Pelvic Floor Exercises: 40 की उम्र के बाद रोजाना करें ये 3 आसान एक्सरसाइज, पेल्विक फ्लोर और कोर मजबूत बनाने के लिए अचूक उपाय

Pelvic Floor Exercises: 40 के बाद करें ये 3 एक्सरसाइज, मजबूत होगा कोर और पेल्विक फ्लोर

0
Pelvic Floor Exercises: बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं के शरीर में कई तरह के आंतरिक और शारीरिक बदलाव आने शुरू हो जाते हैं, जिन्हें समय रहते समझना बेहद जरूरी है। खासकर चालीस की उम्र पार करने के बाद हार्मोनल असंतुलन का सीधा असर मांसपेशियों, हड्डियों और शरीर के विभिन्न ऊतकों पर पड़ने लगता है। कई महिलाओं को इस पड़ाव पर आकर कमर में लगातार अकड़न, कोर मांसपेशियों में कमजोरी या फिर यूरिन लीकेज जैसी असहज परेशानियों का सामना करना पड़ता है। क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी थोड़ी सी दैनिक सतर्कता और सही वर्कआउट रूटीन इन बढ़ती उम्र की समस्याओं को आपसे कोसों दूर रख सकता है?
अक्सर महिलाएं अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं और जब शरीर में समस्याएं घर करने लगती हैं, तब जाकर उनकी नींद खुलती है। पेल्विक फ्लोर और डीप कोर मसल्स हमारे शरीर को भीतर से स्थिरता और मजबूती प्रदान करने में बेहद अहम भूमिका निभाती हैं। ये मांसपेशियां न केवल ब्लैडर और आंतों को सही सपोर्ट देती हैं, बल्कि हमारे उठने-बैठने के पोश्चर को भी दुरुस्त रखती हैं। मामले की तह में जाएं तो इन हिस्सों की अनदेखी करना भविष्य में बड़ी शारीरिक परेशानियों को न्योता देने जैसा साबित हो सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि कौन सी ऐसी तीन आसान एक्सरसाइज हैं जो चालीस की उम्र के बाद आपकी काया को नया जीवन दे सकती हैं।

Pelvic Floor Exercises: चालीस की उम्र के बाद शरीर में क्यों पड़ने लगती है कमजोरी

जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, शरीर की प्राकृतिक क्षमताएं धीमी होने लगती हैं और मांसपेशियों का घनत्व कम होने लगता है। चालीस की दहलीज पर कदम रखते ही महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर कम होने लगता है, जिससे हड्डियों और मांसपेशियों पर सीधा असर पड़ता है। नतीजा यह होता है कि जरा सा झुकने पर कमर में दर्द होना या सीढ़ियां चढ़ते वक्त सांस फूलना आम बात बन जाती है। लोग अक्सर इसे उम्र का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन थोड़ी सी सावधानी बरतकर इस गिरावट को रोका जा सकता है।
जानकार बताते हैं कि अगर इस शुरुआती दौर में ही पेल्विक फ्लोर और कोर की मजबूती पर ध्यान न दिया जाए, तो आगे चलकर ये समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं। बाजार में मिलने वाले तमाम टॉनिक या सप्लीमेंट्स तब तक असर नहीं दिखाते जब तक शरीर को अंदरूनी शारीरिक सक्रियता न मिले। यही वजह है कि फिटनेस एक्सपर्ट्स इस उम्र में हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और लक्षित अभ्यासों को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देते हैं। जब आप अपने शरीर की इन जरूरतों को समय पर समझ जाते हैं, तो बुढ़ापे की कई समस्याओं को आसानी से टाल सकते हैं।

बैंडेड ग्लूट ब्रिज के फायदे

बढ़ती उम्र में शरीर के निचले हिस्से को साधने के लिए बैंडेड ग्लूट ब्रिज एक बेहद शानदार और प्रभावी स्ट्रेंथ एक्सरसाइज मानी जाती है। इस कसरत को करने के लिए घुटनों के ठीक ऊपर एक हल्का रेजिस्टेंस बैंड लगाया जाता है और पीठ के बल लेटकर अभ्यास किया जाता है। जब आप एड़ियों पर जोर देकर अपने हिप्स को ऊपर की तरफ उठाते हैं, तो यह सीधे तौर पर ग्लूट्स और कोर की मांसपेशियों पर काम करता है। यह एक ऐसा अभ्यास है जो शरीर के पोश्चर को सुधारने के साथ-साथ रीढ़ की हड्डी को भी मजबूत सहारा देता है।
एक छोटा सा ट्विस्ट यह है कि लोग इसे बिना किसी सही ट्रेनर के गलत तरीके से करने लगते हैं, जिससे कमर पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है। इसे सही फॉर्म में करने से न केवल हिप्स की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, बल्कि रोजमर्रा के छोटे-मोटे काम जैसे चलना और सामान उठाना भी आसान हो जाता है। सोशल मीडिया पर इन दिनों इस साधारण सी दिखने वाली एक्सरसाइज के वीडियो काफी पसंद किए जा रहे हैं। महिलाएं इसे घर पर ही बिना किसी भारी-भरकम जिम उपकरण के आसानी से अपनी डेली रूटीन का हिस्सा बना सकती हैं।

