100% Natural Food: पैकेट पर लिखे दावों से न हों भ्रमित, FSSAI की गाइडलाइन के मुताबिक ऐसे पढ़ें लेबल
Ingredients, Nutrition Facts और Sugar-Sodium की मात्रा देखकर करें पैकेज्ड फूड का चुनाव
100% Natural Food: समकालीन दौर में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों, मोटापे और मधुमेह के बढ़ते मामलों के बीच आम उपभोक्ताओं में पौष्टिक और सुरक्षित खान-पान को लेकर अभूतपूर्व जागरूकता देखी जा रही है। सुपरमार्केट की शेल्व्स से लेकर त्वरित डिलीवरी वाले ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स तक ऐसे उत्पादों की बाढ़ आ चुकी है, जिनके पैकेजिंग बॉक्स पर ‘100% Natural’, ‘Pure’, ‘Healthy’, ‘Organic’, ‘Zero Sugar’ और ‘Immunity Booster’ जैसे लुभावने शब्द बोल्ड और बड़े अक्षरों में प्रदर्शित किए जाते हैं। इन चमकदार दावों को देखकर अधिकांश ग्राहक बिना सोचे-समझे यह मान लेते हैं कि संबंधित खाद्य सामग्री उनके और उनके परिवार के स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह सुरक्षित और गुणकारी है।
हालांकि, पैकेट के मुख्य भाग पर प्रदर्शित यह आकर्षक आवरण अक्सर उत्पाद की वास्तविक पोषण गुणवत्ता को छिपाने का एक चतुर मार्केटिंग माध्यम सिद्ध होता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों द्वारा किए जाने वाले ऐसे अवैज्ञानिक और अतिरंजित दावों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कड़ा विनियामक रुख अपनाया है। खाद्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि किसी उत्पाद के स्वास्थ्यवर्धक होने का प्रमाण उसका मार्केटिंग स्लोगन नहीं, बल्कि पैकेट के पीछे अंकित ‘सामग्री सूची’ (Ingredients), प्रति सर्विंग पोषण मान (Nutrition Value) और उसमें मौजूद प्रच्छन्न शर्करा व सोडियम का सटीक अनुपात होता है।
100% Natural Food: क्या हर प्राकृतिक वस्तु शरीर के लिए गुणकारी है?
उपभोक्ता मनोविज्ञान का लाभ उठाते हुए ब्रांड्स ‘नेचुरल’ शब्द का प्रयोग एक ढाल की तरह करते हैं। सामान्य ग्राहक के मन में यह धारणा स्थापित हो चुकी है कि जो वस्तु प्रकृति से सीधे आ रही है, वह हानिकारक नहीं हो सकती। किंतु खाद्य विज्ञान के दृष्टिकोण से ‘नेचुरल’ (Natural) और ‘हेल्दी’ (Healthy) दो पूर्णतः भिन्न अवधारणाएं हैं। उदाहरण के लिए, शुद्ध प्राकृतिक शहद, खजूर का अर्क, नारियल का तेल या समुद्री नमक पूरी तरह प्राकृतिक हैं, किंतु यदि इनका अनियंत्रित सेवन किया जाए तो यह शरीर में ग्लूकोज का स्तर और कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकते हैं।
FSSAI के खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विज्ञापन और दावे) विनियम के अनुसार ‘नेचुरल’, ‘फ्रेश’, ‘प्योर’, ‘ओरिजिनल’ और ‘ट्रेडिशनल’ जैसे शब्दों के अंधाधुंध उपयोग पर सख्त कानूनी प्रतिबंध हैं। विनियामक दिशा-निर्देशों में स्पष्ट कहा गया है कि किसी भी प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद को इस प्रकार विज्ञापित नहीं किया जा सकता जिससे उपभोक्ता को यह भ्रम हो कि अकेला वह उत्पाद उसे कोई जादुई स्वास्थ्य लाभ पहुंचा देगा। जब तक किसी खाद्य वस्तु में कोई कृत्रिम रंग, रासायनिक परिरक्षक (Preservatives) या एडिटिव्स पूरी तरह अनुपस्थित न हों और वह न्यूनतम प्रसंस्करण से न गुजरी हो, तब तक उसे ‘नेचुरल’ का प्रमाण पत्र नहीं दिया जा सकता।
FSSAI का एक्शन: 6 महीनों में 170 भ्रामक दावों पर विनियामक प्रहार
खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI ने देश भर में बेचे जा रहे डिब्बाबंद उत्पादों, हेल्थ सप्लीमेंट्स, ऑर्गेनिक स्नैक्स और एफएमसीजी उत्पादों की जांच के लिए विशेष निगरानी अभियान चलाया है। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, बीते छह महीनों की अल्पावधि में नियामक ने 170 से अधिक ऐसे उत्पादों और उनके विज्ञापनों को पकड़ा है, जिनमें बिना किसी ठोस वैज्ञानिक क्लीनिकल ट्रायल के बीमारियों को ठीक करने, ऊर्जा बढ़ाने या वजन घटाने के भ्रामक दावे किए गए थे।
प्राधिकरण ने संबंधित कंपनियों को कड़े नोटिस जारी करते हुए इन दावों को साबित करने वाले वैज्ञानिक शोध प्रस्तुत करने अथवा अपने पैकेजिंग और टीवी विज्ञापनों से इन दावों को तत्काल हटाने के निर्देश दिए हैं। नियामक ने स्पष्ट किया है कि भारत में किसी भी सामान्य खाद्य पदार्थ को दवा के रूप में प्रस्तुत करने या यह दावा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती कि वह किसी पुरानी बीमारी की रोकथाम अथवा उपचार कर सकता है। गैर-प्रमाणित दावों के जरिए आम जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वाले निर्माताओं के विरुद्ध लाइसेंस निरस्तीकरण और भारी जुर्माने की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
‘Zero Sugar’ और ‘Sugar Free’ का सच: प्रच्छन्न मिठास और छिपे कैलोरी ट्रैप
मोटापे और डायबिटीज के भय के कारण आज बाजार में ‘जीरो शुगर’ और ‘शुगर फ्री’ उत्पादों की मांग में तीव्र उछाल आया है। किंतु पैकेट पर ‘जीरो शुगर’ लिखा होने का यह कतई अर्थ नहीं है कि उत्पाद कैलोरी-मुक्त या स्वास्थ्य के अनुकूल है। कई मामलों में निर्माता सामान्य चीनी (सुक्रोज) को हटाकर उसके स्थान पर कृत्रिम मिठास (Artificial Sweeteners) जैसे एस्पार्टेम, सुक्रालोज या स्टीविया का प्रयोग करते हैं, अथवा माल्टोडेक्सट्रिन, हाई फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप और राइस सिरप जैसे जटिल कार्बोहाइड्रेट्स मिला देते हैं जो शरीर में जाकर अंततः शुगर का ही रूप ले लेते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के पोषण दिशानिर्देशों के अनुसार आहार में ‘फ्री शुगर’ (Free Sugars) की मात्रा कुल दैनिक ऊर्जा इनटेक के 5 से 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। फ्री शुगर में केवल चाय में डाली जाने वाली सफेद चीनी ही शामिल नहीं है, बल्कि डिब्बाबंद फलों के जूस, कॉन्संट्रेट्स, प्यूरी और औद्योगिक मिठास भी आती है। इसके अतिरिक्त, चीनी हटाने के बाद खाद्य पदार्थ के स्वाद और संरचना को बनाए रखने के लिए अक्सर उसमें अस्वास्थ्यकर संतृप्त वसा (Saturated Fat), रिफाइंड पाम ऑयल और सोडियम की मात्रा बढ़ा दी जाती है, जिससे उत्पाद और भी अधिक हानिकारक बन जाता है।
पैकेट के पीछे की सच्चाई: ‘Ingredients List’ को डिकोड करना क्यों है अनिवार्य
किसी भी पैकेज्ड फूड की वास्तविक गुणवत्ता का मूल्यांकन करने का एकमात्र विश्वसनीय माध्यम पैकेट के पिछले हिस्से पर अंकित सामग्री सूची (Ingredients List) है। भारतीय खाद्य कानून के अनुसार, निर्माता को सामग्री सूची में उन अवयवों को उनके वजन के घटते क्रम में सूचीबद्ध करना अनिवार्य होता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि सूची में जो घटक पहले, दूसरे या तीसरे स्थान पर लिखा है, पूरे उत्पाद में उसी की मात्रा सबसे अधिक है।
