Ghaziabad Fraud Case: 175 कारोबारियों से ₹26 करोड़ की ठगी, लग्जरी ट्रांसपोर्ट और क्रिप्टो निवेश के नाम पर धोखाधड़ी
175 कारोबारियों से निवेश के नाम पर रकम लेने का आरोप, कोर्ट के आदेश पर 6 पर FIR
Ghaziabad Fraud Case: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में वित्तीय धोखाधड़ी का एक बड़ा और सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है, जहां लग्जरी ट्रांसपोर्ट कारोबार में निवेश के नाम पर मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर लगभग 175 छोटे-बड़े व्यापारियों व निवेशकों से करीब ₹26 करोड़ हड़प लिए गए। शातिर जालसाजों ने पहले पीड़ितों को लग्जरी कैब और फ्लीट ट्रांसपोर्ट में सुरक्षित निवेश का झांसा दिया और बाद में अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टोकरेंसी, फॉरेक्स ट्रेडिंग तथा आधुनिक डिजिटल संपत्तियों में निवेश के नाम पर भी उनसे मोटी रकम ऐंठ ली। निवेशकों का विश्वास जीतने के लिए बाकायदा एक मोबाइल एप्लिकेशन और वेब पोर्टल बनाया गया था, जिस पर फर्जी रिटर्न का बढ़ता हुआ ग्राफ प्रदर्शित किया जाता रहा।
धोखाधड़ी का यह तंत्र तब ध्वस्त हुआ जब मई 2025 में अचानक संबंधित कंपनी की वेबसाइट और मोबाइल ऐप बंद हो गए और निवेशकों का सारा डिजिटल डेटा सर्वर से मिटा दिया गया। जब निवेशकों ने अपनी गाढ़ी कमाई की मूल रकम वापस मांगी, तो उन्हें धमकियों और बंधक बनाए जाने की प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। स्थानीय पुलिस स्तर पर कोई सुनवाई न होने के बाद मुख्य पीड़ित ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय के सख्त आदेश के उपरांत गाजियाबाद के सिहानी गेट थाने में छह मुख्य नामजद आरोपियों और उनके अज्ञात दलालों के विरुद्ध धोखाधड़ी, साजिश व जान से मारने की धमकी से जुड़ी विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
Ghaziabad Fraud Case: मोहाली की ‘ब्लूम ड्राइव’ कंपनी का बुना जाल
इस संगठित ठगी का शिकार बने उत्तराखंड के ऋषिकेश निवासी 55 वर्षीय प्रॉपर्टी डीलर दिनेश कुमार शर्मा ने अदालत में दायर अपनी याचिका में पूरे घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा दिया है। शिकायत के अनुसार, मार्च 2020 में उनकी मुलाकात हरियाणा के कुरुक्षेत्र निवासी देव बांगड़ नामक व्यक्ति से हुई थी। देव बांगड़ ने खुद को पंजाब के मोहाली स्थित ‘ब्लूम ड्राइव’ नामक ट्रांसपोर्ट कंपनी से जुड़ा हुआ बताते हुए दावा किया कि उनकी कंपनी दिल्ली-एनसीआर और पंजाब के उच्च वर्गीय कॉरपोरेट क्लाइंट्स को लग्जरी वाहन सेवाएं उपलब्ध कराती है।
पीड़ित को बताया गया कि यदि वे कंपनी के इस फ्लीट विस्तार में निवेश करते हैं, तो उन्हें बिना किसी जोखिम के प्रति माह एक तय और आकर्षक लाभांश दिया जाएगा। विश्वास में लेकर आरोपियों ने फरवरी 2021 में दिनेश कुमार शर्मा को गाजियाबाद बुलाया। यहां सिहानी गेट थाना क्षेत्र में एक मीटिंग के दौरान उनसे प्रारंभिक निवेश के रूप में ₹3 लाख नकद ले लिए गए। इसके पश्चात कंपनी ने उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक यूजर आईडी और पासवर्ड आवंटित कर दिया, जहां उनका निवेश और उस पर मिलने वाला काल्पनिक रिटर्न दिखने लगा।
