Mumbai Traffic Jam: जाम में फंसे नितिन गडकरी, बोले- अब मल्टी-लेवल इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी
मुंबई के ट्रैफिक में फंसे गडकरी, पुराने फ्लाईओवरों की जगह मल्टी-लेवल तकनीक पर जोर
Mumbai Traffic Jam: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की सड़कों पर रोजाना लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम से शनिवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का भी सीधा सामना हो गया। 22वें इंडो-अमेरिकन कॉरपोरेट एक्सीलेंस अवॉर्ड्स 2026 के भव्य समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने जा रहे केंद्रीय मंत्री का काफिला शहर के भारी जाम में उलझ गया, जिसके चलते वे निर्धारित समय से करीब एक घंटा देरी से कार्यक्रम स्थल पर पहुंच सके। मंच पर पहुंचते ही उन्होंने इस अनपेक्षित विलंब के लिए उपस्थित अतिथियों से खेद व्यक्त किया और देश के प्रमुख महानगरों में चरमराती यातायात व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई।
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दशकों पूर्व निर्मित पारंपरिक एकल-स्तरीय (सिंगल-डेक) फ्लाईओवर अब आधुनिक यातायात के भारी दबाव को झेलने में पूरी तरह अक्षम साबित हो रहे हैं। कई व्यस्त चौराहों पर यही पुराने ढांचे नए विस्तार के मार्ग में सबसे बड़ी संरचनात्मक बाधा बन चुके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब पारंपरिक सड़क निर्माण सोच को छोड़कर अत्याधुनिक मल्टी-लेवल और एकीकृत वर्टिकल इंफ्रास्ट्रक्चर तकनीक को अपनाना अपरिहार्य हो चुका है।
Mumbai Traffic Jam: एक ही पिलर पर तीन फ्लाईओवर और ऊपर मेट्रो
महानगरों में भूमि अधिग्रहण की जटिलताओं और सीमित जमीनी स्थान का समाधान प्रस्तुत करते हुए नितिन गडकरी ने एक क्रांतिकारी इंजीनियरिंग मॉडल की रूपरेखा रखी। उन्होंने बताया कि आधुनिक निर्माण तकनीक के सहारे अब एक ही केंद्रीय पिलर पर बहु-स्तरीय संरचना तैयार की जा सकती है।
इस प्रस्तावित मॉडल के अंतर्गत पहले, दूसरे और तीसरे तल पर अलग-अलग दिशाओं में जाने वाले समर्पित वाहन फ्लाईओवर बनाए जा सकते हैं, जबकि उसी पिलर के सबसे शीर्ष यानी चौथे स्तर पर मेट्रो रेल लाइन का संचालन संभव है। गडकरी ने कहा कि जमीन की चौड़ाई बढ़ाए बिना हवा में उर्ध्वाधर (वर्टिकल) विस्तार करके शहरों की परिवहन क्षमता को तीन से चार गुना तक बढ़ाया जा सकता है, जिससे चौराहों पर लगने वाले सिग्नल जाम से पूरी तरह मुक्ति मिल सकती है।
पुणे में 50 हजार करोड़ की परियोजनाओं में लागू होगी तकनीक
केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि महाराष्ट्र के प्रमुख औद्योगिक केंद्र पुणे में बढ़ती यातायात चुनौतियों से निपटने के लिए करीब 50 हजार करोड़ रुपये की विशाल फ्लाईओवर और एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इन आगामी परियोजनाओं में पारंपरिक डिजाइनों के स्थान पर इसी मल्टी-लेवल तकनीक को प्राथमिकता दी जाएगी।
मुंबई के अपने कटु अनुभव के पश्चात उन्होंने घोषणा की कि वे इस उन्नत इंजीनियरिंग मॉडल को मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में भी अनिवार्य रूप से लागू करने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से औपचारिक चर्चा करेंगे। उनका मानना है कि यदि मुंबई और उपनगरों में मेट्रो कॉरिडोर और एलिवेटेड एक्सप्रेसवे को साझा पिलर्स पर एकीकृत कर दिया जाए, तो अरबों रुपये के भूमि अधिग्रहण खर्च और निर्माण समय दोनों की भारी बचत होगी।
बैरियर-फ्री टोलिंग और ऑटोमोबाइल क्रांति का उल्लेख
शहरी यातायात को गति देने के लिए गडकरी ने डिजिटल तकनीकों के उपयोग को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर जाम समाप्त करने के लिए सरकार बहुत जल्द उपग्रह आधारित जीपीएस टोलिंग और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) जैसी बैरियर-फ्री व्यवस्थाओं को पूर्ण रूप से लागू करने जा रही है, जिससे वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा।
भारत-अमेरिका व्यापारिक मंच को संबोधित करते हुए गडकरी ने भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग की अभूतपूर्व प्रगति का विवरण भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने भूतल परिवहन मंत्रालय का कार्यभार संभाला था, तब देश के वाहन उद्योग का कुल आकार मात्र 14 लाख करोड़ रुपये था, जो तकनीकी नवाचार, स्थानीय उत्पादन और निर्यात संवर्धन के दम पर वर्तमान में बढ़कर लगभग 23 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े को छू चुका है।
Mumbai Traffic Jam: शहरी नियोजन के लिए खतरे की घंटी
केंद्रीय परिवहन मंत्री का स्वयं ट्रैफिक जाम में फंसना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली, पुणे और हैदराबाद जैसे महानगरों में निजी वाहनों की असीमित संख्या और सीमित बुनियादी ढांचे के बीच का संतुलन पूरी तरह बिगड़ चुका है। केवल सड़कों को चौड़ा करना या एक के बाद एक सामान्य फ्लाईओवर खड़े करना अब दीर्घकालिक समाधान नहीं रहा।
गडकरी द्वारा प्रस्तुत मल्टी-लेवल वर्टिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की परिकल्पना निःसंदेह एक दूरगामी और तकनीकी रूप से सक्षम विकल्प है। हालांकि, इसे जमीन पर उतारने के लिए सघन शहरी इलाकों में जटिल इंजीनियरिंग, विशाल निर्माण लागत, निर्माण के दौरान सुगम डायवर्जन और मजबूत अंतर-विभागीय समन्वय की आवश्यकता होगी। मुंबई के इस घटनाक्रम ने देश भर के नीति निर्माताओं और नगर योजनाकारों को शहरी परिवहन के भविष्य पर नए सिरे से सोचने को विवश कर दिया है।
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