Bankipur By Election: बांकीपुर, दतिया और मंजलपुर उपचुनाव में मतदान शुरू, बांकीपुर में प्रशांत किशोर की पहली चुनावी परीक्षा, तीन राज्यों की साख दांव पर
बांकीपुर में प्रशांत किशोर की अग्निपरीक्षा, दतिया और मंजलपुर में भाजपा-कांग्रेस की सीधी टक्कर
Bankipur By Election: देश के तीन अलग-अलग राज्यों बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन हाई-प्रोफाइल विधानसभा सीटों पर गुरुवार को उपचुनाव के लिए मतदान की प्रक्रिया शांतिपूर्ण और सुरक्षा के कड़े साए के बीच शुरू हो चुकी है। सुबह सात बजे से शुरू हुआ यह मतदान शाम छह बजे तक लगातार जारी रहेगा। भारत निर्वाचन आयोग की देखरेख में आयोजित इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मतदाता सुबह से ही अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए मतदान केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। बांकीपुर, दतिया और मंजलपुर तीनों ही सीटों पर राजनीतिक समीकरण बेहद रोचक बने हुए हैं और नतीजे तीन अगस्त को घोषित किए जाएंगे। हालांकि यह केवल तीन सीटों पर होने वाला उपचुनाव है, लेकिन इसके राजनीतिक मायने बहुत गहरे माने जा रहे हैं, क्योंकि इस बार चुनावी मैदान में कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है।
बांकीपुर में प्रशांत किशोर की पहली चुनावी परीक्षा और त्रिकोणीय मुकाबला
बिहार की राजधानी पटना की सबसे वीआईपी मानी जाने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट पर इस बार पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं। यह सीट लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत किला और पारंपरिक गढ़ रही है। यहां से भाजपा के कद्दावर नेता नितिन नवीन लगातार कई बार विधायक चुने जाते रहे हैं। उनके राज्यसभा सांसद चुने जाने और विधानसभा से इस्तीफा देने के बाद यह सीट रिक्त हुई थी। भाजपा ने इस बार बांकीपुर के अपने गढ़ को बचाए रखने के लिए युवा चेहरा नीरज कुमार सिन्हा को अपना अधिकृत उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा है। दूसरी तरफ, महागठबंधन की ओर से राष्ट्रीय जनता दल ने रेखा गुप्ता को अपना प्रत्याशी बनाया है, जिससे लड़ाई में सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की गई है।
इस चुनाव की सबसे बड़ी और खास बात जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर का खुद पहली बार चुनावी मैदान में उतरना है। लंबे समय तक देश के शीर्ष राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में कई राष्ट्रीय व क्षेत्रीय दलों को चुनाव जिताने में अहम भूमिका निभाने वाले प्रशांत किशोर अब खुद प्रत्यक्ष राजनीति में उतरकर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। प्रशांत किशोर की एंट्री ने बांकीपुर की लड़ाई को पूरी तरह से हाई-प्रोफाइल और त्रिकोणीय बना दिया है। उन्होंने इस चुनाव को राज्य सरकार के कामकाज पर एक जनमत संग्रह के रूप में पेश किया है। चुनाव की पूर्व संध्या पर उनके कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस के साथ हुई तीखी बहस ने भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं, जिसके कारण मतदान के दिन सुबह से ही बूथों पर सुरक्षा व्यवस्था को अत्यंत सख्त कर दिया गया है।
मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प और सीधी टक्कर वाला बना हुआ है। यह सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की अयोग्यता के कारण खाली हुई थी, जिन्हें एक पुराने मामले में अदालत से सजा मिलने के बाद जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत अयोग्य घोषित कर दिया गया था। भाजपा ने दतिया में इस बार बड़ा सांगठनिक फेरबदल करते हुए प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री और वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा की जगह नए ब्राह्मण चेहरे आशुतोष तिवारी पर दांव लगाया है। नरोत्तम मिश्रा को टिकट न मिलने से शुरुआती दौर में पार्टी समर्थकों के बीच काफी हलचल और असंतोष देखा गया था, लेकिन बाद में पार्टी नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को संभाला गया।