डिजिटल ऐप पर दिखता रहा फर्जी मुनाफा: क्रिप्टो और फॉरेक्स के नाम पर फंसाए 175 लोग
दिनेश कुमार शर्मा के माध्यम से जालसाजों ने अपने नेटवर्क का विस्तार करना शुरू किया और उनके व्यावसायिक संपर्कों के अन्य 175 कारोबारियों को भी इस मकड़जाल में फंसा लिया। निवेशकों को अधिक मुनाफा कमाने का लालच देकर आरोपियों ने योजना का दायरा बढ़ा दिया। ट्रांसपोर्ट कारोबार के साथ-साथ अब विदेशी मुद्रा बाजार (Forex), अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टोकरेंसी और आभासी डिजिटल संपत्तियों (Digital Assets) में ट्रेडिंग के नाम पर भी करोड़ों रुपये ट्रांसफर कराए गए।
जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, आरोपियों का यह पूरा सिंडिकेट एक पोंजी स्कीम की तर्ज पर काम कर रहा था। ऐप पर निवेशकों को यह दिखाया जाता था कि उनका पैसा हर महीने भारी वृद्धि कर रहा है। शुरुआती कुछ महीनों तक कुछ निवेशकों को भरोसा बनाए रखने के लिए मामूली पे-आउट भी दिए गए, जिससे प्रेरित होकर लोगों ने अपने रिश्तेदारों, मित्रों और व्यापारिक साझेदारों की गाढ़ी कमाई भी इस फर्जी योजना में झोंक दी। इस प्रकार 175 से अधिक लोगों से कुल मिलाकर लगभग ₹26 करोड़ की भारी-भरकम राशि एकत्र कर ली गई।
मई 2025 में बंद हुआ पोर्टल: डेटा डिलीट कर फरार हुए जालसाज
निवेशकों के पैरों तले जमीन तब खिसक गई जब मई 2025 के बाद कंपनी का मोबाइल एप्लिकेशन चलना बंद हो गया और वेबसाइट पर ‘सर्वर एरर’ दिखने लगा। निवेशकों ने जब अपने स्तर पर पड़ताल की तो पता चला कि उनके खातों का सारा वित्तीय रिकॉर्ड और व्यक्तिगत डेटा क्लाउड सर्वर से पूरी तरह डिलीट कर दिया गया है। कंपनी के कस्टमर सपोर्ट नंबर बंद हो गए और मोहाली स्थित बताए गए कार्यालय पर ताला लटका मिला।
अचानक पोर्टल बंद होने से घबराए निवेशकों ने जब कंपनी के प्रमुख कर्ता-धर्ताओं से संपर्क करने का प्रयास किया, तो वे टालमटोल करने लगे। कुछ दिनों तक तकनीकी खराबी का बहाना बनाया गया, किंतु जब निवेशकों ने अपनी मूल पूंजी की तत्काल वापसी की मांग तेज की, तो आरोपियों ने अपने वास्तविक तेवर दिखाने शुरू कर दिए और फोन उठाना पूरी तरह बंद कर दिया।
गाजियाबाद बस अड्डे पर बंधक बनाकर दी धमकी: पुलिस की निष्क्रियता पर कोर्ट की शरण
शिकायतकर्ता दिनेश कुमार शर्मा के अनुसार, लगातार तगादा करने पर आरोपियों ने उन्हें समझौते और हिसाब-किताब फाइनल करने के बहाने 18 अगस्त को गाजियाबाद के पुराने बस अड्डे के पास बुलाया। जब वे वहां पहुंचे, तो आरोपियों ने उन्हें जबरन एक लग्जरी कार में खींच लिया। आरोप है कि चलती गाड़ी में उन्हें बंधक बनाकर बुरी तरह पीटा गया, हथियार दिखाकर धमकाया गया और स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि यदि दोबारा पैसे मांगे या पुलिस के पास जाने की कोशिश की, तो उन्हें और उनके परिवार को जान से हाथ धोना पड़ेगा।
