Friday Remedies: शुक्रवार को करें ये विशेष उपाय, देवी लक्ष्मी और संतोषी माता की पूजा से घर में आएगी सुख-समृद्धि और धन-वैभव
शुक्रवार को लक्ष्मी और संतोषी माता की पूजा करें, जानें धन-समृद्धि के खास उपाय
Friday Remedies: हिंदू सनातन धर्म और वैदिक ज्योतिषशास्त्र में शुक्रवार के दिन को अत्यंत पवित्र, कल्याणकारी और फलदायी माना गया है। यह दिन मुख्य रूप से धन, ऐश्वर्य, वैभव और सौंदर्य की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी तथा संतोष व सुख प्रदान करने वाली माता संतोषी को समर्पित है। इसके साथ ही, नवग्रहों में भौतिक सुख-सुविधाओं और दांपत्य जीवन के कारक ग्रह ‘शुक्र देव’ का संबंध भी शुक्रवार से ही है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो साधक शुक्रवार के दिन विधि-विधान से माता लक्ष्मी और संतोषी माता की पूजा करते हैं, उनके जीवन से दरिद्रता, आर्थिक तंगी और मानसिक अशांति का हमेशा के लिए नाश हो जाता है। आइए जानते हैं शुक्रवार की पूजा का धार्मिक महत्व, संपूर्ण पूजा विधि, अचूक उपाय और इससे मिलने वाले दिव्य लाभों के बारे में।
Friday Remedies: शुक्रवार को किसकी पूजा करें और क्या है इसका धार्मिक महत्व
वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को आकर्षण, प्रेम, धन, कला और ऐश्वर्य का स्वामी माना जाता है। जब कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत होता है, तो व्यक्ति को जीवन में सभी प्रकार के सांसारिक सुख प्राप्त होते हैं। वहीं शुक्र के कमजोर होने पर व्यक्ति को धन हानि और पारिवारिक कलह का सामना करना पड़ता है। इसलिए शुक्रवार को मुख्य रूप से माता लक्ष्मी और शुक्र देव की उपासना की जाती है।
इसके अतिरिक्त, भारतीय जनमानस में शुक्रवार के दिन संतोषी माता का व्रत और पूजन करने की भी समृद्ध परंपरा है। देवी महालक्ष्मी जहां जीवन में धन-धान्य और वैभव का विस्तार करती हैं, वहीं संतोषी माता की कृपा से परिवार में आपसी प्रेम, संतोष और मानसिक शांति बनी रहती है। जो लोग निसंतानता या विवाह में आ रही रुकावटों से परेशान हैं, उनके लिए भी शुक्रवार का पूजन विशेष रूप से फलदायी माना गया है।
शुक्रवार की पूजा की प्रामाणिक एवं सरल विधि
शुक्रवार के दिन पूजा का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इसे सूर्योदय के समय या फिर संध्याकाल यानी प्रदोष काल में करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। पूजा शुरू करने से पहले घर के ईशान कोण या मंदिर स्थल की अच्छी तरह सफाई करना अत्यंत आवश्यक है।
स्नान ध्यान से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें, क्योंकि इस दिन सफेद या गुलाबी रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है। पूजा स्थल पर लाल या गुलाबी रंग का रेशमी कपड़ा बिछाकर माता लक्ष्मी या संतोषी माता की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। इसके बाद देवी के समक्ष शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें और धूप-अगरबत्ती जलाएं। माता को लाल या सफेद पुष्प, कुमकुम, अक्षत, हल्दी और श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें।
भोग के रूप में मां लक्ष्मी को मखाने की खीर, सफेद मिठाई, दूध या मावे का नैवेद्य चढ़ाएं। यदि आप संतोषी माता की पूजा कर रहे हैं, तो उन्हें गुड़ और भुने हुए चने का भोग अवश्य लगाएं। पूजा के दौरान महालक्ष्मी के सिद्ध मंत्र “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नमः” का कम से कम 108 बार कमलगट्टे की माला से जाप करें और संतोषी माता के लिए “ॐ शांतायै नमः” मंत्र का जाप करें। अंत में माता की कपूर से आरती करें और परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद का वितरण करें।
धन-धान्य में वृद्धि के लिए शुक्रवार के अचूक और विशेष उपाय
यदि आप लंबे समय से आर्थिक संकट, कर्ज या व्यापार में घाटे से जूझ रहे हैं, तो शुक्रवार के दिन शास्त्रीय मान्यताओं पर आधारित कुछ विशेष उपाय आपके जीवन की दिशा बदल सकते हैं।
शुक्रवार की सुबह स्नान के बाद घर के मुख्य द्वार को साफ करें और द्वार के दोनों तरफ हल्दी व कुमकुम से स्वास्तिक बनाकर रोली का टीका लगाएं। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश रुकता है और महालक्ष्मी का आगमन होता है। इसके साथ ही शुक्रवार की शाम को तुलसी के पौधे के पास शुद्ध घी का दीपक जलाएं और जल अर्पित करें।
शुक्र ग्रह और लक्ष्मी जी की प्रसन्नता के लिए शुक्रवार को सफेद वस्तुओं जैसे चावल, दूध, दही, मिश्री, सफेद वस्त्र या चांदी का दान किसी जरूरतमंद महिला या ब्राह्मण को करना चाहिए। वहीं व्यापारी वर्ग अपनी दुकान या कार्यालय के गल्ले में सिद्ध श्रीयंत्र स्थापित कर सकते हैं और प्रतिदिन सुबह कुमकुम लगाकर धूप-दीप दिखा सकते हैं, जिससे व्यापार में रुका हुआ धन वापस आता है।
शुक्रवार व्रत के नियम और सावधानियां
जो महिलाएं या पुरुष शुक्रवार का व्रत रखते हैं, उन्हें कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। संतोषी माता का व्रत रखने वाले जातकों को इस दिन भूलकर भी खट्टी चीजों जैसे नींबू, इमली, अमचूर, खट्टा अचार आदि का सेवन नहीं करना चाहिए और न ही घर में किसी को खट्टा खाने देना चाहिए।
पूजा के दौरान मन में किसी के प्रति ईर्ष्या, क्रोध या द्वेष भावना न लाएं। पूरे दिन सात्विकता का पालन करें और सत्य का आचरण करें। यदि घर पर पूजा संभव न हो, तो किसी नजदीकी लक्ष्मी नारायण मंदिर या देवी मंदिर जाकर माता के दर्शन करें और खीर का भोग चढ़ाएं।
Friday Remedies: आधुनिक जीवनशैली में शुक्रवार पूजन का व्यावहारिक एवं मानसिक लाभ
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और तनावपूर्ण माहौल में शुक्रवार की पूजा न केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानसिक संतुलन बनाए रखने का भी एक बेहतरीन जरिया है। पूरे सप्ताह की मानसिक थकान के बाद शुक्रवार की शाम को परिवार के साथ बैठकर की जाने वाली पूजा और मंत्रोच्चार से मन शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
शास्त्रों में कहा गया है कि जहाँ स्वच्छता, शांति और महिलाओं का सम्मान होता है, वहीं महालक्ष्मी का स्थायी वास होता है। अतः शुक्रवार को देवी पूजन के साथ-साथ अपने घर की महिलाओं का सम्मान करें और घर में प्रेम का वातावरण बनाए रखें। श्रद्धा, भक्ति और नियमितता से किए गए ये उपाय आपके जीवन को सुख, समृद्धि और शांति से भर देंगे।
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