पेंच का बड़ा अखाड़ा बन चुका है।

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