यदि किसी ‘हेल्दी मल्टीग्रेन बिस्कुट’ या ‘ओट्स कूकीज’ के पैकेट के पीछे सामग्री सूची में पहले स्थान पर ‘मैदा’ (Refined Wheat Flour) और दूसरे स्थान पर ‘पाम ऑयल’ अथवा ‘शुगर’ लिखा है, तो इसका स्पष्ट अर्थ है कि उसमें साबुत अनाज या ओट्स केवल नाममात्र के लिए डाले गए हैं। इसी प्रकार, ‘सर्विंग साइज’ (Serving Size) की अवधारणा को समझना भी अत्यंत आवश्यक है। कंपनियां अक्सर अपने न्यूट्रिशन टेबल में फैट और शुगर की मात्रा को बहुत कम दिखाने के लिए सर्विंग साइज को अस्वाभाविक रूप से छोटा (जैसे मात्र 15 ग्राम या 2 बिस्कुट) दर्शाती हैं, जबकि सामान्य उपभोक्ता एक बार में पूरा 100 ग्राम का पैकेट खा जाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का संतुलित आहार मॉडल: अति-प्रसंस्कृत भोजन से दूरी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एक आदर्श और दीर्घकालिक रूप से स्वस्थ आहार की नींव चार बुनियादी स्तंभों पर टिकी होती है: पर्याप्तता, संतुलन, संयम और विविधता। किसी भी व्यक्ति का स्वास्थ्य किसी एक चमत्कारी ‘हेल्दी पैकेट’ से नहीं सुधर सकता, बल्कि उसे अपने दैनिक भोजन में ताजे मौसमी फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत दालें, कंदमूल, मेवे और अपरिष्कृत अनाजों का समावेश करना पड़ता है।
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स (UPF)—चाहे उन पर ‘ऑर्गेनिक’ लिखा हो या ‘ग्लूटेन-फ्री’—औद्योगिक प्रक्रियाओं, इमल्सीफायर्स और कृत्रिम स्वादों से गुजरने के कारण अपनी प्राकृतिक कोशिकीय संरचना खो देते हैं। अत्यधिक सोडियम का निरंतर सेवन उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों को जन्म देता है, जबकि ट्रांस-फैट और संतृप्त वसा धमनियों में रुकावट पैदा करती है। यही कारण है कि वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियां अब प्रसंस्कृत पैकेज्ड विकल्पों के स्थान पर स्थानीय स्तर पर उत्पादित ताजे आहार को प्राथमिकता देने पर बल दे रही हैं।
ई-कॉमर्स और ऑनलाइन खरीदारी में उपभोक्ता बरतें अतिरिक्त सावधानी
डिजिटल युग में क्विक-कॉमर्स ऐप्स के बढ़ते प्रचलन ने खरीदारी को अत्यंत सुलभ तो बना दिया है, किंतु यहां उपभोक्ता सीधे उत्पाद को हाथ में लेकर उसका पिछला लेबल नहीं पढ़ पाता। ऐप्स पर केवल उत्पाद की सुंदर फ्रंट-इमेज और विज्ञापनी टैगलाइन दिखाई देती है। ऑनलाइन खाद्य सामग्री या सप्लीमेंट्स खरीदते समय ग्राहकों को ऐप के विवरण पृष्ठ पर जाकर ‘Ingredients’ और ‘Nutritional Facts’ वाले कॉलम को खोलकर ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए।
उपभोक्ताओं को एक्सपायरी डेट, शेल्फ-लाइफ, एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर और निर्माता के पते की पुष्टि करनी चाहिए। यदि किसी उत्पाद पर ‘100% बीमारी मुक्ति’, ’30 दिन में 10 किलो वजन घटाएं’ या ‘तत्काल इम्यूनिटी’ जैसे चमत्कारिक दावे दिखाई दें, तो ऐसे संदेहास्पद उत्पादों से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए और नियामक की वेबसाइट पर इसकी शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
100% Natural Food: सजगता ही है भ्रामक मार्केटिंग का एकमात्र स्थायी तोड़
खाद्य उद्योग में पैकेजिंग और विज्ञापनों का मुख्य ध्येय उत्पाद की बिक्री बढ़ाना है, न कि उपभोक्ता का स्वास्थ्य संवारना। FSSAI द्वारा भ्रामक दावों पर की जा रही विनियामक सख्ती एक स्वागत योग्य कदम है, किंतु अंतिम सुरक्षा उपभोक्ता के अपने विवेक और जागरूकता पर ही निर्भर करती है। ‘100% Natural’ या ‘Pure’ जैसे शब्द केवल एक विपणन भाषा हो सकते हैं, जो अक्सर अस्वास्थ्यकर अवयवों पर पर्दा डालने का काम करते हैं।
अगली बार जब आप किसी सुपरमार्केट में जाएं या ऑनलाइन ग्रोसरी ऑर्डर करें, तो पैकेट के फ्रंट कवर के दावों से मुग्ध होने के बजाय पैकेट को पलटें और उसकी सामग्री सूची, चीनी, नमक व वसा की मात्रा का निष्पक्ष विश्लेषण करें। वास्तविक स्वास्थ्य बाजार के डिब्बों में बंद ‘हेल्दी’ टैग्स में नहीं, बल्कि प्राकृतिक, असंसाधित और संतुलित आहार की थाली में ही निहित है।
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