LPU Protest: 10 दिन बंद रहेंगी कक्षाएं, मिड-टर्म परीक्षाएं स्थगित; हिंसक प्रदर्शन के बाद SIT जांच जारी

हिंसक प्रदर्शन के बाद LPU ने कक्षाएं स्थगित कीं, मिड-टर्म परीक्षाएं भी अगली सूचना तक टलीं

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LPU Protest: पंजाब के कपूरथला जिले के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) परिसर में बीते सप्ताहांत से जारी व्यापक छात्र आक्रोश, हिंसक झड़पों और राष्ट्रीय राजमार्ग जाम के उपरांत अब विश्वविद्यालय धीरे-धीरे शांति और सामान्य स्थिति की ओर लौटने का प्रयास कर रहा है। परिसर में उत्पन्न हुए गंभीर सुरक्षा संकट, पुलिस वाहनों में तोड़फोड़-आगजनी और शैक्षणिक वातावरण के प्रभावित होने के मद्देनजर विश्वविद्यालय प्रबंधन ने सोमवार, 28 सितंबर 2026 से आगामी 10 दिनों के लिए समस्त नियमित शैक्षणिक कक्षाओं को औपचारिक रूप से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही वर्तमान में संचालित हो रही मिड-टर्म परीक्षाओं को भी आगामी आधिकारिक आदेश तक स्थगित कर दिया गया है।

इस निर्णय के लागू होते ही परिसर में मौजूद हजारों विद्यार्थियों ने अपने घरों की ओर लौटना शुरू कर दिया है। देश के विभिन्न राज्यों से भारी संख्या में अभिभावक अपने वाहनों से फगवाड़ा पहुंचे और अपने बच्चों को लेकर रवाना हुए। वहीं दूसरी ओर, जालंधर-फगवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) को लगभग 20 घंटे के लंबे गतिरोध के बाद पुलिस बल द्वारा प्रदर्शनकारियों को हटाकर यातायात के लिए पूरी तरह खोल दिया गया है। इस दौरान कानून व्यवस्था को बिगाड़ने और भीड़ को उकसाने के संदेह में पुलिस ने पांच संदिग्ध युवकों को हिरासत में लेकर उनसे सघन पूछताछ प्रारंभ कर दी है।

LPU Protest: 20 घंटे के तनाव के बाद खुला राष्ट्रीय राजमार्ग

विश्वविद्यालय परिसर के मुख्य द्वारों से बाहर निकलकर जालंधर-फगवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर शनिवार देर रात से शुरू हुआ छात्रों का धरना रविवार देर रात तक जारी रहा। करीब 20 घंटे तक इस प्रमुख राष्ट्रीय मार्ग के अवरुद्ध रहने से पंजाब, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाली जीवनरेखा पूरी तरह ठप हो गई थी। पुलिस और नागरिक प्रशासन की कई दौर की वार्ता विफल रहने के उपरांत जब पुलिस बल ने सड़क को खाली कराने का प्रयास किया, तो भीड़ के भीतर से तीखा विरोध सामने आया।

टकराव के दौरान उपद्रवी तत्वों ने पुलिस पर भारी पथराव किया, जिसमें कई पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को चोटें आईं। उग्र भीड़ ने पंजाब पुलिस के वाहनों में तोड़फोड़ की और कुछ गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। स्थिति के हाथ से निकलने के अंदेशे को देखते हुए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा, जिसके बाद प्रदर्शनकारी तितर-बितर हुए। क्रेन और अग्निशमन दलों की मदद से जले हुए वाहनों और मलबे को हटाकर हाईवे पर सामान्य वाहनों का आवागमन पुनः सुचारू कराया गया।

10 दिनों के लिए कक्षाएं निलंबित, मिड-टर्म परीक्षाएं टलीं: छात्रों का पलायन शुरू

विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक परिपत्र के अनुसार, 28 सितंबर से अगले 10 दिनों तक कोई भी भौतिक कक्षाएं आयोजित नहीं की जाएंगी। इस अवधि में प्रस्तावित सभी मिड-टर्म परीक्षाओं को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है और नई समय सारणी की घोषणा स्थिति की पूर्ण समीक्षा के पश्चात विश्वविद्यालय के आधिकारिक पोर्टल पर की जाएगी। प्रबंधन ने छात्रों को विकल्प दिया है कि वे अपने अभिभावकों से परामर्श कर इस अवकाश अवधि में अपने गृह नगर जा सकते हैं।

कक्षाएं बंद होने की घोषणा के साथ ही विश्वविद्यालय के बाहर अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिले। ऑटो स्टैंड, स्थानीय रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर अपने सामान और सूटकेस के साथ खड़े छात्रों की लंबी कतारें लग गईं। दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान से पहुंचे अभिभावकों ने राहत की सांस ली कि वे अपने बच्चों को सुरक्षित घर ले जा रहे हैं। हॉस्टल में रुकने वाले शेष छात्रों को प्रशासन ने परिसर से बाहर न निकलने और शांति बनाए रखने के कड़े निर्देश दिए हैं।

