Analogue Paneer: त्योहारों में नकली पनीर की बिक्री पर NHRC सख्त, FSSAI और राज्यों से दो हफ्ते में मांगी रिपोर्ट

त्योहारों से पहले एनालॉग पनीर पर NHRC का एक्शन, FSSAI और राज्यों से मांगी रिपोर्ट

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Analogue Paneer: देश में आगामी त्योहारों का मौसम शुरू होते ही बाजारों में पनीर की मांग कई गुना बढ़ जाती है। होटल, रेस्तरां, ढाबों, कैटरिंग सेवाओं और मिठाई की दुकानों में इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है। हालांकि, इसी दौरान बाजार में ‘एनालॉग पनीर’ यानी नकली और वैकल्पिक पनीर की आक्रामक बिक्री को लेकर एक गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन यानी एनएचआरसी (NHRC) ने बड़ा एक्शन लिया है। आयोग ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के साथ-साथ सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ तलब की है।

मानवाधिकार आयोग की यह सख्त कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों ने पहले से ही एनालॉग पनीर के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। आयोग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को गुमराह न किया जाए और उन्हें यह स्पष्ट जानकारी मिले कि वे जो उत्पाद खरीद रहे हैं, वह शुद्ध दूध से निर्मित है या फिर वनस्पति तेल और स्टार्च के मिश्रण से बनाया गया है।

Analogue Paneer: मानवाधिकार आयोग ने FSSAI और राज्यों के मुख्य सचिवों से पूछे तीखे सवाल

एनएचआरसी ने खाद्य सुरक्षा नियामक एफएसएसएआई से एनालॉग पनीर की वर्तमान कानूनी स्थिति, इसकी स्वीकृत संरचना, मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव और इसके परीक्षण के वैज्ञानिक मानकों की पूरी रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने विशेष रूप से यह जानने की कोशिश की है कि पारंपरिक डेयरी पनीर और वनस्पति तेल से बने कृत्रिम पनीर के बीच सटीक अंतर स्थापित करने के लिए कौन सी वैज्ञानिक जांच पद्धतियाँ अपनाई जा रही हैं। इस मामले में ‘बीटा-साइटोस्टेरॉल’ जैसे महत्वपूर्ण रासायनिक परीक्षण मापदंडों की भूमिका की जानकारी भी मांगी गई है।

दूसरी ओर, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि उनके संबंधित क्षेत्रों में एनालॉग पनीर का निर्माण, वितरण और परोसा जाना किस हद तक जारी है। आयोग ने अब तक ली गई सैंपलिंग, दर्ज की गई शिकायतों और नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों पर की गई कानूनी कार्रवाई का ब्यौरा मांगा है। आयोग का रुख सख्त है कि क्या ग्राहकों को होटल और रेस्तरां के मेन्यू में यह पारदर्शी जानकारी दी जा रही है या नहीं कि उन्हें परोसी जाने वाली डिश में असली पनीर है या उसका कृत्रिम विकल्प।

क्या होता है एनालॉग पनीर और क्यों बाजार में बढ़ रही है इसकी मांग

एनालॉग पनीर एक ऐसा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद है जो रंग, बनावट और स्वाद में बिल्कुल असली डेयरी पनीर जैसा दिखाई देता है। इसे पारंपरिक तरीके से दूध को फाड़कर तैयार नहीं किया जाता, बल्कि इसमें वनस्पति तेल (अक्सर रिफाइंड या पाम ऑयल), मिल्क पाउडर, स्टार्च, इमल्सीफायर और अन्य स्टेबलाइजर्स का उपयोग किया जाता है। कई मामलों में सोया या अन्य प्लांट-बेस्ड प्रोटीन भी मिलाया जाता है। उत्पादन लागत बेहद कम होने और सामान्य पनीर की तुलना में अधिक शेल्फ लाइफ होने के कारण यह व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होता है।

