Viveka Memorial Mysuru: मैसूरु में विवेक स्मारक का उद्घाटन 1 अगस्त को करेंगे पीएम मोदी, स्वामी विवेकानंद की शिकागो यात्रा से जुड़े ऐतिहासिक स्थल को मिलेगी नई पहचान
स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक प्रवास स्थल पर बने विवेक स्मारक का 1 अगस्त को होगा लोकार्पण
Viveka Memorial Mysuru: कर्नाटक की सांस्कृतिक राजधानी मैसूरु में स्वामी विवेकानंद से जुड़े ऐतिहासिक स्थल पर निर्मित भव्य ‘विवेक स्मारक’ का आधिकारिक उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक अगस्त को दोपहर साढ़े तीन बजे करेंगे। यह स्मारक ठीक उसी पवित्र स्थल पर बनाया गया है जहां 144 साल पहले नवंबर 1892 में स्वामी विवेकानंद ने अपने परिब्राजक (पदयात्री) जीवन के दौरान निरंजन मठ में ठहरकर अपने आध्यात्मिक ज्ञान और ओजस्वी विचारों से पूरे क्षेत्र को आलोकित किया था। श्री रामकृष्ण आश्रम मैसूरु द्वारा निर्मित यह केंद्र भारत की युवा शक्ति को स्वामी विवेकानंद के चरित्र निर्माण, सेवा भाव और राष्ट्र निर्माण के विचारों से जोड़ने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक प्रयास है।
Viveka Memorial Mysuru: उद्घाटन समारोह की रूपरेखा और गणमान्य हस्तियों की उपस्थिति
एक अगस्त को आयोजित होने वाले इस राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निरंजन मठ परिसर पहुंचकर वहां स्थित प्राचीन शिव मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद वे स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित कर प्रार्थना हॉल और 4D एक्सपीरियंस सेंटर का अवलोकन करेंगे। इस गरिमामय अवसर पर रामकृष्ण मठ एवं मिशन के पूज्य अध्यक्ष स्वामी गौतमानंद जी महाराज, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार सहित अनेक संत, प्रशासनिक अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहेंगे। स्मारक परिसर में संक्षिप्त ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति देखने के बाद प्रधानमंत्री रामकृष्ण विद्याशाला स्टेडियम में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे, जहां वे देश भर के हजारों युवाओं को राष्ट्र निर्माण का संदेश देंगे।
निरंजन मठ, मैसूरु रियासत और शिकागो यात्रा की ऐतिहासिक नींव
मैसूरु के नारायण शास्त्री रोड पर स्थित निरंजन मठ का स्वामी विवेकानंद के जीवन में एक स्वर्णिम और निर्णायक स्थान रहा है। बेंगलुरु से पदयात्रा करते हुए मैसूरु पहुंचे स्वामी जी ने सद्विद्या पाठशाला में स्थानीय विद्वानों और दार्शनिकों के साथ गहन शास्त्रार्थ किया था। उनकी अद्भुत कुशाग्र बुद्धि और तेजस्वी व्यक्तित्व से प्रभावित होकर मैसूरु रियासत के तत्कालीन दीवान शेषाद्रि अय्यर ने उन्हें महाराजा चामराजेंद्र वोडियार (दशम) से मिलवाया। महाराजा ने स्वामी जी को राजकीय अतिथि का सम्मान दिया और राजमहल में धर्म, दर्शन, समाज सुधार तथा भारत के भविष्य पर कई दिनों तक विस्तृत चर्चाएं हुईं।
इतिहास में यह उल्लेख मिलता है कि महाराजा चामराजेंद्र वोडियार स्वामी जी के विचारों से इतने अभिभूत हुए कि उन्होंने उनकी आवाज को उस दौर के शुरुआती ग्रामोफोन रिकॉर्डर में भी सहेजा था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्वामी विवेकानंद की सितंबर 1893 की प्रसिद्ध शिकागो विश्व धर्म संसद यात्रा की नींव इसी मैसूरु प्रवास के दौरान पड़ी थी। मैसूरु के महाराजा ने ही स्वामी जी की अमरीका यात्रा का पूरा समुद्री जहाज का खर्च और अन्य वित्तीय व्यवस्थाएं सहर्ष उठाई थीं। स्वामी जी ने उस समय भविष्यवाणी की थी कि मैसूरु भविष्य में युवाओं और भारतीय संस्कृति का एक बहुत बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा, जिसे आज यह विवेक स्मारक सच साबित कर रहा है।
पैंतीस करोड़ की लागत से बना विवेक स्मारक और इसकी आधुनिक विशेषताएं
श्री रामकृष्ण आश्रम मैसूरु द्वारा लगभग 35 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से निर्मित यह स्मारक स्थापत्य कला और आधुनिक तकनीक का एक बेजोड़ उदाहरण है। लगभग 81,000 वर्ग फुट के कुल क्षेत्रफल में फैले इस परिसर में चार मंजिला मुख्य भवन और दो मंजिला एनेक्स बिल्डिंग बनाई गई है। इसमें एक अत्याधुनिक 4D एक्सपीरियंस सेंटर तैयार किया गया है, जहां डिजिटल तकनीक और दृश्यांकन के माध्यम से स्वामी विवेकानंद के जीवन प्रसंगों और उनकी शिकागो यात्रा के ऐतिहासिक भाषण को सजीव रूप में दर्शाया जाएगा।
इसके अलावा, परिसर में 700 लोगों की क्षमता वाला ऑडिटोरियम और एम्फीथिएटर, ध्यान एवं योग केंद्र, एक समृद्ध डिजिटल पुस्तकालय, अध्ययन कक्ष (Viveka Memorial Mysuru) और स्किल डेवलपमेंट वर्कशॉप की व्यवस्था की गई है। लंबे समय तक उपेक्षित रहे निरंजन मठ को स्वामी मुक्तिदानंद जी महाराज के कुशल नेतृत्व और राज्य सरकार व दानदाताओं के सहयोग से इस भव्य रूप में पुनरुद्धारित किया गया है। यह केंद्र प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों, शोधार्थियों और युवाओं के लिए एक बहुउद्देशीय कौशल विकास और व्यक्तित्व निर्माण केंद्र के रूप में कार्य करेगा।
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