पांच संदिग्ध युवक हिरासत में: बाहरी तत्वों द्वारा हिंसा भड़काने की जांच

प्रदर्शन के हिंसक रूप लेने के पीछे बाहरी असामाजिक तत्वों की सक्रियता की आशंका को बल मिला है। पंजाब पुलिस की 27वीं बटालियन की कमांडेंट गुरमीत कौर के अनुसार, पुलिस ने विश्वविद्यालय परिसर और हाईवे के निकट से पांच संदिग्ध युवकों को हिरासत में लिया है। इन युवकों के पास से कुछ संदिग्ध वस्तुएं बरामद की गई हैं, जिनका उपयोग उपद्रव और तोड़फोड़ के दौरान किए जाने का अंदेशा है।

जांच एजेंसियां इस बात की गहनता से पड़ताल कर रही हैं कि हिरासत में लिए गए युवक विश्वविद्यालय के पंजीकृत छात्र हैं अथवा किसी बाहरी संगठन या गिरोह द्वारा सुनियोजित तरीके से शांति भंग करने के लिए भेजे गए थे। साइबर सेल और स्थानीय खुफिया इकाइयां इन संदिग्धों के मोबाइल कॉल डिटेल्स, चैट रिकॉर्ड्स और सोशल मीडिया गतिविधियों को खंगाल रही हैं ताकि हिंसक विरोध प्रदर्शन की पूरी साजिश का पर्दाफाश किया जा सके।

वायरल वीडियो पर बढ़ा विवाद: छात्राओं के परस्पर विरोधी बयानों से उलझी गुत्थी

इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले परस्पर विरोधी वीडियोज ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। आंदोलन के शुरुआती चरण में विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से हॉस्टल की कुछ छात्राओं का एक वीडियो संदेश सार्वजनिक किया गया था, जिसमें वे कथित दुष्कर्म की घटना का खंडन करते हुए इसे कोरी अफवाह बता रही थीं।

किंतु इसके कुछ ही घंटों बाद उन्हीं छात्राओं का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आ गया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन के कुछ कर्मचारियों ने दबाव बनाकर उनसे पूर्व वीडियो में बयान दिलवाए थे और बिना उनकी सहमति के उसे प्रसारित किया गया। इस विरोधाभास के सामने आने के बाद छात्र समुदाय का आक्रोश और भड़क गया। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि दोनों वीडियोज की सत्यता, रिकॉर्डिंग के समय और परिस्थितियों की तकनीकी जांच कराई जा रही है ताकि दबाव के आरोपों का सच सामने आ सके।

एसआईटी (SIT) की वैज्ञानिक जांच जारी: सीसीटीवी और फोरेंसिक साक्ष्यों की पड़ताल

जालंधर रेंज के डीआईजी नवीन सिंगला के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT)—जिसमें फगवाड़ा के एसपी मेजर सिंह, डीएसपी पलविंदर सिंह, एक वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी और छात्र प्रतिनिधि शामिल हैं—ने मामले की कमान संभाल ली है। एसआईटी ने संबंधित गर्ल्स हॉस्टल, गलियारों, मुख्य द्वारों और घटना से जुड़े संभावित स्थलों के सभी डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR) और सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को फोरेंसिक विश्लेषण के लिए जब्त कर लिया है।

पुलिस के प्रारंभिक तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, अब तक खंगाले गए सीसीटीवी कैमरों में कथित घटना के संबंध में कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य दर्ज नहीं पाया गया है। तथापि, सतनामपुरा थाने में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर पुलिस पीड़िता छात्रा, उसके सहपाठियों, हॉस्टल वार्डन और सुरक्षाकर्मियों के विस्तृत मजिस्ट्रेटी बयान दर्ज कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब तक तकनीकी, फोरेंसिक और चिकित्सीय रिपोर्टों का अंतिम मिलान नहीं हो जाता, तब तक किसी भी अपुष्ट निष्कर्ष पर पहुंचना अनुचित होगा।

LPU Protest: अफवाहों पर विराम और पारदर्शी जांच से ही लौटेगा विश्वास

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में बीते 48 घंटों के दौरान घटी घटनाएं इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि अपुष्ट सोशल मीडिया संदेश और संचार का अभाव एक प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थान में कितनी तेजी से अविश्वास और अराजकता पैदा कर सकता है। 10 दिनों के अवकाश और परीक्षाओं के स्थगन से तात्कालिक तनाव को कम करने में अवश्य सहायता मिली है, किंतु स्थायी समाधान केवल निष्पक्ष जांच से ही संभव है।

प्रशासन और पुलिस की यह सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए कि वे एसआईटी जांच के निष्कर्षों को पूरी पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक करें, ताकि किसी भी निर्दोष के साथ अन्याय न हो और यदि कोई गंभीर अपराध या साजिश हुई हो तो दोषियों को कानून के शिकंजे में लाया जा सके। वहीं छात्रों और अभिभावकों को भी किसी भी अपुष्ट वायरल सामग्री पर आंख मूंदकर भरोसा करने से बचते हुए आधिकारिक जांच रिपोर्ट की प्रतीक्षा करनी चाहिए।

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