Raja Raghuvanshi Murder Case: सुप्रीम कोर्ट से जमानत रद्द होने के बाद मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने मेघालय कोर्ट में किया सरेंडर

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मेघालय कोर्ट में सरेंडर, मुख्य आरोपी सोनम फिर पहुंचीं जेल

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Raja Raghuvanshi Murder Case: देश भर में बहुचर्चित ‘हनीमून मर्डर केस’ के रूप में जाने जाने वाले मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक बहुत बड़ा अदालती घटनाक्रम सामने आया है। मामले की मुख्य आरोपी और मृतक राजा रघुवंशी की पत्नी सोनम रघुवंशी ने देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के सख्त आदेश का पालन करते हुए मेघालय की सत्र अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। सरेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अदालत ने उन्हें तुरंत न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश जारी कर दिया। पूर्वी खासी हिल्स जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) विवेक सिएम ने सोनम रघुवंशी के सरेंडर और न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की आधिकारिक पुष्टि की है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए तीन सप्ताह के समय सीमा के भीतर ही सोनम ने अदालत में पेश होकर सरेंडर किया है।

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख और जमानत रद्द होने की वजह

सोनम रघुवंशी को अप्रैल 2026 में निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) से जमानत मिल गई थी, जिसे बाद में 29 जून को मेघालय हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ मेघालय सरकार और पीड़ित परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई की। 23 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय हाईकोर्ट और निचली अदालत के फैसलों को खारिज करते हुए सोनम की जमानत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया था। सर्वोच्च अदालत ने सोनम को तीन सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का कड़ा निर्देश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस संगीन मामले के वर्तमान चरण में आरोपी की रिहाई जारी रहने से चल रही न्यायिक प्रक्रिया और गवाहों के बयानों में बाधा उत्पन्न हो सकती है। अदालत ने बचाव पक्ष की ओर से दी गई गिरफ्तारी के आधारों संबंधी दलीलों को खारिज कर दिया। हालांकि, शीर्ष अदालत ने सोनम के विधिक अधिकारों का ध्यान रखते हुए यह राहत भी दी कि यदि अगले छह महीने के भीतर निचली अदालत में मुकदमे (ट्रायल) की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती है, तो सोनम नियमानुसार नई जमानत याचिका दाखिल करने के लिए स्वतंत्र होंगी। लगभग तीन महीने तक जमानत पर बाहर रहने के बाद अब सोनम को पुनः जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा है।

हनीमून पर रची गई थी खौफनाक साजिश: क्या था पूरा मामला?

इंदौर के रहने वाले ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी सोनम के साथ हुई थी। शादी के कुछ ही समय बाद, मई 2025 में दोनों अपना हनीमून मनाने के लिए मेघालय की वादियों में गए थे। 23 मई 2025 को मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिले के सोहरा (चेरापूंजी) इलाके से दोनों अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए थे। परिजनों द्वारा अनहोनी की आशंका जताए जाने के बाद मेघालय पुलिस ने राज्य पुलिस बलों और स्थानीय गाइडों की मदद से सोहरा के जंगलों और खाइयों में व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया। तलाशी अभियान के दौरान 2 जून 2025 को पुलिस ने सोहरा की एक गहरी खाई से राजा रघुवंशी का गोलियों से छलनी और क्षत-विक्षत शव बरामद किया था।

पुलिस जांच में जो चौंकाने वाले खुलासे हुए, उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। जांच में सामने आया कि यह कोई हादसा या दुर्घटनावश हुई मौत नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी खौफनाक साजिश थी। पुलिस के आरोपों के अनुसार, सोनम ने अपने कथित प्रेमी राज कुशवाहा के साथ मिलकर राजा की हत्या की साजिश रची थी। इस साजिश को अंजाम देने के लिए भाड़े के हत्यारों (सूपारी किलर्स) की मदद ली गई थी, जिन्होंने हनीमून के दौरान सोहरा के एकांत इलाके में मौका पाकर राजा रघुवंशी की निर्मम हत्या कर दी और साक्ष्य छुपाने की नीयत से शव को गहरी खाई में फेंक दिया था। पुलिस ने इस मामले में गहराई से जांच करते हुए जून 2025 में सोनम, उसके प्रेमी और अन्य सहयोगियों को गिरफ्तार कर आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था।

Raja Raghuvanshi Murder Case: पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया और न्याय की उम्मीद

सोनम रघुवंशी के अदालत में सरेंडर करने और पुनः जेल जाने के फैसले पर इंदौर में रह रहे राजा रघुवंशी के परिवार ने संतोष व्यक्त किया है। राजा के भाई विपिन रघुवंशी और मां उमा रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि सर्वोच्च अदालत के इस कदम से कानून और न्याय व्यवस्था पर उनका विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि उन्होंने अपने युवा बेटे को खोया है और पिछले एक साल से अधिक समय से वे न्याय के लिए दर-दर भटक रहे थे। आरोपी के जेल जाने से अब गवाह बिना किसी डर या दबाव के अदालत में निष्पक्ष गवाही दे सकेंगे।

यह मामला केवल इंदौर या मेघालय तक सीमित न रहकर पूरे देश में एक हाई-प्रोफाइल ‘हनीमून मर्डर’ के रूप में चर्चित हुआ। मेघालय जैसे खूबसूरत और शांत पर्यटन स्थल पर हुई इस जघन्य वारदात ने पर्यटकों की सुरक्षा और अपराध के घटते स्तर पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। पुलिस जांच रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई थी कि संपत्ति, आर्थिक लाभ और व्यक्तिगत संबंधों में आ रही बाधाओं को हटाने के उद्देश्य से इस खौफनाक हत्याकांड को अंजाम दिया गया था।

अदालती प्रक्रिया की आगे की राह और समय सीमा

सोनम के आत्मसमर्पण (Raja Raghuvanshi Murder Case) के बाद अब इस मामले की सुनवाई में तेजी आने की पूरी संभावना है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए छह महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने के निर्देश के कारण अब अभियोजन (पुलिस) और बचाव पक्ष दोनों पर मुकदमे को जल्द से जल्द तार्किक परिणति तक पहुंचाने का दबाव रहेगा। सोनम के जेल में होने से अब गवाहों को धमकाने या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका खत्म हो गई है, जिससे अदालत के समक्ष निष्पक्ष सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।

मेघालय पुलिस ने भी आश्वस्त किया है कि वे अदालत के समक्ष मजबूत साक्ष्य और गवाह पेश करेंगे ताकि दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके। इस मामले में प्रस्तुत की गई फॉरेंसिक रिपोर्ट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान आरोपियों की सजा तय करने में मुख्य भूमिका निभाएंगे। पूरा देश अब इस केस में आने वाले अंतिम फैसले और राजा रघुवंशी को न्याय मिलने का इंतजार कर रहा है।

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