Nandan Nilekani: नंदन नीलेकणि की अगुवाई में बनेगी परीक्षा सुधार टास्क फोर्स, लीक प्रूफ सिस्टम बनाने पर फोकस
पीएम मोदी ने तकनीक आधारित, पारदर्शी और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली के लिए टास्क फोर्स की घोषणा की
Nandan Nilekani: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि परीक्षाओं को विश्वसनीय, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। यह कदम उन छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत भरा साबित हो सकता है जो पिछले कुछ समय से पेपर लीक की घटनाओं से परेशान हैं। नीलेकणि वह शख्सियत हैं जिन्होंने विशाल डिजिटल पहचान व्यवस्था को आकार दिया था। अब उन्हें देश की परीक्षा प्रणाली को लीक प्रूफ बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नंदन नीलेकणि कौन हैं और उनकी उपलब्धियां
नंदन नीलेकणि इंफोसिस के सह-संस्थापक हैं। उन्होंने 1981 में नारायण मूर्ति और अन्य साथियों के साथ मिलकर इंफोसिस की नींव रखी थी। साल 2002 से 2007 तक वे कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रहे। वर्तमान में वे इंफोसिस के नॉन-एक्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में कार्यरत हैं। उनकी सबसे बड़ी पहचान बड़े पैमाने के डिजिटल प्रोजेक्ट्स से जुड़ी है। जुलाई 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अनुरोध पर उन्होंने इंफोसिस छोड़कर यूआईडीएआई (UIDAI) के चेयरमैन का पद संभाला। उनके नेतृत्व में देश का सबसे बड़ा बायोमेट्रिक पहचान तंत्र तैयार और लागू किया गया।
नीलेकणि को डिजिटल भुगतान व्यवस्था यूपीआई (UPI) के आर्किटेक्ट के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने डिजिटल पेमेंट फ्रेमवर्क तैयार करने वाली समितियों में अहम भूमिका निभाई। फोर्ब्स के अनुसार उनकी संपत्ति करीब 2.4 अरब डॉलर आंकी गई है। वे शिक्षा क्षेत्र में भी सक्रिय रहे हैं और आईआईटी बॉम्बे को बड़ी राशि दान कर चुके हैं। उनका जन्म 2 जून 1955 को बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।
प्रधानमंत्री मोदी का बयान और टास्क फोर्स का उद्देश्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कहा कि अब भविष्य के बारे में सोचने की जरूरत है। परीक्षाओं को विश्वसनीय बनाना है, पारदर्शी बनाना है और अधिकतम तकनीक का इस्तेमाल करना है। इसी उद्देश्य से नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में हाई पावर्ड टास्क फोर्स बनाने का फैसला लिया गया है।
यह टास्क फोर्स परीक्षा सुधारों पर विशेष ध्यान केंद्रित करेगी। मुख्य जोर लीक प्रूफ परीक्षा प्रणाली विकसित करने पर रहेगा। इसमें तकनीक का व्यापक उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा ताकि प्रश्न पत्र लीक होने की घटनाएं दोबारा न हों। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने छात्रों का विश्वास डगमगा दिया था। नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं के बाद तकनीकी विशेषज्ञता वाले व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपना सरकार की प्राथमिकता साफ दिखाता है।
परीक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत और नीलेकणि का अनुभव
पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय स्तर की कई परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं से राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) पर सवाल उठे। नीलेकणि की टास्क फोर्स से उम्मीद की जा रही है कि वह परीक्षा प्रक्रिया के हर चरण में सुरक्षा बढ़ाएगी। प्रश्न पत्र तैयार करने से लेकर केंद्रों तक पहुंचाने और परीक्षा संचालित करने तक की पूरी श्रृंखला को तकनीक के सहारे मजबूत बनाने पर काम होगा। साइबर सुरक्षा, बायोमेट्रिक सत्यापन और डिजिटल ट्रैकिंग जैसे उपायों पर जोर दिया जा सकता है।
राष्ट्रीय स्तर की परियोजनाओं के दौरान नीलेकणि ने करोड़ों लोगों का डेटा सुरक्षित रखने और इंफोसिस जैसी कंपनी को वैश्विक स्तर पर खड़ा करने का अनुभव हासिल किया है। यूपीआई जैसी व्यवस्था बनाने में भी उनकी भूमिका रही जो आज करोड़ों लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुकी है।
Nandan Nilekani: राजनीतिक पृष्ठभूमि, प्रभाव और आगे की राह
नीलेकणि ने 2014 में कांग्रेस के टिकट पर बेंगलुरु साउथ से लोकसभा चुनाव लड़ा था, जहां वे अनंत कुमार से हार गए थे। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली। अब वे फिर से राष्ट्रीय महत्व के काम में जुड़ रहे हैं, लेकिन इस बार विशेषज्ञ की भूमिका में।
अगर टास्क फोर्स अपनी सिफारिशों (Nandan Nilekani) को प्रभावी तरीके से लागू करवा पाई तो लाखों छात्रों को राहत मिलेगी और परीक्षाओं में धांधली की आशंका कम होगी। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के अभाव जैसी चुनौतियां रहेंगी, लेकिन नीलेकणि जैसे व्यक्ति के नेतृत्व में काम शुरू होना एक सकारात्मक संकेत है।
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