Nepal Flood 2026: नेपाल बाढ़ में निजी कंपनी के 150 कर्मचारी लापता, काठमांडू के होटल में बना वॉर रूम
Andritz के कर्मचारियों ने काठमांडू होटल में बनाया कमांड सेंटर, हेलीकॉप्टर से तलाश की तैयारी
Nepal Flood 2026: नेपाल में 26 अगस्त को आई प्रलयंकारी फ्लैश फ्लड के पांच दिन बाद भी आपदा की भयावहता कम होने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार तक इस भीषण त्रासदी में जान गंवाने वालों की आधिकारिक संख्या बढ़कर 939 तक पहुंच गई है, जबकि लगभग चार हजार लोग अब भी लापता दर्ज हैं। हालांकि सेना और बचाव दलों ने अब तक दस हजार से अधिक नागरिकों को सुरक्षित निकाला है, लेकिन हिमालयी जलविद्युत परियोजनाओं के कार्यस्थलों पर हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं।
इस बीच एक प्रमुख निजी बहुराष्ट्रीय कंपनी के कर्मचारियों ने अपने लापता साथियों को खोजने के लिए खुद का एक विशेष सर्च अभियान शुरू किया है। पनबिजली परियोजनाओं के लिए तकनीकी मशीनरी आपूर्ति और स्थापना का काम करने वाली ऑस्ट्रियाई कंपनी एंड्रिट्ज (Andritz) के कुल 250 से अधिक भारतीय और नेपाली कर्मचारियों में से लगभग 150 का बाढ़ के बाद से कोई सुराग नहीं मिल सका है। कंपनी के बचे हुए कर्मचारियों ने काठमांडू के एक होटल के कमरे को अपना अस्थायी ‘वॉर रूम’ बना लिया है, जहां से वे अपने साथियों को जीवित या मृत तलाशने की योजना पर चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं।
Nepal Flood 2026: होटल के कमरे में बना वॉर रूम, दीवार पर नक्शे और ग्राउंड सर्च की रणनीति
काठमांडू के एक होटल के कमरे में एंड्रिट्ज कंपनी के करीब दस वरिष्ठ तकनीकी कर्मचारी दिन-रात जुटे हुए हैं। कमरे की दीवार पर 216 मेगावाट क्षमता वाली ऊपरी त्रिशुली-1 जलविद्युत परियोजना का विस्तृत स्थलाकृतिक नक्शा लगा हुआ है।
एंड्रिट्ज के कंट्री हेड मयंक तोमर के अनुसार, बुधवार सुबह 9:30 बजे जैसे ही भोटेकोशी नदी में सैलाब आने की सूचना मिली, कंपनी ने तुरंत यह स्वतंत्र कमांड सेंटर स्थापित कर दिया था। कंपनी का उद्देश्य सरकारी बचाव कार्यों पर निर्भर रहने के साथ-साथ अपनी आंतरिक तकनीकी समझ और साइट मैपिंग का उपयोग कर त्वरित राहत पहुंचाना है।
काठमांडू से लगभग 70 किलोमीटर उत्तर और तिब्बत सीमा से 30 किलोमीटर पूर्व में स्थित यह परियोजना भोटेकोशी नदी गलियारे का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट बनने जा रहा था। बाढ़ का अचानक आया वेग इतना तीव्र था कि टनल और पावरहाउस में काम कर रहे अधिकांश कामगारों को संभलने का अवसर तक नहीं मिला।
मंगलवार से शुरू होगा संयुक्त सर्च ऑपरेशन: हवाई और जमीनी रास्ते से पहुंचेंगे साथी
कंपनी को सोमवार को ही प्रभावित क्षेत्र में हेलीकॉप्टर उतारने और प्रत्यक्ष खोज अभियान शुरू करने की प्रशासनिक अनुमति मिल गई थी, किंतु मूसलाधार बारिश और घने बादलों के चलते उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।
मौसम साफ रहने की स्थिति में मंगलवार सुबह चार तकनीकी विशेषज्ञों को हवाई मार्ग से सीधे परियोजना स्थल पर एयरड्रॉप किया जाएगा। इसके अतिरिक्त आठ अन्य प्रशिक्षित कर्मचारियों का एक दल दो विशेष फोर-व्हील ड्राइव वाहनों के जरिए दस घंटे की दुर्गम सड़क यात्रा तय करके ग्राउंड जीरो पर पहुंचेगा।
सड़कें टूटी होने के कारण जहां वाहन रुक जाएंगे, वहां से यह दल पैदल ही कीचड़, पत्थरों और मलबे के बीच आगे बढ़ेगा। होटल के वॉर रूम में बैठे साथी लगातार जीपीएस और सैटेलाइट फोन के माध्यम से जमीनी टीम का मार्गदर्शन करेंगे।
15 जलविद्युत स्थलों पर 639 लोग लापता: भारतीय परिजनों की बढ़ी चिंताएं
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, विभिन्न नदियों के तट पर स्थित 15 जलविद्युत परियोजना स्थलों से कुल 639 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें से कई परियोजनाएं भोटेकोशी-त्रिशुली नदी कॉरिडोर में स्थित हैं, जहां की भूमिगत टनल गाद और पत्थरों से पूरी तरह पटी हुई हैं।
लापता 150 कर्मचारियों में बड़ी संख्या भारतीय कुशल श्रमिकों और इंजीनियरों की भी है, जो आजीविका के लिए नेपाल में कार्यरत थे। भारत में स्थित उनके परिजन लगातार काठमांडू वॉर रूम और दूतावास के संपर्क में हैं।
नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल के जवानों के साथ-साथ भारत और चीन की विशेषज्ञ आपदा प्रबंधन टीमें भी भारी मशीनरी के साथ मौके पर जुटी हैं। बंद सुरंगों में ऑक्सीजन और आवश्यक जीवन रक्षक आपूर्ति पहुंचाने का प्रयास लगातार जारी है।
Nepal Flood 2026: बचाव कार्यों की चुनौतियां और भविष्य का पुनर्निर्माण
पहाड़ी क्षेत्र में लगातार हो रहा भूस्खलन, ध्वस्त पुल और संचार व्यवस्था का ठप होना राहत कार्यों की सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। इसके बावजूद निजी स्तर पर कर्मचारियों द्वारा अपने साथियों को बचाने के लिए शुरू की गई यह पहल संकट के समय अद्वितीय एकजुटता और मानवीय संवेदनशीलता का उदाहरण पेश करती है।
इस आपदा ने हिमालयी क्षेत्र में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के पर्यावरणीय जोखिमों और अर्ली वार्निंग सिस्टम (पूर्व चेतावनी प्रणाली) की महत्ता को एक बार फिर रेखांकित किया है। फिलहाल सभी बचाव दलों और एंड्रिट्ज के वॉर रूम का पूरा ध्यान समय रहते अपने लापता साथियों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने पर केंद्रित है।
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