साइड क्लैमशेल्स से मजबूती

हिप्स, ग्लूट्स और पेल्विक क्षेत्र की स्थिरता बनाए रखने के लिए साइड क्लैमशेल्स एक्सरसाइज किसी वरदान से कम साबित नहीं होती है। इस कसरत को करने के लिए करवट लेकर लेटना होता है और घुटनों के ऊपर रेजिस्टेंस बैंड लगाकर पैरों को खोला और बंद किया जाता है। यह मूवमेंट एक बंद होती हुई सीप की तरह होती है, जो शरीर के निचले हिस्से के जोड़ों में लचीलापन लाती है। जो महिलाएं अक्सर पैरों में कमजोरी या सुस्ती की शिकायत करती हैं, उनके लिए यह अभ्यास बहुत जल्द राहत लेकर आ सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि एक पैर पर संतुलन बनाने और सीढ़ियां चढ़ने जैसे कामों के लिए मजबूत बेस तैयार करने में यह एक्सरसाइज बहुत मददगार है। जब आप नियमित रूप से इसका अभ्यास करती हैं, तो पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां भीतर से कसती हैं और ढीलेपन की समस्या दूर होती है। यह उन महिलाओं के लिए एक आदर्श विकल्प है जो जोड़ों पर बिना ज्यादा दबाव डाले खुद को फिट रखना चाहती हैं। लोग इस अभ्यास को अपनी सुबह की सैर के बाद घर पर मैट बिछाकर आसानी से पूरा कर सकते हैं।

Pelvic Floor Exercises, तीसरी सुगम कसरत: सीटेड नी ओपनर्स और अन्य सावधानियां

अगर आपको जमीन पर लेटकर कसरत करने में परेशानी होती है, तो कुर्सी पर बैठकर की जाने वाली सीटेड नी ओपनर्स एक्सरसाइज आपके लिए बेस्ट है। इसे करने के लिए बस एक सीधी कुर्सी पर बैठकर अपने पैरों और थाइज की मांसपेशियों को नियंत्रित तरीके से सक्रिय करना होता है। यह लो-इम्पैक्ट एक्सरसाइज घुटनों की मूवमेंट को बेहतर बनाती है और पैरों की ताकत को बनाए रखने में मदद करती है। बुजुर्ग महिलाएं या जिन्हें जोड़ों में हल्का दर्द रहता है, वे भी इसे बिना किसी झिझक के अपनी सूची में शामिल कर सकती हैं।
इन तमाम अभ्यासों को अपनी दिनचर्या में जगह देते समय कुछ बुनियादी सावधानियों का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। किसी भी कसरत की शुरुआत हमेशा हल्के दबाव से करें और शरीर की क्षमता से ज्यादा जोर जबरदस्ती बिल्कुल न करें। यदि आपको पहले से ही कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या या पुरानी चोट है, तो किसी विशेषज्ञ की सलाह लेना हमेशा समझदारी का काम होता है। सोशल मीडिया पर लोग अक्सर इन आसान फिटनेस टिप्स को आपस में साझा कर रहे हैं ताकि अधिक से अधिक महिलाएं जागरूक हो सकें।

Read More Here:- 

Raksha Bandhan 2026: 28 अगस्त को 4 पर्वों का अद्भुत महासंयोग, जानिए रक्षाबंधन, नारली पूर्णिमा और श्रावणी उपाकर्म का महत्व

Yamaha R2 Launch: Yamaha R2 कल होगी लॉन्च, 200cc इंजन से मचेगा धमाल

UGC NET Result 2026: UGC NET जून 2026 रिजल्ट इसी हफ्ते, 84 विषयों की फाइनल आंसर-की भी होगी जारी

Onion Retail Price: प्याज के दाम में 59% उछाल, महंगाई से राहत के लिए सरकार चलाएगी ‘कांदा एक्सप्रेस’

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.