एफएसएसएआई के मौजूदा दिशा-निर्देशों के तहत एनालॉग पनीर का उत्पादन पूरी तरह से गैर-कानूनी नहीं है, बशर्ते इसे ‘नॉन-डेयरी’ या ‘एनालॉग’ के रूप में सही तरीके से पैक और लेबल किया जाए। असली संकट तब उत्पन्न होता है जब मुनाफाखोरी के चक्कर में होटल, ढाबे और क्लाउड किचन वाले बिना ग्राहकों को सूचित किए इसे असली दूध का पनीर बताकर परोसते हैं। त्योहारों के दौरान शादियों और पार्टियों में बड़े पैमाने पर इसकी खपत होती है, जिससे उपभोक्ताओं को न केवल आर्थिक रूप से ठगा जाता है बल्कि उनके स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ होता है।

कई राज्यों में लग चुका है प्रतिबंध और चला छापेमारी का दौर

एनालॉग पनीर के कारण बढ़ रहे स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में इसके निर्माण और बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इससे पहले महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने एक वर्ष की अवधि के लिए इसके भंडारण और बिक्री पर कड़ा प्रतिबंध लगाया था, जिसके तहत नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना और कारावास का प्रावधान है। गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी इसी तरह के सख्त आदेश जारी किए जा चुके हैं।

प्रतिबंध लागू होने के बाद इन राज्यों में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों ने कई डेयरी इकाइयों, कोल्ड स्टोरेज और होटल परिसरों पर छापेमारी कर सैकड़ों किलोग्राम संदिग्ध पनीर जब्त किया। प्रयोगशाला परीक्षणों में दर्जनों सैंपल फेल पाए गए, जिनमें दूध की प्राकृतिक वसा (मिल्क फैट) की जगह पाम ऑयल और स्टार्च की भारी मिलावट की पुष्टि हुई थी। इस तरह की अनियमितताओं ने उपभोक्ता अधिकारों के हनन और खाद्य सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े किए हैं।

सेहत के लिए कितना नुकसानदायक है एनालॉग पनीर का सेवन

पोषण विशेषज्ञों और डॉक्टरों के अनुसार, दूध से बने असली पनीर में उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन बी12 और प्राकृतिक वसा पाई जाती है जो शरीर के विकास के लिए लाभदायक है। इसके विपरीत, एनालॉग पनीर में प्रोटीन की मात्रा बहुत कम होती है और इसे बनाने में इस्तेमाल होने वाले वनस्पति तेलों में संतृप्त वसा (सैचुरेटेड फैट) और ट्रांस फैट का स्तर काफी अधिक हो सकता है।

असली पनीर समझकर नियमित रूप से एनालॉग पनीर का सेवन करने से लंबे समय में लोगों की सेहत पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं। शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ने से हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, अत्यधिक स्टार्च और प्रिजर्वेटिव्स के कारण मोटापे और पाचन संबंधी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है। त्योहारों के मौसम में जब बच्चे और बुजुर्ग बड़ी मात्रा में पनीर के व्यंजनों का सेवन करते हैं, तो यह मिलावट और भी खतरनाक साबित हो सकती है।

Analogue Paneer: उपभोक्ताओं की जागरूकता और खाद्य सुरक्षा के लिए आगे की राह

एनएचआरसी द्वारा उठाया गया यह कदम देश भर में खाद्य सुरक्षा के मानकों को सुदृढ़ करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब केवल राज्यों के स्थानीय अधिकारियों पर निर्भर रहने के बजाय राष्ट्रीय स्तर पर एफएसएसएआई को एक स्पष्ट और कड़ी नीति पेश करनी होगी। विशेषज्ञों का सुझाव है कि रेस्टोरेंट के मेन्यू कार्ड पर स्पष्ट रूप से लिखना अनिवार्य किया जाना चाहिए कि कौन से व्यंजन में असली पनीर और किसमें एनालॉग पनीर इस्तेमाल हो रहा है।

उपभोक्ताओं को भी अपनी ओर से सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। घर पर पनीर की शुद्धता की जांच के लिए कुछ सामान्य तरीके अपनाए जा सकते हैं; जैसे पनीर के टुकड़े पर आयोडीन सॉल्यूशन की कुछ बूंदें डालने पर यदि उसका रंग नीला हो जाए तो उसमें स्टार्च की मिलावट साफ जाहिर होती है। आगामी दो सप्ताह में एफएसएसएआई और राज्यों द्वारा सौंपी जाने वाली रिपोर्ट से यह तय होगा कि देश में मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए क्या ठोस कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाए जाते हैं।

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