UP Ola Uber New Rules 2026: यूपी में Ola-Uber के नए नियम लागू, 40 घंटे की ट्रेनिंग से किराये की सीमा तक जानें पूरी गाइडलाइन

ड्राइवरों की 40 घंटे की ट्रेनिंग, पुलिस वेरिफिकेशन और किराये पर 1.5 गुना तक की सीमा

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UP Ola Uber New Rules 2026: उत्तर प्रदेश में मोबाइल ऐप के जरिए कैब, ऑटो, बाइक टैक्सी और पार्सल डिलीवरी की सेवाएं संचालित करने वाली कंपनियों पर नकेल कसते हुए राज्य सरकार ने नई परिवहन नियमावली अधिसूचित कर दी है। परिवहन विभाग द्वारा जारी इस व्यापक नियामक ढांचे के तहत ओला (Ola), उबर (Uber), रैपिडो (Rapido) और अन्य डिजिटल एग्रीगेटर्स को अब राज्य सरकार से औपचारिक लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया गया है। नई नियमावली में कंपनियों के विधिक पंजीकरण से लेकर चालकों की योग्यता, पुलिस सत्यापन, सघन तकनीकी प्रशिक्षण, यात्री बीमा, रीयल-टाइम वाहन ट्रैकिंग और सबसे महत्वपूर्ण किराये में होने वाली मनमानी सर्ज प्राइसिंग पर कड़ा अंकुश लगाया गया है।

हाल के वर्षों में लखनऊ, कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद, वाराणसी, प्रयागराज और आगरा जैसे बड़े महानगरों में ऐप-आधारित टैक्सियों का संचालन तेजी से बढ़ा है। किंतु इसके साथ ही यात्रियों द्वारा मनमाने किराये, अंतिम समय में बुकिंग कैंसिलेशन और चालकों के अनुचित व्यवहार की शिकायतें भी निरंतर बढ़ती जा रही थीं। शासन का स्पष्ट मानना है कि यह नई नियमावली डिजिटल परिवहन सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के साथ-साथ सड़क सुरक्षा और महिला यात्रियों की यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित बनाएगी।

UP Ola Uber New Rules 2026: कंपनियों के लिए 5 साल का राज्य लाइसेंस अनिवार्य

नए नियमों के अनुसार, अब कोई भी टेक प्लेटफॉर्म बिना राज्य परिवहन प्राधिकरण (STA) की औपचारिक विधिक अनुमति के कैब या डिलीवरी सेवा का संचालन नहीं कर सकेगा। मौजूदा और नई एग्रीगेटर कंपनियों को निर्धारित सरकारी शुल्क और सुरक्षा जमा राशि के साथ आवेदन कर 5 वर्ष की वैधता वाला लाइसेंस प्राप्त करना होगा।

इस व्यवस्था के तहत सरकार के पास इन कंपनियों के आंतरिक संचालन, डिजिटल एल्गोरिदम और उपभोक्ता शिकायतों के निवारण पर सतत प्रशासनिक नियंत्रण रहेगा। यदि कोई कंपनी तय नियमों, सुरक्षा मानकों या यात्री अधिकारों का बार-बार उल्लंघन करती पाई गई, तो परिवहन विभाग को उसके लाइसेंस को निलंबित अथवा पूर्णतः रद्द करने का विधिक अधिकार प्राप्त होगा।

ड्राइवरों की पृष्ठभूमि जांच: 2 वर्ष का अनुभव और पुलिस वेरिफिकेशन

यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ड्राइवरों के ऑनबोर्डिंग नियमों को बेहद कड़ा कर दिया गया है। नए दिशा-निर्देशों के तहत एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म से जुड़ने वाले किसी भी ड्राइवर के पास वैध कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस के साथ-साथ कम से कम 2 वर्ष का ड्राइविंग अनुभव होना अनिवार्य होगा।

