Unique Places in India: भारत की 8 अनोखी जगहें, हिल स्टेशन और किलों से हटकर मिलेगा यादगार सफर का अनुभव
Unique Places in India: भारत की 8 अनोखी जगहें, हिल स्टेशन और किलों से हटकर मिलेगा यादगार सफर का अनुभव
Unique Places in India: भारत में घूमने की जगहों की कमी नहीं है, लेकिन ज्यादातर सैलानी हिल स्टेशन, किले और समुद्र तटों तक ही सीमित रह जाते हैं। अगर इस बार कुछ अलग देखना है, तो भारत की अनोखी जगहें एक नया अनुभव दे सकती हैं। कहीं मंदिर में हजारों चूहे खुलेआम घूमते मिलेंगे, तो कहीं पेड़ों की जड़ों से बना पुल रास्ता दिखाएगा।
कुछ जगहों पर रात के समय जंगल में ट्रेकिंग का मौका है, तो कहीं जमी हुई नदी पर पैदल चलने का रोमांच। राजस्थान, मेघालय, लद्दाख, नागालैंड, ओडिशा, केरल और मणिपुर में फैली ये आठ जगहें संस्कृति, प्रकृति और एडवेंचर, तीनों का स्वाद देती हैं। आइए एक-एक कर इन्हें जानते हैं।
करणी माता मंदिर, देशनोक: जहां चूहे हैं आस्था का केंद्र
राजस्थान में बीकानेर के पास देशनोक में करणी माता मंदिर स्थित है। यह मंदिर अपने हजारों चूहों के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि यहां के चूहे देवी के भक्तों का दोबारा जन्म हैं।
ये चूहे मंदिर परिसर में खुलेआम घूमते हैं और चढ़ाया गया प्रसाद भी खाते हैं। श्रद्धालुओं में मान्यता है कि सफेद चूहे का दिखना शुभ होता है। आस्था और अनोखे नजारे का यह मेल बहुत कम जगहों पर देखने को मिलता है।
उम्शियांग डबल डेकर रूट ब्रिज, मेघालय: पेड़ों की जड़ों से बना पुल
मेघालय के चेरापूंजी में उम्शियांग डबल डेकर रूट ब्रिज देखने लायक जगह है। यहां पहुंचने के लिए करीब तीन किलोमीटर का रास्ता जंगल के बीच से पैदल तय करना पड़ता है। इसलिए यह सफर अपने आप में एक छोटा ट्रेक बन जाता है।
इस पुल की सबसे खास बात इसकी बनावट है। इसे खासी जनजाति ने रबर के पेड़ों की जड़ों से तैयार किया है। प्रकृति और स्थानीय हुनर का ऐसा तालमेल इसे आम पर्यटन स्थलों से अलग बनाता है।
चादर ट्रेक, लद्दाख: जमी हुई जांस्कर नदी पर सफर
जनवरी और फरवरी की कड़ाके की सर्दी में लद्दाख की जांस्कर नदी जम जाती है। इसी जमी हुई नदी पर चादर ट्रेक किया जाता है। चारों तरफ ऊंची चट्टानें होती हैं और नीचे बर्फ की परत।
बर्फ पर चलने का यह अनुभव आम ट्रेकिंग से बिल्कुल अलग माना जाता है। रोमांच पसंद करने वालों के लिए यह सर्दियों की खास मंजिल है। इसकी योजना जनवरी-फरवरी के हिसाब से बनानी होगी।
हॉर्नबिल फेस्टिवल, नागालैंड: जनजातीय संस्कृति का उत्सव
जो लोग किसी जगह की संस्कृति को करीब से देखना चाहते हैं, उनके लिए नागालैंड का कोहिमा अच्छा विकल्प है। यहां हर साल 1 से 10 दिसंबर तक हॉर्नबिल फेस्टिवल होता है। दस दिन के इस आयोजन में पूरे राज्य की रौनक दिखती है।
फेस्टिवल में नागालैंड की अलग-अलग जनजातियों की संस्कृति, नृत्य और खेल देखने को मिलते हैं। एक ही जगह पर कई समुदायों की परंपराओं से रूबरू होने का यह अच्छा मौका है। दिसंबर में घूमने का प्लान बनाने वालों के लिए यह अलग तरह की मंजिल साबित हो सकती है।
भानगढ़ किला, राजस्थान: डरावने किस्सों वाला खंडहर