कांग्रेस पार्टी ने दतिया सीट पर अपने बेहद अनुभवी और पुराने जननेता कुंवर घनश्याम सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है, जो पहले भी कई बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। दतिया विधानसभा क्षेत्र में लगभग दो लाख बीस हजार मतदाता हैं, जिनके लिए प्रशासन ने दो सौ इक्यानवे मतदान केंद्र स्थापित किए हैं। इन केंद्रों में ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों का संतुलन रखा गया है। दतिया का नतीजा राज्य सरकार के साथ-साथ विपक्षी दल कांग्रेस के लिए भी अपनी जमीनी पकड़ साबित करने का एक बड़ा माध्यम बनने वाला है।
वडोदरा की मंजलपुर सीट पर भाजपा का वर्चस्व बनाए रखने की चुनौती
गुजरात के वडोदरा जिले के अंतर्गत आने वाली मंजलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा का कई दशकों से दबदबा रहा है। यह सीट भाजपा के वरिष्ठ और आठ बार के विधायक योगेशभाई नारनदास पटेल के दुखद निधन के कारण खाली हुई थी, जो 1990 से इस क्षेत्र के लोकप्रिय नेता बने रहे थे। पाटीदार बहुल माने जाने वाले इस क्षेत्र में भाजपा ने अपने पारंपरिक आधार को मजबूत बनाए रखने के लिए सतीश पटेल को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी ने वडोदरा की राजनीति के जाने-माने और अनुभवी चेहरे भीखाभाई रबारी को मैदान में उतारकर भाजपा के इस अभेद्य किले में सेंध लगाने की रणनीति बनाई है।
मंजलपुर में करीब दो लाख उन्नीस हजार मतदाता हैं, जो अपने नए प्रतिनिधि का चुनाव करने के लिए उत्साहपूर्वक बूथों पर पहुंच रहे हैं। यद्यपि गुजरात में भाजपा का संगठनात्मक ढांचा बेहद मजबूत स्थिति में माना जाता है, लेकिन योगेश पटेल जैसे कद्दावर नेता की अनुपस्थिति के बाद नए प्रत्याशी के लिए इस जीत के अंतर को बनाए रखना एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा होगी।
तीनों राज्यों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और मतदान व्यवस्था
भारत निर्वाचन आयोग (Bankipur By Election) ने तीनों राज्यों के जिला प्रशासनों को निर्देश जारी कर निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण मतदान प्रक्रिया संपन्न कराने की विस्तृत कार्ययोजना लागू की है। बांकीपुर के शहरी बूथों पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कंपनियों की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना या अशांति की स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। दतिया में संवेदनशील और अति-संवेदनशील चिन्हित किए गए 186 ग्रामीण और 105 शहरी मतदान केंद्रों पर विशेष वेबकास्टिंग और सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है। मंजलपुर में भी वडोदरा पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने सुरक्षा का घेरा कड़ा कर रखा है।
गर्मी और मौसम के मिजाज को देखते हुए सभी पोलिंग बूथों पर मतदाताओं के लिए पीने के पानी, छायादार शेड, रैंप और मेडिकल किट का इंतजाम किया गया है। विशेष रूप से बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं और दिव्यांग मतदाताओं को बिना लाइन में लगे प्राथमिकता के आधार पर मतदान करने की सुविधा प्रदान की गई है। प्रशासन ने मतदाताओं से अपील की है कि वे वोटर कार्ड अथवा चुनाव आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त अन्य वैध पहचान पत्रों के साथ बूथों पर आएं और अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करें।
Bankipur By Election: उपचुनाव का वृहद राजनीतिक महत्व और भविष्य की दिशा
यद्यपि ये उपचुनाव केवल तीन अलग-अलग विधानसभा सीटों तक सीमित हैं, लेकिन इनके राजनीतिक संदेश पूरे देश की राजनीति पर असर डालने की क्षमता रखते हैं। बांकीपुर का परिणाम यह तय करेगा कि राजनीतिक विश्लेषक और रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर का जनसुराज अभियान बिहार की जनता के बीच कितना असरदार साबित हो रहा है। यदि प्रशांत किशोर इस सीट पर अच्छा प्रदर्शन करते हैं या उलटफेर करते हैं, तो यह बिहार की राजनीति के पारंपरिक गठबंधन समीकरणों को हिला सकता है।
दूसरी ओर, मध्य प्रदेश के दतिया में मिलने वाली जीत या हार का सीधा प्रभाव राज्य के सत्ताधारी दल और विपक्ष दोनों के मनोबल पर पड़ेगा। ठीक इसी तरह गुजरात के मंजलपुर में भाजपा अपनी पारंपरिक सीट बचाकर अपने अजेय रहने के दावे को कायम रखना चाहेगी। तीनों सीटों पर हो रही यह वोटिंग न केवल प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेगी बल्कि तीन अगस्त को जब ईवीएम से वोट खुलेंगे तो यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि राज्यों का वर्तमान राजनीतिक मूड किस दिशा में जा रहा है।
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