Knee Clicking Sound: कम उम्र में घुटनों से आती है कट-कट की आवाज? जानें कब हो सकती है गंभीर समस्या
20 से 35 साल के युवाओं में भी घुटनों से चटकने की आवाज आम हो रही है।
Knee Clicking Sound: अक्सर कुर्सी से उठते समय, सीढ़ियां चढ़ते-उतरते वक्त या पैर को मोड़कर बैठते हुए घुटनों से कट-कट या चटकने (Popping or Clicking Sound) जैसी आवाज सुनाई देती है। पूर्व में इस तरह की समस्या को उम्रदराज लोगों या बुढ़ापे की निशानी माना जाता था, किंतु आज की गतिहीन जीवनशैली और डेस्क जॉब कल्चर के चलते 20 से 35 वर्ष के युवाओं में भी यह समस्या तेजी से देखी जा रही है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कम उम्र में घुटनों से आवाज आना किसी गंभीर बीमारी की दस्तक है या फिर यह सामान्य शारीरिक प्रक्रिया भर है।
चिकित्सा विज्ञान में जोड़ों से आने वाली इस चटकने, खुरचने या पॉपिंग की आवाज को ‘क्रेपिटस’ (Crepitus) कहा जाता है। हड्डी रोग विशेषज्ञों (Orthopedics) के अनुसार हर बार घुटनों से आवाज आना बीमारी का संकेत नहीं होता। यदि आवाज बिना किसी दर्द, सूजन या रुकावट के आ रही है, तो आमतौर पर यह हानिरहित होती है। हालांकि, यदि इस चटकन के साथ दर्द, सूजन, अकड़न या चलने में असमर्थता महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज करना भविष्य में जोड़ों की गंभीर क्षति का कारण बन सकता है।
Knee Clicking Sound: घुटनों से कट-कट की आवाज आने के जैविक कारण
मानव शरीर में घुटने का जोड़ एक जटिल जैव-यांत्रिक प्रणाली (Biomechanical System) है, जो जांघ की हड्डी (Femur), पिंडली की हड्डी (Tibia) और घुटने की कटोरी (Patella) से मिलकर बनता है। इन हड्डियों के सिरों पर घर्षण को रोकने के लिए मुलायम ‘आर्टिकुलर कार्टिलेज’ की परत होती है और पूरे जोड़ के भीतर चिकनाई बनाए रखने के लिए ‘सिनोवियल फ्लूइड’ (Synovial Fluid) मौजूद रहता है।
घुटनों से आवाज आने के पीछे सबसे आम कारण इसी सिनोवियल द्रव में बनने वाले सूक्ष्म गैस के बुलबुले होते हैं। जब जोड़ मुड़ता है या खिंचता है, तो द्रव के दबाव में परिवर्तन होने से नाइट्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड के बुलबुले तेजी से फूटते हैं, जिससे चटकने जैसी आवाज सुनाई देती है। यह प्रक्रिया उंगलियां चटकाने जैसी ही पूरी तरह सामान्य और हानिरहित होती है। इसके अलावा, जोड़ के हिलने-डुलने पर टेंडन्स (मांसपेशियों को हड्डी से जोड़ने वाले ऊतक) या लिगामेंट्स का अपनी जगह से हल्का सा फिसलकर वापस मूल स्थान पर आने से भी ‘क्लिक’ जैसी हल्की आवाज उत्पन्न हो सकती है।
कम उम्र में यह समस्या बढ़ने की मुख्य वजहें
आज के दौर में युवाओं के घुटनों में क्रेपिटस की आवृत्ति बढ़ने के पीछे कई प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कारण सक्रिय हैं।
सबसे बड़ा कारण शारीरिक निष्क्रियता और लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहना है। घंटों कंप्यूटर के आगे बैठने से जांघों की मुख्य मांसपेशियां, विशेष रूप से क्वाड्रिसेप्स और हैमस्ट्रिंग्स, कमजोर और सख्त हो जाती हैं। मांसपेशियों का संतुलन बिगड़ने पर नीकैप (Patella) का मूवमेंट अपनी प्राकृतिक खांचे (Groove) से थोड़ा भटक जाता है, जिसे ‘पेटेलोफेमोरल सिंड्रोम’ या रनर्स नी (Runner’s Knee) कहा जाता है। इसमें नीकैप के नीचे की चिकनी कार्टिलेज पर असामान्य रगड़ पड़ने लगती है।
इसके अतिरिक्त, बिना किसी वॉर्म-अप के अचानक भारी वजन उठाना, जिम में गलत तकनीक से स्क्वैट्स या लंज लगाना, खेलकूद के दौरान पुरानी चोट की अनदेखी करना या शरीर में विटामिन डी और कैल्शियम की कमी होना भी युवाओं के जोड़ों के आंतरिक ढांचे को प्रभावित करता है।
कब घुटनों की आवाज गंभीर बीमारी की चेतावनी बन जाती है?