राजस्थान का भानगढ़ किला अपने डरावने किस्सों के लिए मशहूर है। यहां पुराने महलों और मंदिरों के खंडहर देखे जा सकते हैं। इतिहास और रहस्य में दिलचस्पी रखने वालों को यह जगह खास तौर पर खींचती है।
एक जरूरी बात यह है कि शाम के बाद यहां जाना पूरी तरह मना है। इसलिए दिन के उजाले में ही घूमने की योजना बनानी चाहिए। यहां प्रचलित किस्से लोककथाओं पर आधारित हैं।
रुशिकुल्या बीच, ओडिशा: ऑलिव रिडले कछुओं का नजारा
ओडिशा के रुशिकुल्या बीच पर जनवरी से मार्च के बीच हजारों ऑलिव रिडले कछुए अंडे देने पहुंचते हैं। यह नजारा प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होता। गाइड की निगरानी में इसे देखा जा सकता है।
इस दुर्लभ दृश्य को देखने के लिए यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग आते हैं। इसलिए जाने से पहले समय और व्यवस्था की जानकारी ले लेना बेहतर रहेगा। जनवरी से मार्च का समय इसके लिए उपयुक्त माना गया है।
पेरियार टाइगर रिजर्व, केरल: रात के जंगल की सैर
केरल के पेरियार टाइगर रिजर्व में गाइड और गार्ड के साथ रात के समय जंगल की सैर की जा सकती है। दिन के उजाले में दिखने वाला जंगल रात में बिल्कुल अलग रूप में सामने आता है। सुरक्षा के लिहाज से यह सैर गाइड और गार्ड की देखरेख में ही कराई जाती है।
इस दौरान उल्लू और सिवेट जैसे रात में निकलने वाले जानवर देखने को मिल सकते हैं। वन्यजीवों में रुचि रखने वालों के लिए यह अनुभव यादगार बन सकता है। हालांकि जानवरों का दिखना हर बार तय नहीं होता।
लोकटक झील, मणिपुर: तैरते द्वीपों पर संस्कृति की झलक
मणिपुर की लोकटक झील अपने तैरते द्वीपों के लिए जानी जाती है। इन आइलैंड्स की खूबसूरती सैलानियों को अलग ही दुनिया में ले जाती है। यहां तैरते होमस्टे में ठहरने का भी विकल्प मिलता है।
होमस्टे में रुकने से स्थानीय संस्कृति को नजदीक से समझने का मौका मिलता है। झील के बीच रहकर वहां की जीवनशैली को देखना आम होटल प्रवास से काफी अलग अनुभव है। पूर्वोत्तर की यात्रा में यह पड़ाव जोड़ा जा सकता है।
इन जगहों की खासियत क्या है
इन सभी जगहों में एक बात समान है। यहां घूमने के साथ कुछ ऐसा देखने या करने को मिलता है, जो आम ट्रिप से हटकर होता है। किसी जगह प्रकृति का रंग दिखता है, तो कहीं लोक संस्कृति और कहीं एडवेंचर।
मौसम का ध्यान रखना इन यात्राओं में सबसे जरूरी है। चादर ट्रेक सर्दियों में होता है, ऑलिव रिडले कछुए जनवरी से मार्च के बीच आते हैं और हॉर्नबिल फेस्टिवल दिसंबर की शुरुआत में लगता है। इसलिए यात्रा से पहले समय तय कर लेना समझदारी है।
भारत की ये आठ अनोखी जगहें बताती हैं कि देश में घूमने का मतलब सिर्फ हिल स्टेशन और किले नहीं है। राजस्थान का करणी माता मंदिर और भानगढ़ किला, मेघालय का रूट ब्रिज, लद्दाख का चादर ट्रेक, नागालैंड का हॉर्नबिल फेस्टिवल, ओडिशा के कछुए, केरल का रात्रि जंगल सफारी अनुभव और मणिपुर की लोकटक झील हर बार कुछ नया दिखाते हैं। यात्रा से पहले मौसम, तारीख और स्थानीय नियमों की जानकारी जुटा लेना जरूरी है। गाइड की मदद और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने से सफर सुरक्षित रहेगा। अगली ट्रिप में भीड़ से हटकर कुछ अलग करना है, तो इनमें से कोई भी जगह यादगार अनुभव दे सकती है।
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