Petrol-Diesel Price 14 August 2026: स्वतंत्रता दिवस से पहले पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, दिल्ली से मुंबई तक जानें आज का ताजा भाव

दिल्ली से मुंबई और लखनऊ तक पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट जारी, कीमतों में नहीं हुआ बदलाव

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Petrol-Diesel Price 14 August 2026: देश भर में 14 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर पेट्रोल और डीजल की नई दरें जारी कर दी गई हैं। राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर पर सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने आज भी ईंधन की कीमतों को पूरी तरह स्थिर बनाए रखा है। पिछले लंबे समय से घरेलू बाजार में खुदरा दरों में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला है, जिससे आम जनता, वाहन चालकों और व्यापारियों को महंगाई के मोर्चे पर राहत मिल रही है।

भारतीय तेल कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड प्रतिदिन सुबह 6 बजे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की चाल और विदेशी मुद्रा दरों की समीक्षा करने के बाद नई दरें तय करती हैं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल के दामों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, फिर भी भारतीय बाजार में ईंधन के दाम नियंत्रित हैं।

Petrol-Diesel Price 14 August 2026: दिल्ली और एनसीआर के शहरों में ईंधन का ताजा गणित

देश की राजधानी नई दिल्ली में पेट्रोल और डीजल की कीमतें सबसे ज्यादा स्थिर नजर आ रही हैं। दिल्ली में पेट्रोल का भाव 102.12 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है, जबकि डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा है। अन्य राज्यों के मुकाबले दिल्ली में मूल्य वर्धित कर यानी वैट की दरें काफी संतुलित हैं, जिस वजह से यहां पूरे एनसीआर क्षेत्र की तुलना में ईंधन थोड़ा सस्ता मिलता है।

राष्ट्रीय राजधानी से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा और ग्रेटर नोएडा में स्थानीय करों की वजह से दरों में हल्का अंतर देखने को मिलता है। नोएडा में पेट्रोल का रेट करीब 101.52 रुपये और डीजल लगभग 95.44 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं हरियाणा के गुरुग्राम में पेट्रोल 102.97 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.64 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर बना हुआ है। एनसीआर में रोजाना सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों और वाणिज्यिक वाहन चालकों के लिए यह स्थिरता काफी राहत देने वाली साबित हो रही है।

मुंबई सहित महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों में क्या हैं पेट्रोल-डीजल के रेट

पश्चिम भारत के वित्तीय केंद्र मुंबई में पेट्रोल और डीजल के दाम देश के अन्य महानगरों से काफी अधिक बने हुए हैं। मुंबई में वैट की उच्च दरों के चलते पेट्रोल 111.21 रुपये प्रति लीटर और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर के आंकड़े पर स्थिर है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा लगाए जाने वाले विभिन्न स्थानीय शुल्कों और उपकरों के कारण राज्य के अलग-अलग जिलों में कीमतों में मामूली उतार-चढ़ाव देखा जाता है।

उदाहरण के लिए, पुणे में पेट्रोल की कीमत 111.80 रुपये प्रति लीटर के करीब बनी हुई है, जबकि नागपुर और नासिक में भी दाम इसी के इर्द-गिर्द घूम रहे हैं। महाराष्ट्र में ईंधन की अधिक कीमतों के बावजूद लंबे समय से संशोधन न होने के कारण परिवहन व्यवसायियों ने राहत की सांस ली है। निजी कार मालिकों और दोपहिया चालकों का कहना है कि दरों में भले ही भारी कमी न आई हो, लेकिन अचानक बढ़ोतरी न होना भी बजट को संतुलित रखने में मदद करता है।

दक्षिण भारत के महानगरों और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में पेट्रोल-डीजल का भाव

दक्षिण भारत के राज्यों में राज्य सरकारों द्वारा वसूले जाने वाले सेल्स टैक्स और वैट की अलग-अलग दरों के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतें काफी भिन्न हैं। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में पेट्रोल सबसे महंगा बिक रहा है, जहां इसकी कीमत 115.69 रुपये प्रति लीटर और डीजल 103.82 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है।