यदि घुटने की आवाज के साथ कोई अन्य शारीरिक तकलीफ नहीं है, तो सामान्यतः किसी गहन उपचार की आवश्यकता नहीं होती। परंतु यदि आवाज के साथ निम्नलिखित में से कोई भी चेतावनी संकेत (Red Flag Symptoms) जुड़े हों, तो तत्काल विशेषज्ञ की राय लेनी चाहिए।
यदि चटकन के साथ घुटने के अंदर सुई चुभने जैसा, धड़कन जैसा या तेज खिंचाव का दर्द महसूस हो रहा हो, तो यह कार्टिलेज के क्षरण की शुरुआत हो सकती है। घुटने में सूजन, गर्माहट, लालिमा या जोड़ का बीच-बीच में अटक जाना (Locking) मेनिस्कस टियर (गद्दी का फटना) या लूज बॉडीज (हड्डी या कार्टिलेज का टूटा हुआ टुकड़ा) का संकेत हो सकता है।
इसके साथ ही यदि सीढ़ियां चढ़ते समय पैर में अस्थिरता (Giving Way) महसूस हो या घुटना पूरा सीधा व मोड़ने में असमर्थ हो, तो यह अर्ली ऑस्टियोआर्थराइटिस अथवा लिगामेंट इंजरी का स्पष्ट लक्षण है। खेलकूद या दुर्घटना के दौरान तेज पॉप की आवाज के साथ अचानक सूजन आ जाना एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट (ACL) के फटने का संकेत भी हो सकता है।
घुटनों को स्वस्थ और गतिशील बनाए रखने के उपाय
जोड़ों को दीर्घायु और मजबूत बनाए रखने के लिए दैनिक दिनचर्या में कुछ बुनियादी सुधार अत्यंत लाभकारी सिद्ध होते हैं। घुटनों पर पड़ने वाले झटके को कम करने के लिए जांघों और पिंडलियों की मांसपेशियों को मजबूत करना सबसे प्रभावी उपाय है। इसके लिए लो-इम्पैक्ट कार्डियो जैसे तैराकी, स्टेशनरी साइकिल चलाना और समतल जमीन पर तेज चलना सबसे बेहतर विकल्प हैं।
डेस्क जॉब करने वालों को हर 45 से 50 मिनट में अपनी सीट से उठकर हल्का खिंचाव (Stretching) करना चाहिए। सीधे पैर को उठाकर 10 सेकंड तक रोकने वाला साधारण व्यायाम (Straight Leg Raise) नीकैप की स्थिरता के लिए बहुत कारगर होता है। शरीर का अत्यधिक वजन सीधे तौर पर घुटनों के कार्टिलेज पर दबाव डालता है, अतः संतुलित आहार और हाइड्रेशन के माध्यम से बॉडी मास इंडेक्स (BMI) को सामान्य दायरे में रखना अनिवार्य है।
Knee Clicking Sound: चिकित्सीय परामर्श और निदान कब जरूरी है?
यदि घुटनों का दर्द आराम करने के बाद भी कम न हो रहा हो, सुबह उठते समय जोड़ों में 30 मिनट से अधिक समय तक जकड़न बनी रहे या पैर पर पूरा वजन डालना संभव न हो, तो बिना समय गंवाए ऑर्थोपेडिक सर्जन से संपर्क करें।
चिकित्सक शारीरिक परीक्षण के बाद आवश्यकतानुसार डिजिटल एक्स-रे, एमआरआई (MRI) या रक्त परीक्षणों के माध्यम से समस्या की वास्तविक जड़ की पहचान करते हैं। प्रारंभिक चरण में पहचान होने पर अधिकांश समस्याएं केवल फिजियोथेरेपी, मांसपेशी मजबूती के व्यायाम और जीवनशैली में सुधार से पूरी तरह नियंत्रित हो जाती हैं, जिससे भविष्य में किसी जटिल शल्यक्रिया (सर्जरी) की संभावना समाप्त हो जाती है।
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