Ajinkya Rahane Retirement: भावुक वीडियो में कहा ‘कैप 278 साइन ऑफ’, भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम अध्याय का हुआ अंत

'कैप 278 साइन ऑफ' लिखकर रहाणे ने किया संन्यास का ऐलान, टेस्ट करियर को कहा अलविदा

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Ajinkya Rahane Retirement: भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे भरोसेमंद मध्यक्रम के बल्लेबाज और पूर्व टेस्ट उप-कप्तान अजिंक्य रहाणे ने गुरुवार, 30 जुलाई 2026 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने की आधिकारिक घोषणा कर दी। 38 वर्षीय अनुभवी खिलाड़ी ने सोशल मीडिया पर एक अत्यंत भावुक वीडियो संदेश साझा करते हुए अपने अंतरराष्ट्रीय करियर पर विराम लगाया। उन्होंने अपने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, “कैप 278 साइन ऑफ! इतने सालों तक मिले असीम प्यार और समर्थन के लिए आप सभी का दिल से धन्यवाद। मैं हमेशा देश का आभारी रहूंगा।”

रहाणे पिछले करीब तीन वर्षों से भारतीय राष्ट्रीय टीम से बाहर चल रहे थे। उन्होंने अपना अंतिम अंतरराष्ट्रीय मुकाबला जुलाई 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ पोर्ट ऑफ स्पेन टेस्ट मैच में खेला था। आगामी श्रीलंका दौरे के लिए चयनकर्ताओं द्वारा घोषित टीम में जगह न मिलने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी के बजाय युवा पीढ़ी को मौका देते हुए खेल के इस अध्याय को पूर्ण विराम देने का सही समय समझा।

डोंबिवली की लोकल ट्रेन से भारतीय कैप 278 तक का भावुक सफर

अपने संन्यास के वीडियो संदेश में अजिंक्य रहाणे काफी भावुक नजर आए और उन्होंने अपने शुरुआती दिनों की यादों को साझा किया। उन्होंने कहा कि जिंदगी का यही अंतिम सत्य है कि हर चीज की एक शुरुआत होती है और एक अंत। बल्लेबाजी में वे हमेशा टाइमिंग और सही समय के चयन पर निर्भर रहे हैं और जीवन में भी सही समय का सम्मान करना सबसे जरूरी होता है। उन्हें लगता है कि भारतीय टीम से आगे बढ़ने और नए अध्याय की शुरुआत करने का यही सबसे मुफीद समय है।

मुंबई के पास डोंबिवली जैसे उपनगरीय इलाके से रोजाना भारी किट बैग उठाकर लोकल ट्रेन पकड़कर आजाद मैदान में अभ्यास के लिए जाने वाले दिनों को याद करते हुए रहाणे ने कहा कि उनका एकमात्र सपना भारत के लिए टेस्ट कैप पहनना था। उन्होंने अपने पूरे करियर के दौरान केवल एक ही सिद्धांत का पालन किया कि देश और टीम का हित हमेशा व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर होना चाहिए। यदि आपकी नीयत और इरादे साफ हैं, तो यह खेल आपको हमेशा सम्मान देता है।

Ajinkya Rahane Retirement: टेस्ट क्रिकेट के विशेषज्ञ और विदेशी सरजमीं पर संकटमोचक

अजिंक्य रहाणे को मुख्य रूप से भारतीय टेस्ट क्रिकेट की मजबूत रीढ़ और विदेशी दौरों का विशेषज्ञ माना जाता था। उन्होंने भारत के लिए कुल 85 टेस्ट मैच खेले, जिनमें 38.46 की औसत से 5077 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 12 शानदार शतक और 26 अर्धशतक निकले। लॉर्ड्स का ऐतिहासक मैदान हो, मेलबर्न की उछाल भरी पिच हो या फिर साउथ अफ्रीका की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां, रहाणे ने हमेशा मुश्किल वक्त में क्रीज पर टिककर भारतीय टीम को संकट से निकाला।

उन्होंने साल 2013 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दिल्ली में अपना टेस्ट डेब्यू किया था। इसके बाद वे लंबे समय तक चेतेश्वर पुजारा और विराट कोहली के साथ भारतीय मध्यक्रम के सबसे मजबूत स्तंभ बने रहे। टेस्ट के अलावा रहाणे ने 90 वनडे मैचों में 2962 रन (3 शतक और 24 अर्धशतक) और 20 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 375 रन बनाए। हालांकि, सीमित ओवरों के प्रारूप में उन्हें ज्यादा निरंतर अवसर नहीं मिले, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उनका योगदान भारतीय इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज रहेगा।

कप्तानी का ऐतिहासिक रिकॉर्ड: कप्तानी में रहे अजेय और गाबा का चमत्कार

अजिंक्य रहाणे की कप्तानी का रिकॉर्ड भारतीय क्रिकेट के सबसे विशिष्ट आंकड़ों में शामिल है। उन्होंने कुल 6 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी की, जिनमें से 4 मैचों में भारत ने जीत हासिल की जबकि 2 मैच ड्रॉ रहे। उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने कभी एक भी टेस्ट मैच नहीं हारा। उनकी कप्तानी का सबसे यादगार और ऐतिहासिक क्षण साल 2020-21 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर आया।

एडिलेड में 36 रन पर ऑलआउट होने के बाद नियमित कप्तान विराट कोहली के स्वदेश लौटने पर अजिंक्य रहाणे ने टीम की कमान संभाली थी। गंभीर चोटों और मुख्य खिलाड़ियों की अनुपस्थिति के बावजूद उन्होंने मेलबर्न में शतक जड़कर टीम में नई जान फूंकी और भारत को ऐतिहासिक बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 2-1 से जिताई। गाबा (ब्रिस्बेन) के अभेद्य किले को तोड़कर मिली वह जीत भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे महान अध्यायों में गिनी जाती है, जहां रहाणे के शांत स्वभाव, सामरिक सूझबूझ और आक्रामक फैसलों की दुनिया भर के दिग्गजों ने प्रशंसा की थी।

घरेलू क्रिकेट और भावी योजनाएं

अंतरराष्ट्रीय टीम से बाहर रहने के दौरान भी रहाणे (Ajinkya Rahane Retirement) ने कभी क्रिकेट से मुंह नहीं मोड़ा। वे घरेलू क्रिकेट में मुंबई रणजी टीम की कप्तानी करते रहे और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने रहे। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय संन्यास का मतलब खेल से पूरी तरह दूरी बनाना नहीं है। वे आगामी समय में युवा प्रतिभाओं को तराशने, कोचिंग, मेंटरशिप या कमेंट्री के जरिए खेल को वापस लौटाने की दिशा में काम करेंगे।

रहाणे के संन्यास पर मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA), भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और पूर्व साथी खिलाड़ियों ने उन्हें एक महान और अनुशासित करियर की बधाई दी। एक बेहद शांत, गरिमापूर्ण और निस्वार्थ क्रिकेटर के रूप में अजिंक्य रहाणे का नाम भारतीय क्रिकेट के इतिहास में हमेशा सम्मान के साथ लिया जाता रहेगा।

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