इसके अतिरिक्त, संबंधित क्षेत्रीय पुलिस थाने के माध्यम से चालक की आपराधिक पृष्ठभूमि (Character & Police Verification) का पुख्ता सत्यापन कराना कंपनी का वैधानिक दायित्व होगा। किसी भी गंभीर आपराधिक मामले, दुर्व्यवहार या नशे में गाड़ी चलाने के दोषी व्यक्ति को कैब ड्राइवर के रूप में सूचीबद्ध करने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। कंपनी को अपने केंद्रीय सर्वर पर प्रत्येक चालक के वाहन फिटनेस, प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) और बैंक खाते का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा।

40 घंटे की अनिवार्य ट्रेनिंग: मोटर व्हीकल एक्ट से फर्स्ट-रिस्पॉन्डर कौशल तक

नई नियमावली का सबसे महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी पहलू चालकों के लिए निर्धारित किया गया 40 घंटे का इंडक्शन ट्रेनिंग प्रोग्राम है। किसी भी नए ड्राइवर को ऐप पर लाइव राइड्स स्वीकार करने से पूर्व यह प्रशिक्षण सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करना होगा, जिसे अधिकृत ड्राइविंग प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से ऑनलाइन और ऑफलाइन मॉड्यूल में आयोजित किया जाएगा।

इस 40 घंटे के पाठ्यक्रम में केवल नेविगेशन ऐप चलाने का ज्ञान नहीं दिया जाएगा, बल्कि मोटर वाहन अधिनियम के तकनीकी नियम, लेन अनुशासन, सुरक्षित गति सीमा, ईंधन दक्षता और आपातकालीन प्राथमिक चिकित्सा शामिल होगी। इसके तहत कम से कम 6 घंटे का विशेष ‘फर्स्ट-रिस्पॉन्डर’ प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि सड़क पर किसी भी दुर्घटना या यात्री की आकस्मिक स्वास्थ्य बिगड़ने की स्थिति में चालक जीवनरक्षक प्राथमिक उपचार उपलब्ध करा सके।

महिला व दिव्यांग यात्रियों के प्रति संवेदनशीलता और रिफ्रेशर ट्रेनिंग

प्रशिक्षण मॉड्यूल में मानवीय व्यवहार और सामाजिक संवेदनशीलता को विशेष स्थान दिया गया है। महिला यात्रियों की गरिमा, सुरक्षित संवाद और गोपनीयता की रक्षा के लिए जेंडर सेंसिटाइजेशन (Gender Sensitization) सत्र अनिवार्य किए गए हैं। इसके साथ ही, बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों के साथ विनम्र व्यवहार, व्हीलचेयर को बूट स्पेस में सुरक्षित रखने और उन्हें वाहन में चढ़ाने-उतारने के दौरान आवश्यक सहयोग करने के तौर-तरीके सिखाए जाएंगे।

सेवा की गुणवत्ता को निरंतर बनाए रखने के लिए रेटिंग प्रणाली को सीधे प्रशिक्षण से जोड़ दिया गया है। नियमावली के अनुसार, जिन चालकों की ग्राहक रेटिंग न्यूनतम 5 प्रतिशत के ब्रैकेट में आएगी, उन्हें हर तिमाही अनिवार्य रिफ्रेशर ट्रेनिंग से गुजरना होगा। यदि कोई चालक निर्धारित सुधारात्मक प्रशिक्षण पूरा करने में विफल रहता है, तो उसका ड्राइविंग खाता ऐप से तब तक ब्लॉक रहेगा जब तक वह आवश्यक प्रमाण पत्र हासिल नहीं कर लेता।

किराये में मनमानी पर लगाम: सर्ज प्राइसिंग अधिकतम 1.5 गुना तक सीमित

बारिश, त्योहारों या व्यस्ततम समय (Peak Hours) के दौरान यात्रियों से दोगुना या तीन गुना तक किराया वसूलने की प्रवृत्ति पर सरकार ने सख्त कानूनी सीमा तय कर दी है। नए प्रावधानों के तहत, बेस फेयर (आधार किराया) के ऊपर लागू होने वाली डायनेमिक प्राइसिंग (सर्ज फेयर) को अधिकतम 1.5 गुना (1.5x) तक सीमित कर दिया गया है।

