Parliament Monsoon Session: जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज और राम मंदिर चंदा विवाद पर विपक्ष का प्रदर्शन, लोकसभा दोपहर 2 बजे तक स्थगित
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर चंदा विवाद पर विपक्ष का संसद में जोरदार प्रदर्शन
संसद के मानसून सत्र के नौवें दिन गुरुवार, 30 जुलाई 2026 को विपक्षी दलों ने दो प्रमुख राष्ट्रीय ज्वलंत मुद्दों को लेकर संसद परिसर और सदनों के भीतर अभूतपूर्व व जोरदार प्रदर्शन किया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को परीक्षा प्रणाली व पेपर लीक के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई और अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चंदे व चढ़ावे में कथित गबन व चोरी के गंभीर आरोपों को लेकर विपक्षी सांसद सुबह से ही लामबंद दिखे। इंडिया ब्लॉक के कई घटक दलों के सांसद संसद भवन के मकर द्वार पर एकत्रित हुए और नारेबाजी करते हुए सरकार से तत्काल जवाब की मांग करने लगे। इस भारी हंगामे और गतिरोध के कारण लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा, जबकि राज्यसभा में महत्वपूर्ण विधायी कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ।
मकर द्वार पर विपक्षी दलों का जोरदार विरोध प्रदर्शन
गुरुवार सुबह करीब साढ़े दस बजे कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक और वामपंथी दलों सहित विभिन्न विपक्षी पार्टियों के सांसद मकर द्वार पर जमा हुए। सांसदों के हाथों में सरकार विरोधी तख्तियां और प्लेकार्ड्स थे, जिन पर युवाओं पर पुलिसिया बर्बरता बंद करने और राम मंदिर चंदे के हिसाब की मांग करने वाले नारे लिखे हुए थे। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा सहित विपक्ष के कई प्रमुख चेहरे अग्रिम पंक्ति में मौजूद रहे।
विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार देश के युवाओं की जायज आवाज को दबाने के लिए पुलिस बल का दुरुपयोग कर रही है। चूंकि दिल्ली पुलिस सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करती है, इसलिए सांसदों ने गृह मंत्री अमित शाह से संसद में उपस्थित होकर इस पुलिस कार्रवाई पर विस्तृत बयान देने की मांग की। मकर द्वार पर हुए इस संयुक्त प्रदर्शन से संसद परिसर का राजनीतिक तापमान तड़के ही काफी बढ़ गया।
जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज का मुद्दा बना विपक्ष का हथियार
20 जुलाई को राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए छात्रों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रही धांधली और पेपर लीक मामलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था। विपक्ष का आरोप है कि पुलिस ने छात्रों की जायज मांगों को सुनने के बजाय उन पर हिंसक बल प्रयोग किया और बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पहले ही इस मुद्दे पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर चर्चा की मांग उठा चुके हैं।
गुरुवार को संसद परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए विपक्षी नेताओं ने दोहराया कि देश के भावी भविष्य और युवाओं की आवाज को इस प्रकार से कुचला नहीं जा सकता। उन्होंने मांग की कि जंतर-मंतर पर छात्रों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई का आदेश देने वाले शीर्ष पुलिस अधिकारियों पर कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। साथ ही, परीक्षा ढाँचे की बार-बार होती विफलताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी पुरजोर ढंग से उठाई गई।
अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी का मुद्दा और समाजवादी पार्टी का आक्रामक रुख
संसद के दोनों सदनों में अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान में आई राशि और चढ़ावे के गबन का मामला भी बेहद आक्रामक तरीके से उठाया गया। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और वरिष्ठ सांसद प्रो. रामगोपाल यादव के नेतृत्व में सपा सांसदों ने “चंदा चोर, गद्दी छोड़” जैसे तीखे नारे लगाते हुए सरकार को घेरा। राज्यसभा में कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने नियम 267 के तहत कार्यस्थगन का नोटिस देकर राम मंदिर चंदे की कथित चोरी पर सभी कामकाज रोककर तुरंत चर्चा कराने की मांग की।
समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि भगवान राम के नाम पर मिली दान राशि में चोरी होना देश के करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की आस्था पर कुठाराघात है। उन्होंने कहा कि जो सरकार भगवान के चढ़ावे की सुरक्षा नहीं कर सकती, वह देश चलाने का नैतिक अधिकार खो चुकी है। विपक्ष ने इस पूरे मामले की किसी निष्पक्ष केंद्रीय एजेंसी या न्यायिक आयोग से उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है।
लोकसभा और राज्यसभा में भारी हंगामा, कार्यवाही बाधित
जैसे ही सुबह 11 बजे दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसद अपनी मांगों को लेकर वेल में उतर आए और नारेबाजी शुरू कर दी। लोकसभा में हंगामे के बीच ही कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने दलबदल विरोधी कानून (एंटी-डिफेक्शन लॉ) पर तत्काल चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया, जिसे पीठ द्वारा स्वीकार नहीं किया गया। विपक्षी सांसदों के लगातार बढ़ते शोर-शराबे और पोस्टर लहराने के कारण पीठासीन अधिकारी ने लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
उधर, राज्यसभा में भी स्थिति वैसी ही बनी रही। यद्यपि राज्यसभा के कार्यसूची पत्र में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 (एंटी पेपर लीक बिल) को विचार और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन विपक्ष नियम 267 के तहत राम मंदिर चंदा मामले और छात्रों पर लाठीचार्ज पर चर्चा कराने की अपनी जिद पर अड़ा रहा। सभापति द्वारा नोटिस खारिज किए जाने के बाद सदस्यों के हंगामे को देखते हुए राज्यसभा में भी सामान्य कामकाज ठप हो गया।
एंटी पेपर लीक बिल, विपक्ष की तीन शर्तें और आगे का राजनीतिक रुख
मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार लोक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026 को संसद से पारित कराकर पेपर लीक माफिया के खिलाफ कठोर कानून बनाने का प्रयास कर रही है, जिसे लोकसभा पहले ही पारित कर चुकी है। हालांकि, विपक्ष का कहना है कि महज नया कानून बना देने से परीक्षाएं पारदर्शी नहीं होंगी जब तक कि पुरानी गलतियों की जवाबदेही तय नहीं की जाती। कांग्रेस सांसद सैयद नासिर हुसैन ने स्पष्ट किया कि विपक्ष ने सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें पहली मांग शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, दूसरी मांग छात्रों पर पुलिसिया अत्याचार पर गृह मंत्री का सदन में आधिकारिक वक्तव्य और तीसरी मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस पूरे मामले पर देश से माफी मांगना शामिल है।
विपक्ष ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार सकारात्मक रुख नहीं दिखाती, वे संसद के भीतर और बाहर अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। वहीं दूसरी ओर, सत्ता पक्ष के प्रवक्ताओं ने विपक्ष पर संसद का कीमती समय और करदाताओं का पैसा बर्बाद करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष देश से जुड़े विधायी मुद्दों पर गंभीर चर्चा करने के बजाय केवल राजनीतिक गतिरोध पैदा करने में रुचि रखता है। दोनों पक्षों के इस कड़े रुख से मानसून सत्र के बाकी बचे दिनों में भी विधायी कामकाज प्रभावित रहने की पूरी आशंका बनी हुई है।
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