Mandla Ganesh Pandal Accident: गणेश विसर्जन के बाद पंडाल में फैला करंट, 4 लोगों की मौत; 3 घायल
हीरापुर में विसर्जन के बाद मंच पर सो रहे लोगों को लगा करंट, तीन घायल
Mandla Ganesh Pandal Accident: मध्य प्रदेश के मंडला जिले से गणेश उत्सव के उल्लास के बीच एक अत्यंत हृदयविदारक और झकझोर देने वाली दुर्घटना सामने आई है। जिले के नैनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम हीरापुर में भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा के विसर्जन के उपरांत पंडाल के मंच पर विश्राम कर रहे ग्रामीण अचानक फैले घातक करंट की चपेट में आ गए। मध्य रात्रि अथवा तड़के घटित इस अप्रत्याशित हादसे में कई जिंदगियां काल के गाल में समा गईं और कई अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए। धार्मिक उत्सव के समापन के बाद जहां पूरे गांव में आनंद का वातावरण था, वहीं इस त्रासदी की सूचना मिलते ही सन्नाटा और चीख-पुकार मच गई।
घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंच पर सो रहे लोगों को संभलने या भागने का लेशमात्र भी अवसर नहीं मिला। स्थानीय स्तर पर सामने आई शुरुआती सूचनाओं में हताहतों की संख्या को लेकर अलग-अलग विवरण प्राप्त हो रहे हैं, जिसके अनुसार तीन से चार ग्रामीणों की अकाल मृत्यु होने और दो से तीन लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की बात कही गई है। पुलिस और प्रशासनिक अमले ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया और घायलों को अविलंब चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
Mandla Ganesh Pandal Accident: नैनपुर के हीरापुर गांव में पसरा मातम
हीरापुर गांव में गणेश उत्सव को लेकर पिछले कई दिनों से भारी उत्साह देखा जा रहा था। गांव के सार्वजनिक स्थल पर भव्य पंडाल का निर्माण कर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई थी और पूरे पंडाल को आकर्षक लाइटों व विद्युत झालरों से सुसज्जित किया गया था। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ग्रामीणों और युवा समिति के सदस्यों ने भक्तिभाव के साथ प्रतिमा का विसर्जन जल स्रोत में संपन्न कराया।
विसर्जन के लंबे और श्रमसाध्य कार्यक्रम के पश्चात आयोजन से जुड़े कुछ प्रमुख सदस्य और ग्रामीण अत्यधिक थक जाने के कारण अपने-अपने घरों को लौटने के बजाय पंडाल में बने मुख्य लकड़ी और लोहे के मंच पर ही चादर बिछाकर सो गए। किसी को इस बात की तनिक भी आशंका नहीं थी कि जिस मंच पर वे विश्राम कर रहे हैं, वही कुछ ही पलों में मौत का जाल बन जाएगा। जब अधिकांश लोग गहरी नींद में थे, तभी मंच के किसी हिस्से से अचानक तेज विद्युत प्रवाह दौड़ गया और सो रहे लोग सीधे उसकी चपेट में आ गए।
हताहतों के आंकड़ों को लेकर संशय: प्रशासनिक पुष्टि की प्रतीक्षा
हादसे के उपरांत प्रकाशित शुरुआती सूचनाओं में हताहतों की संख्या को लेकर आंशिक भिन्नता देखने को मिल रही है। कुछ प्रारंभिक विवरणों में चार लोगों के दम तोड़ने और दो के गंभीर होने का उल्लेख किया गया है, वहीं प्राथमिक फील्ड रिपोर्टों में तीन व्यक्तियों की मृत्यु और तीन अन्य के झुलसने की पुष्टि की जा रही है।
अचानक घटित आपदाओं और रात्रि के हादसों में अक्सर सूचनाओं के आदान-प्रदान के दौरान आंकड़ों में ऐसा अंतर आ जाता है। स्थानीय नैनपुर थाना पुलिस और जिला प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि वे अस्पताल में भर्ती घायलों की स्थिति और पंचनामा कार्रवाई पूरी होने के बाद ही अंतिम और अधिकृत आंकड़े सार्वजनिक करेंगे। फिलहाल मौके पर मौजूद ग्रामीणों की सर्वोच्च प्राथमिकता झुलसे हुए लोगों को जीवनदान दिलाने की बनी हुई है।
अस्थायी वायरिंग और लोहे के पाइप: कैसे फैला मौत का करंट?