इसका अर्थ यह है कि अत्यधिक मांग होने की स्थिति में भी कंपनियां निर्धारित मूल दर से डेढ़ गुना से अधिक किराया नहीं वसूल सकेंगी। बुकिंग की पुष्टि करते समय यात्री को किराए का विस्तृत ब्रेकअप स्क्रीन पर दिखाना अनिवार्य होगा, जिससे छुपे हुए शुल्कों से मुक्ति मिलेगी और यात्रियों को अनावश्यक वित्तीय शोषण से बचाया जा सकेगा।

ड्राइवर की कमाई का संरक्षण: 80% किराया मिलना तय

कंपनियों द्वारा चालकों से वसूले जाने वाले अत्यधिक कमीशन के विवाद को सुलझाते हुए सरकार ने राजस्व बंटवारे (Revenue Sharing) का स्पष्ट अनुपात तय किया है। यदि ड्राइवर स्वयं के वाहन का उपयोग कर रहा है, तो कुल यात्रा किराये का कम से कम 80 प्रतिशत हिस्सा सीधे ड्राइवर को मिलेगा, जबकि कंपनी अधिकतम 20 प्रतिशत तक ही सेवा शुल्क (कमीशन) ले सकती है।

वहीं उन परिस्थितियों में, जहां वाहन कंपनी या तीसरे पक्ष के बेड़े का है, चालक को किराये का न्यूनतम 60 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करना अनिवार्य होगा। इस विधिक संरक्षण से चालकों की आय में स्थिरता आएगी और ऐप कंपनियों द्वारा मनमाने ढंग से कमीशन दरें बढ़ाने के शोषण पर स्थायी विराम लगेगा।

यात्रियों व चालकों के लिए बीमा सुरक्षा और 24×7 इमरजेंसी कंट्रोल रूम

नई नीति में मानवीय जीवन की सुरक्षा हेतु व्यापक बीमा कवच का प्रावधान किया गया है। कैब में यात्रा करने वाले प्रत्येक यात्री के लिए न्यूनतम ₹5 लाख का यात्रा दुर्घटना बीमा कवर अनिवार्य किया गया है। वहीं कार्यशील चालकों के सामाजिक संरक्षण के लिए एग्रीगेटर को ₹5 लाख का स्वास्थ्य बीमा और ₹10 लाख का टर्म एक्सीडेंटल इंश्योरेंस कवर उपलब्ध कराना होगा।

तकनीकी मोर्चे पर, सभी पंजीकृत वाहनों में जीपीएस-आधारित ऑटोमेटेड व्हीकल ट्रैकिंग और लाइव लोकेशन शेयरिंग अनिवार्य रहेगी। ऐप के भीतर एक ‘इमरजेंसी एसओएस’ (SOS) बटन उपलब्ध होगा, जो सीधे राज्य पुलिस के आपातकालीन नंबर 112 और कंपनी के 24 घंटे सक्रिय रहने वाले सुरक्षा नियंत्रण कक्ष से जुड़ा रहेगा। किसी भी अप्रिय घटना या मार्ग भटकने की स्थिति में नियंत्रण कक्ष तत्काल वाहन की लोकेशन ट्रैक कर त्वरित पुलिस सहायता सुनिश्चित करेगा।

UP Ola Uber New Rules 2026: सुरक्षित, किफायती और पारदर्शी शहरी परिवहन की नई शुरुआत

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लागू की गई यह नई एग्रीगेटर नियमावली राज्य के शहरी परिवहन परिदृश्य को व्यवस्थित और अनुशासित करने की दिशा में एक युगांतरकारी कदम है। यह नीति जहां एक ओर दैनिक लाखों यात्रियों को सुरक्षित सफर, प्रमाणित चालकों की सेवा और नियंत्रित किराये की गारंटी देती है, वहीं दूसरी ओर चालकों को गरिमापूर्ण आजीविका, सामाजिक सुरक्षा और न्यायसंगत पारिश्रमिक सुनिश्चित करती है।

ओला, उबर जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए अब केवल तकनीकी मंच उपलब्ध कराकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ना संभव नहीं होगा। राज्य के परिवहन नियमों का शत-प्रतिशत पालन, चालकों का सतत प्रशिक्षण और उपभोक्ता अधिकारों का संरक्षण ही अब इस डिजिटल परिवहन व्यवस्था का मुख्य आधार होगा।

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