Monsoon Session 2026: पहले सप्ताह में लोकसभा की उत्पादकता 5% और राज्यसभा की 6% रही, गतिरोध के बीच सीमित रहा संसदीय कामकाज

पीआरएस के आंकड़ों के अनुसार पहले सप्ताह में हंगामे के कारण दोनों सदनों का कामकाज प्रभावित रहा

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Monsoon Session 2026: संसद का मानसून सत्र 2026 शुरू होने के बाद पहले सप्ताह में दोनों सदनों की उत्पादकता बेहद कम रही। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार लोकसभा में निर्धारित समय का केवल पांच प्रतिशत ही कामकाज हो सका, जबकि राज्यसभा में यह आंकड़ा छह प्रतिशत पर सिमट गया। नीट पेपर लीक मामले को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध के कारण पूरा सप्ताह हंगामे और स्थगन की भेंट चढ़ गया। विधायी कार्य लगभग ठप पड़ा रहा और सिर्फ दो विधेयक ही पेश किए जा सके।

पहले सप्ताह की उत्पादकता का ब्योरा

मानसून सत्र के पहले हफ्ते में लोकसभा में कुल 1.6 घंटे ही कामकाज हो पाया, जो निर्धारित समय का मात्र पांच प्रतिशत है। राज्यसभा में स्थिति थोड़ी बेहतर रही जहां 1.7 घंटे काम हुआ जो छह प्रतिशत बैठता है। संसदीय कामकाज की निगरानी करने वाली संस्था पीआरएस लेजिस्लेटिव ने इन आंकड़ों को सार्वजनिक किया है।

दोनों सदनों में बार-बार हंगामा होने से प्रश्नकाल, शून्यकाल और अन्य नियमित कार्य प्रभावित हुए। विपक्ष नीट परीक्षा में हुई अनियमितताओं पर चर्चा की मांग पर अड़ा रहा जबकि सरकार अन्य मुद्दों पर आगे बढ़ना चाहती थी। परिणामस्वरूप सप्ताह भर सदन बार-बार स्थगित होते रहे।

नीट पेपर लीक विवाद ने बिगाड़ा माहौल

नीट यूजी परीक्षा में पेपर लीक की घटनाओं ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया था। विपक्षी दल इस मुद्दे को सदन में जोर-शोर से उठाना चाहते थे। वे शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे और पूरे प्रकरण पर विस्तृत चर्चा चाहते थे।

सत्ता पक्ष का कहना था कि सरकार पहले ही कई कदम उठा चुकी है और जांच एजेंसियां सक्रिय हैं। दोनों पक्षों के बीच समझौता न होने से पूरा सप्ताह गतिरोध का शिकार रहा। हंगामे के कारण न तो महत्वपूर्ण बिलों पर चर्चा हो सकी और न ही अन्य राष्ट्रीय मुद्दों पर बहस हो पाई।

सत्र में पेश हुए दो विधेयक और आगे की रणनीति

पहले सप्ताह में सिर्फ दो विधेयक संसद में पेश किए जा सके। लोकसभा में ‘सुप्रीम कोर्ट नंबर ऑफ जजेस अमेंडमेंट बिल 2026’ पेश किया गया। राज्यसभा में ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संबंधी संशोधन विधेयक’ पेश हुआ। ये दोनों बिल पेश तो हुए लेकिन उन पर विस्तृत चर्चा या आगे की प्रक्रिया इस सप्ताह संभव नहीं हो सकी।

अब सरकार की ओर से आने वाले दिनों के लिए महत्वपूर्ण विधेयकों को लोकसभा के एजेंडे में शामिल किया गया है, जिनमें ‘पब्लिक एग्जामिनेशंस प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स अमेंडमेंट बिल 2026’ विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संसदीय उत्पादकता का महत्व और आगे की राह

संसद देश की सर्वोच्च विधायी संस्था है और इसकी उत्पादकता कम होने से कानून निर्माण की प्रक्रिया प्रभावित होती है। पीआरएस जैसे संगठनों के आंकड़े संसद की कार्यशैली पर ध्यान केंद्रित करते हैं, क्योंकि जनता की अपेक्षा होती है कि उनके प्रतिनिधि देश के मुद्दों पर चर्चा करें और समाधान निकालें।

मानसून सत्र 13 अगस्त तक चलने वाला है और कई महत्वपूर्ण बिल लंबित हैं। पहले सप्ताह की कम उत्पादकता से सबक लेते हुए दोनों पक्षों को रचनात्मक रुख अपनाना होगा ताकि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक बहस हो सके।

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