यद्यपि विद्युत विभाग और पुलिस की तकनीकी जांच दल द्वारा घटनास्थल का मुआयना किए जाने के बाद ही करंट फैलने के सटीक कारणों का आधिकारिक खुलासा हो सकेगा, किंतु प्राथमिक दृष्टि से यह मामला अस्थायी विद्युत संयोजन में हुई चूक का प्रतीत होता है। सार्वजनिक पंडालों में बड़े पैमाने पर हैलोजन लाइट्स, साउंड सिस्टम और सजावटी लड़ियों का उपयोग किया जाता है, जिनके लिए अक्सर खुले और जोड़ लगे तारों (Joint Wires) का सहारा लिया जाता है।
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पंडाल के मंच निर्माण में प्रयुक्त लोहे के एंगल या पाइप संभवतः किसी कटे-फटे जीवित तार (Live Wire) के सीधे संपर्क में आ गए। इसके अतिरिक्त रात्रि के समय वातावरण में बढ़ी नमी अथवा ओस के कारण भी विद्युत प्रवाह लोहे के ढांचे से होते हुए पूरे मंच की सतह तक पहुंच गया होगा। नींद में होने के कारण मंच पर लेटे व्यक्तियों को करंट का झटका तुरंत समझ नहीं आया और जब तक किसी को भनक लगी, तब तक कई लोगों के शरीर शिथिल पड़ चुके थे।
चीख-पुकार सुनकर दौड़े ग्रामीण: घायलों को पहुंचाया गया अस्पताल
मंच पर छटपटाहट और झुलसने की बदबू फैलते ही पास मौजूद अन्य ग्रामीणों ने शोर मचाया। गांव के युवाओं ने तुरंत साहस का परिचय देते हुए मुख्य विद्युत आपूर्ति को बंद किया और डंडों की सहायता से करंट की चपेट में आए लोगों को अलग किया। इसके बाद बिना समय गंवाए निजी वाहनों और एंबुलेंस की मदद से सभी पीड़ितों को निकटतम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल पहुंचाया गया।
अस्पताल में भर्ती कराए गए घायलों में से कुछ की स्थिति अत्यंत नाजुक बताई जा रही है, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर चिकित्सा के लिए उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थान रेफर किए जाने की तैयारी की जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही मृतकों और घायलों के स्वजन अस्पताल परिसर में एकत्र हो गए, जहां परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
सार्वजनिक उत्सवों में विद्युत सुरक्षा की अनदेखी पर उठे गंभीर सवाल
मंडला की इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने एक बार फिर देश भर में आयोजित होने वाले धार्मिक व सामाजिक उत्सवों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर कर दिया है। गणेशोत्सव, दुर्गा पूजा अथवा रामलीला जैसे बड़े आयोजनों में अक्सर बिना किसी योग्य विद्युत निरीक्षक या प्रमाणित इलेक्ट्रीशियन के ही भारी-भरकम विद्युत लोड वाले कनेक्शन जोड़ दिए जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे सार्वजनिक पंडालों में अर्थ लीकेज सर्किट ब्रेकर (ELCB) अथवा रेजिड्यूअल करंट सर्किट ब्रेकर (RCCB) का उपयोग अनिवार्य होना चाहिए, ताकि किसी भी तार से करंट लीक होते ही पूरी बिजली आपूर्ति स्वतः कट जाए। इसके साथ ही आयोजन समाप्ति के तुरंत बाद मुख्य स्विच से पावर कट न करना और बिजली का सामान हटाए बिना उसी संवेदनशील क्षेत्र में लोगों का सोना भी एक घातक असावधानी साबित हुआ।
Mandla Ganesh Pandal Accident: गहन जांच और सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन जरूरी
हीरापुर गांव में हुआ यह हादसा केवल एक संयोग नहीं बल्कि सुरक्षा उपायों में बरती गई किसी गंभीर तकनीकी लापरवाही का त्रासद परिणाम है। जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नैनपुर थाना पुलिस और विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों को पूरे मामले की संयुक्त जांच के निर्देश दिए हैं। जांच पूरी होने पर ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह हादसा तार के कटने से हुआ या ट्रांसफार्मर और सर्विस लाइन में आए अचानक वोल्टेज उतार-चढ़ाव के कारण।
यह आवश्यक है कि प्रशासन मृतकों के आश्रितों को तत्काल उचित आर्थिक मुआवजा उपलब्ध कराए और घायलों के समुचित एवं निःशुल्क उपचार की पुख्ता व्यवस्था करे। इसके साथ ही आगामी शारदीय नवरात्रि और अन्य पर्वों को देखते हुए सभी पंडाल आयोजकों के लिए अनिवार्य विद्युत सुरक्षा अनापत्ति और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से ऑडिट सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि भक्ति और उल्लास के अवसर ऐसे हृदयविदारक मातम में परिवर्तित न हों।
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