World Tourism Day 2026: राजस्थान में स्मारकों पर फ्री एंट्री, आमेर महल-जंतर मंतर समेत इन जगहों पर खास आयोजन

27 सितंबर को आमेर महल, जंतर-मंतर समेत राजस्थान के संरक्षित स्मारकों में पर्यटकों को मुफ्त प्रवेश

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World Tourism Day 2026: ‘अतिथि देवो भव:’ और ‘पधारो म्हारे देस’ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को साकार करते हुए राजस्थान सरकार ने विश्व पर्यटन दिवस (World Tourism Day) के पावन अवसर पर देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को एक बड़ा उपहार दिया है। राज्य सरकार के पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के आदेशानुसार 27 सितंबर 2026 को प्रदेश भर में स्थित सभी राज्य संरक्षित ऐतिहासिक स्मारकों, दुर्गों, महलों और राजकीय संग्रहालयों में देशी तथा विदेशी दोनों श्रेणियों के पर्यटकों को पूर्णतः निःशुल्क प्रवेश दिया गया। आम दिनों में जिन ऐतिहासिक धरोहरों का दीदार करने के लिए निर्धारित प्रवेश शुल्क चुकाना पड़ता था, वहां आज आगंतुक बिना किसी टिकट के राजस्थान के गौरवशाली इतिहास और स्थापत्य कला के साक्षी बने।

इस विशेष अवसर पर गुलाबी नगर जयपुर सहित जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, जैसलमेर और चित्तौड़गढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों के भव्य स्वागत हेतु विशेष प्रबंध किए गए। मुख्य प्रवेश द्वारों पर पर्यटकों का पारंपरिक तिलक लगाकर, सूत की माला पहनाकर और शहनाई की मंगल ध्वनियों के साथ स्वागत किया गया। इस अनूठी पहल से न केवल स्थानीय पर्यटन को नई ऊर्जा मिली, बल्कि युवा पीढ़ी और विदेशी सैलानियों को भारत की स्थापत्य व वैज्ञानिक विरासत को निकट से समझने का अवसर भी प्राप्त हुआ।

World Tourism Day 2026: आमेर महल में लोक संस्कृति का रंग

जयपुर की अरावली पहाड़ियों पर गर्व से सीना ताने खड़े ऐतिहासिक आमेर महल (Amber Fort) में विश्व पर्यटन दिवस की सुबह से ही पर्यटकों का भारी तांता देखने को मिला। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित इस दुर्ग के सिंह पोल और जलेब चौक में प्रवेश करते ही पर्यटकों का स्वागत पारंपरिक कच्छी घोड़ी, गैर और कालबेलिया लोक नर्तकों की ऊर्जावान प्रस्तुतियों से हुआ।

विदेशी सैलानी राजस्थानी ढोलक और खड़ताल की थाप पर थिरकते नजर आए। आमेर महल के दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास और शीश महल की नक्काशीदार संगमरमरी संरचनाओं को देखने आए पर्यटकों ने लोक कलाकारों के साथ संवाद स्थापित किया। पुरातत्व विभाग द्वारा गाइडों के माध्यम से पर्यटकों को मानसिंह प्रथम और मिर्जा राजा जयसिंह के कालखंड के स्थापत्य, जल संचयन प्रणालियों और युद्ध कला की ऐतिहासिक बारीकियों से अवगत कराया गया।

जंतर-मंतर पर खगोलीय विज्ञान और प्राचीन काल-गणना का अनूठा प्रदर्शन

जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा 18वीं शताब्दी में निर्मित विश्व प्रसिद्ध खगोलीय वेधशाला ‘जंतर-मंतर’ पर भी विशेष सांस्कृतिक व शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की गईं। पत्थरों और संगमरमर से बने इस वास्तु-आधारित वेधशाला परिसर में पर्यटकों का प्रवेश निःशुल्क रहा, जहां सुबह 9:00 बजे से ही शहनाई और नगाड़े की सुरीली धुनों ने पूरे वातावरण को उत्सवधर्मी बना दिया।

