Chinmoy Krishna Das: मां के अंतिम संस्कार पर रोए चिन्मय, शुभेंदु अधिकारी बोले- सनातनियों को झकझोर दिया
मां के अंतिम संस्कार के लिए मिली 5 घंटे की पैरोल, भावुक हुए चिन्मय कृष्ण दास
Chinmoy Krishna Das: बांग्लादेश की जेल में बंद हिंदू संत और हिंदू अधिकारों के मुखर पैरोकार चिन्मय कृष्ण दास एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। अपनी दिवंगत माता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उन्हें महज पांच घंटे की सीमित पैरोल मिली थी। इस दौरान उनके भावुक होने के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं, जिसने दुनिया भर के सनातनियों का ध्यान खींचा है। इसी घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि चिन्मय कृष्ण दास के आंसुओं ने वैश्विक स्तर पर सनातन समाज को झकझोर कर रख दिया है। अधिकारी ने यह टिप्पणी कोलकाता के केस्टोपुर इलाके में एक गणेश पूजा के उद्घाटन समारोह के दौरान दी।
Chinmoy Krishna Das: मां के अंतिम संस्कार के लिए मिली थी केवल पांच घंटे की पैरोल
चिन्मय कृष्ण दास की माता संध्या रानी धर का सितंबर 2026 में अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया था। परिवार द्वारा अंतिम संस्कार में शामिल होने की औपचारिक गुहार लगाए जाने के बाद, चटगांव के डिप्टी कमिश्नर मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम मियां ने उन्हें केवल पांच घंटे की अल्पकालिक पैरोल पर जेल से बाहर आने की अनुमति दी।
यह पैरोल किसी प्रकार की रिहाई नहीं थी, बल्कि निर्धारित समयावधि समाप्त होने के बाद उन्हें वापस जेल लौटना अनिवार्य था। अपनी मां को अंतिम विदाई देते समय चिन्मय कृष्ण दास बेहद भावुक नजर आए। उनकी माता की अंतिम इच्छा अपने बेटे को देखने की थी, किंतु जेल में बंद होने के कारण वे अपनी मां के जीवित रहते उनसे नहीं मिल सके थे। इस मानवीय पहलू ने भारत और बांग्लादेश दोनों देशों में लोगों को गहरा आहत किया है।
कौन हैं चिन्मय कृष्ण दास और क्यों चल रहे हैं कानूनी मामले?
चिन्मय कृष्ण दास बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों और सुरक्षा की आवाज उठाने वाले प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। वे पूर्व में इस्कॉन से जुड़े रहे हैं और वर्तमान में ‘हिंदू सम्मिलित सनातन जागरण जोत’ के प्रवक्ता के रूप में सक्रिय रहे हैं। वर्ष 2024 में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों और सुरक्षा की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों में उनकी प्रमुख भूमिका रही थी।
नवंबर 2024 में उन्हें देशद्रोह के आरोपों—विशेषकर राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान—के तहत गिरफ्तार किया गया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, तोड़फोड़ और देशद्रोह समेत कुल छह आपराधिक मामले दर्ज हैं। हालांकि इनमें से कुछ मामलों में उन्हें उच्च न्यायालय से जमानत मिल चुकी है, किंतु अन्य मामलों और देशद्रोह के मामले में रोक के कारण उनकी रिहाई संभव नहीं हो सकी है। ये सभी मामले वर्तमान में बांग्लादेश की अदालतों में विचाराधीन हैं।
शुभेंदु अधिकारी की तीखी प्रतिक्रिया और बंगाल की राजनीति
चिन्मय कृष्ण दास के मामले पर बोलते हुए शुभेंदु अधिकारी ने इसे केवल एक व्यक्तिगत घटना न मानकर व्यापक ऐतिहासिक संदर्भ से जोड़ा। उन्होंने अपने पारिवारिक इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके नाना पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित होकर पश्चिम बंगाल आए थे, और विभाजन के दौर में हिंदू परिवारों को किस प्रकार की पीड़ाओं का सामना करना पड़ा था।
इसके साथ ही अधिकारी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में लंबे समय तक सत्ता में रहीं वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस की सरकारों ने बंगाली हिंदुओं की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत को हाशिए पर धकेलने का काम किया। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी बंगाल की प्राचीन सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
Chinmoy Krishna Das: निष्कर्ष
चिन्मय कृष्ण दास को मां के अंतिम संस्कार के लिए मिली पांच घंटे की पैरोल और उसके बाद सामने आए उनके आंसुओं ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की स्थिति और सुरक्षा के मुद्दे को एक बार फिर वैश्विक पटल पर ला खड़ा किया है। जहां एक ओर बांग्लादेश में उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी है, वहीं भारत में इस मानवीय व धार्मिक संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी तेज हो गया है।
Read more here
Neeraj Chopra Long Hair: धोनी नहीं, नडाल-फेडरर से प्रेरित थे नीरज चोपड़ा
Satish Jarkiholi ED Raid: मंत्री के ठिकानों पर 37 घंटे की रेड, 3 करोड़ कैश बरामद
Aaj Ka Mausam 12 September 2026: दिल्ली-UP समेत 24 राज्यों में बारिश का अलर्ट