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में पेट्रोल 111.68 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.56 रुपये प्रति लीटर के भाव पर उपलब्ध है। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में पेट्रोल 107.78 रुपये और डीजल 99.56 रुपये प्रति लीटर के आसपास बिक रहा है। दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में पेट्रोल का रेट 113.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर बना हुआ है। दक्षिण और पूर्वी भारत के इन प्रमुख व्यावसायिक शहरों में लॉजिस्टिक्स लागत ज्यादा होने से माल ढुलाई पर भी असर पड़ता है।

उत्तर और मध्य भारत के अन्य बड़े शहरों का विस्तृत हाल

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 14 अगस्त को पेट्रोल 101.89 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.36 रुपये प्रति लीटर के भाव पर बेचा जा रहा है। राजस्थान के जयपुर में कर संरचना अधिक होने के कारण पेट्रोल 112.69 रुपये प्रति लीटर और डीजल 97.78 रुपये प्रति लीटर के आसपास बना हुआ है।

बिहार की राजधानी पटना में पेट्रोल 113.37 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.36 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ में वैट की दरें कम होने के कारण पेट्रोल 102.61 रुपये और डीजल 94.52 रुपये प्रति लीटर के बेहद आकर्षक स्तर पर उपलब्ध है। उत्तर भारत के कृषि प्रधान क्षेत्रों में डीजल की स्थिर दरें किसानों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद हैं, क्योंकि इससे सिंचाई और ट्रैक्टर परिचालन की लागत में अनपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो रही है।

तेल कंपनियों की नीति और अंतरराष्ट्रीय बाजार का घरेलू कीमतों पर असर

मई 2025 के अंत में घरेलू तेल कंपनियों द्वारा पेट्रोल में 2.61 रुपये और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी। उस अंतिम बड़े संशोधन के बाद से सरकारी रिफाइनरी कंपनियों ने रिटेल दरों को स्थिर रखने का नीतिगत फैसला किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल के दामों में वैश्विक उथल-पुथल के कारण कई बार तेजी और मंदी का दौर आया है, लेकिन भारत में इसका सीधा असर आम ग्राहकों पर नहीं पड़ने दिया गया।

भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति, मध्य पूर्व के तनाव और तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक द्वारा उत्पादन घटाने या बढ़ाने के फैसले भारतीय बाजार पर सीधा दबाव डालते हैं। इसके बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव का प्रभाव खुद झेलते हुए घरेलू दरों को नियंत्रित रखने का प्रयास कर रही हैं।

Petrol-Diesel Price 14 August 2026: ईंधन की कीमतों की स्थिरता का देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर प्रभाव

पेट्रोल और डीजल केवल व्यक्तिगत वाहनों के इस्तेमाल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये पूरी भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। डीजल का सबसे ज्यादा उपयोग देश भर में माल ढुलाई करने वाले ट्रकों, मालगाड़ियों, बसों और कृषि उपकरणों में होता है। यदि डीजल की कीमतों में अचानक उछाल आता है, तो सब्जी, फल, खाद्यान्न और अन्य दैनिक उपभोग की वस्तुओं का परिवहन महंगा हो जाता है, जिससे सीधे तौर पर खुदरा महंगाई बढ़ती है।

ईंधन की कीमतों में बनी यह लगातार स्थिरता खुदरा महंगाई दर को नियंत्रण में रखने के लिए बेहद अहम साबित हो रही है। लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर को एक निश्चित बजट के तहत काम करने का अवसर मिल रहा है। इससे विनिर्माण क्षेत्र की लागत भी नियंत्रित रहती है, जिसका अंतिम लाभ उपभोक्ता तक पहुंचता है। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि त्योहारी सीजन से ठीक पहले दरों में यह ठहराव बाजार में उपभोक्ता मांग को बनाए रखने में मददगार साबित होगा।

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