इस जानलेवा अनुभव के बाद पीड़ित दिनेश कुमार शर्मा 19 अगस्त को न्याय की गुहार लेकर सिहानी गेट थाने पहुंचे, किंतु वहां उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 24 अगस्त को उन्होंने गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नर को रजिस्टर्ड डाक व व्यक्तिगत रूप से प्रार्थना पत्र भेजा। बावजूद इसके जब स्थानीय पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में हीलाहवाली दिखाई, तो पीड़ित ने थक-हारकर अदालत का दरवाजा खटखटाया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने मामले की गंभीरता और वित्तीय धोखाधड़ी के विशाल आकार को देखते हुए पुलिस को तत्काल प्रभाव से मुकदमा दर्ज कर विवेचना का आदेश दिया।
6 नामजद और अज्ञात एजेंटों पर एफआईआर: पुलिस ने शुरू की वित्तीय जांच
अदालत के आदेश का अनुपालन करते हुए सिहानी गेट थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। दर्ज मुकदमे में छह मुख्य आरोपियों को नामजद किया गया है, जिनमें सतीश कुमार उर्फ सतीश मोस्ट्रा (निवासी कैथल, हरियाणा), हैप्पी शेख (निवासी सोलन, हिमाचल प्रदेश), रोषविंदर सिंह उर्फ रविंद्र बांगड़ (निवासी कुरुक्षेत्र, हरियाणा), देव बांगड़ (निवासी कुरुक्षेत्र, हरियाणा), धर्म सिंह रंधावा और नजीब शामिल हैं। इनके अलावा योजना का प्रचार-प्रसार करने वाले विभिन्न अज्ञात दलालों को भी विवेचना के दायरे में लाया गया है।
नंदग्राम सर्कल के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) जियाउद्दीन अहमद ने पुष्टि करते हुए बताया कि कोर्ट के निर्देश पर मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। पुलिस की एक विशेष साइबर और क्राइम टीम गठित की गई है जो आरोपियों के बैंक खातों, शेल कंपनियों और यूपीआई लेनदेन की फोरेंसिक जांच कर रही है। आरोपियों द्वारा उपयोग किए गए बैंक खातों को फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और उनकी लोकेशन ट्रेस कर गिरफ्तारी के लिए टीमें हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश रवाना की जा रही हैं।
Ghaziabad Fraud Case: हाई-रिटर्न पोंजी योजनाओं से रहें सावधान
गाजियाबाद का यह ₹26 करोड़ का ट्रांसपोर्ट व क्रिप्टो घोटाला एक बार फिर यह साबित करता है कि अत्यधिक और अवास्तविक रिटर्न का लालच देने वाली अनियंत्रित वित्तीय योजनाएं किस तरह आम जनता की जीवन भर की जमा-पूंजी को निगल जाती हैं। किसी भी ट्रांसपोर्ट फ्लीट, विदेशी मुद्रा या डिजिटल करेंसी में निवेश करने से पूर्व भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अथवा सेबी (SEBI) से उस संस्था के पंजीकरण की पुष्टि करना अनिवार्य है।
पीड़ित व्यापारियों का कहना है कि वे इस कानूनी लड़ाई को आरोपियों की गिरफ्तारी और अपनी डूबी हुई रकम की रिकवरी तक जारी रखेंगे। पुलिस प्रशासन ने भी आश्वासन दिया है कि संगठित वित्तीय अपराध करने वाले इस अंतरराज्यीय गिरोह की संपत्तियों को कुर्क कर पीड़ितों को न्याय दिलाने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
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