Maharashtra Government Employees: महाराष्ट्र में सरकारी कर्मचारियों की हिंदी परीक्षा खत्म, वेतन वृद्धि रोकने वाला नियम भी रद्द
नए शासनादेश से हिंदी परीक्षा की अनिवार्यता खत्म, पुराने नियम और सर्कुलर भी निरस्त
Maharashtra Government Employees: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए दशकों से चली आ रही अनिवार्य हिंदी भाषा परीक्षा को आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया है। मराठी भाषा विभाग द्वारा जारी नए शासनादेश (GR) के अनुसार, अब राज्य सरकार के किसी भी संवर्ग के कर्मचारी को सेवा में बने रहने या पदोन्नति के लिए हिंदी भाषा परीक्षा उत्तीर्ण करने की बाध्यता नहीं होगी।
इस ऐतिहासिक नीतिगत निर्णय के साथ ही सरकार ने परीक्षा की अनिवार्यता से जुड़े वर्ष 1976 और उसके बाद के सभी पुराने सरकारी आदेशों, परिपत्रकों और संबंधित नियमों को तत्काल प्रभाव से निरस्त व अमान्य घोषित कर दिया है।
Maharashtra Government Employees: क्यों लागू था यह नियम और कर्मचारियों पर क्या था असर?
महाराष्ट्र राज्य के गठन से पूर्व तत्कालीन द्विभाषी प्रशासनिक व्यवस्था के दौरान सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रचलन को देखते हुए कर्मचारियों के लिए हिंदी भाषा परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया था। इस पुराने नियम के तहत जिन कर्मचारियों ने कक्षा 10वीं तक हिंदी विषय का अध्ययन नहीं किया था, उन्हें सेवा में नियुक्ति की तिथि से तीन वर्ष के भीतर राज्य भाषा निदेशालय द्वारा आयोजित हिंदी परीक्षा पास करनी होती थी।
यदि कोई कर्मचारी निर्धारित समयावधि में यह परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाता था, तो उसकी वार्षिक वेतन वृद्धि (Increment) रोक दी जाती थी और पदोन्नति की प्रक्रिया पर भी प्रतिकूल असर पड़ता था। ग्रामीण और सुदूर तटीय क्षेत्रों से आने वाले कर्मचारियों के लिए यह व्यवस्था लंबे समय से मानसिक तनाव और प्रशासनिक अड़चनों का कारण बनी हुई थी।
परीक्षा रद्द करने के पीछे सरकार का तार्किक आधार
मराठी भाषा विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि महाराष्ट्र राजभाषा अधिनियम के तहत राज्य के संपूर्ण प्रशासनिक, न्यायिक और नीतिगत कामकाज की प्राथमिक भाषा मराठी है। राज्य सरकार के दैनिक प्रशासनिक पत्राचार और संचिकाओं में हिंदी भाषा का उपयोग न के बराबर होता है।
इसके साथ ही, केंद्र सरकार, अन्य राज्य सरकारों अथवा अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ होने वाले सभी अंतर-राज्यीय पत्राचार मुख्य रूप से अंग्रेजी भाषा में संपन्न किए जाते हैं। इन व्यावहारिक प्रशासनिक वास्तविकताओं को देखते हुए सरकार ने माना कि कर्मचारियों पर हिंदी परीक्षा का अतिरिक्त बोझ लादे रखना अब किसी भी दृष्टि से तर्कसंगत और उपयोगी नहीं रह गया था।
कर्मचारियों को बड़ी राहत और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुगमता
इस निर्णय के लागू होने से प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों को सीधी राहत मिली है। अब किसी भी कर्मचारी की वार्षिक वेतन वृद्धि हिंदी परीक्षा उत्तीर्ण न करने के कारण नहीं रोकी जा सकेगी।
इसके साथ ही, राज्य भाषा निदेशालय पर परीक्षा आयोजन, मूल्यांकन और प्रमाणपत्र जारी करने का जो प्रशासनिक व वित्तीय भार था, वह भी पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। निदेशालय अब अपनी संपूर्ण ऊर्जा और संसाधन राज्य में मराठी भाषा के संवर्धन, डिजिटलीकरण और शब्दकोश निर्माण जैसे रचनात्मक कार्यों पर केंद्रित कर सकेगा।
Maharashtra Government Employees: मराठी भाषा संगठनों और कर्मचारी यूनियनों ने किया स्वागत
मराठी भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्यरत विभिन्न सामाजिक संगठनों और कर्मचारी यूनियनों ने महायुति सरकार के इस फैसले का खुले दिल से स्वागत किया है। संगठनों का कहना है कि राज्य की प्रशासनिक पहचान मराठी भाषा से जुड़ी है, इसलिए सरकारी तंत्र में मातृभाषा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलना अनिवार्य था।
राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम राज्य की भाषाई पहचान को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ प्रशासनिक कार्यप्रणाली को सरल और अनावश्यक औपचारिकताओं से मुक्त बनाने की दिशा में एक व्यावहारिक सुधार है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से पूरे राज्य में लागू कर दिया गया है।
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