जंतर-मंतर पर आने वाले विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए विशेष सत्र आयोजित किए गए, जिसमें दुनिया की सबसे बड़ी पत्थर की धूपघड़ी ‘सम्राट यंत्र’ के माध्यम से समय की सटीक गणना, सूर्य की स्थिति और ग्रहों के संचरण को मापने की प्राचीन भारतीय गणितीय पद्धति को व्यावहारिक रूप से प्रदर्शित किया गया। पर्यटकों ने यह जानकर अत्यधिक विस्मय व्यक्त किया कि बिना किसी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के सदियों पूर्व कैसे भारतीय खगोलविदों ने सेकंड के सूक्ष्म भाग तक की सही गणना करने वाले यंत्र स्थापित कर दिए थे।

देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए समान सुविधा: विरासत से जुड़ने का अभियान

राजस्थान पुरातत्व विभाग की इस विशेष छूट की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह रही कि इसमें भारतीय नागरिकों के साथ-साथ विदेशी सैलानियों को भी पूर्णतः निःशुल्क प्रवेश का अधिकार दिया गया। सामान्य दिनों में विदेशी पर्यटकों के लिए टिकट दरें अपेक्षाकृत अधिक होती हैं, किंतु पर्यटन दिवस पर सभी के लिए प्रवेश मुक्त रखकर राज्य ने वैश्विक सद्भाव और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का सशक्त संदेश दिया।

इस छूट के चलते जयपुर के हवा महल, अल्बर्ट हॉल संग्रहालय, नाहरगढ़ दुर्ग और ईसरलाट सहित राज्य भर के दर्जनों संरक्षित स्मारकों पर पर्यटकों की संख्या में कई गुना उछाल दर्ज किया गया। पर्यटन अधिकारियों के अनुसार, एक ही दिन में शुल्क मुक्त प्रवेश मिलने से कई पर्यटकों ने एक ही दिन में चार से पांच स्मारकों का भ्रमण करने का कार्यक्रम तैयार किया, जिससे स्थानीय हस्तशिल्प बाजार, टैक्सी संचालकों और होटल व्यवसाय को भी अप्रत्यक्ष रूप से बड़ा लाभ पहुंचा।

राजस्थान की स्थापत्य व लोक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने का संकल्प

राजस्थान देश का वह अग्रणी राज्य है जिसकी अर्थव्यवस्था और रोजगार में पर्यटन क्षेत्र की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां के थार मरुस्थल से लेकर मेवात और मेवाड़ के पर्वतीय अंचलों तक फैला इतिहास केवल पत्थरों की दीवारें नहीं, बल्कि त्याग, शौर्य और कलात्मक उत्कृष्टता का जीवंत दस्तावेज है।

विश्व पर्यटन दिवस पर आयोजित यह आयोजन केवल स्मारकों के द्वार खोलने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके जरिए युवाओं, विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अपनी जड़ों और गौरवशाली अतीत से जोड़ने का प्रयास किया गया। राज्य के संग्रहालयों में संरक्षित दुर्लभ सिक्कों, हथियारों, वस्त्रों और लघु चित्रों की प्रदर्शनियों ने आगंतुकों को मध्यकालीन भारत के सामाजिक व आर्थिक ताने-बाने की स्पष्ट समझ प्रदान की।

World Tourism Day 2026: समय सारणी और स्मारकों की सुरक्षा सर्वोपरि

यद्यपि विश्व पर्यटन दिवस पर सभी राज्य संरक्षित स्मारकों में प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रहा, किंतु पुरातत्व विभाग ने पर्यटकों से स्मारकों की सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़े अनिवार्य नियमों का कड़ाई से पालन करने का आग्रह किया। स्मारकों के खुलने और बंद होने का समय नियमित दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही संचालित रहा, जिसके तहत अधिकांश स्थल सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 से 7:00 बजे तक खुले रहे।

प्रशासन ने सैलानियों से अपील की कि वे प्राचीन संरचनाओं पर किसी भी प्रकार की लिखावट या गंदगी करने से बचें और प्लास्टिक कचरा केवल निर्धारित पात्रों में ही डालें। ऐतिहासिक धरोहरों की शुचिता और गरिमा बनाए रखना प्रत्येक नागरिक और पर्यटक का नैतिक दायित्व है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी भारत की इस अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर पर गर्व कर सकें।

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