Jammu Kashmir News: अनंतनाग-कुलगाम आतंकी हमलों में स्थानीय आतंकी की भूमिका, विदेशी आतंकियों से संपर्क

कश्मीर जोन के IGP सुजीत कुमार ने सुरक्षा समीक्षा के बाद बताया कि अनंतनाग और कुलगाम में सक्रिय स्थानीय आतंकी को विदेशी आतंकियों का सहयोग मिल रहा है।

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Jammu Kashmir News: जम्मू-कश्मीर में शांति व्यवस्था को बाधित करने की कोशिशों में जुटे आतंकी तंत्र के खिलाफ सुरक्षा बलों ने अपना शिकंजा और कड़ा कर दिया है। घाटी में हाल के दिनों में हुई आतंकी घटनाओं और सुरक्षा परिदृश्य को लेकर कश्मीर जोन के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) सुजीत कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में महत्वपूर्ण और संवेदनशील जानकारियां साझा की हैं। आईजीपी ने खुलासा किया कि दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग और कुलगाम जिलों में हाल ही में हुए हमलों और आतंकी वारदातों के पीछे एक सक्रिय स्थानीय आतंकी का मुख्य हाथ सामने आया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह स्थानीय आतंकी अकेले काम नहीं कर रहा, बल्कि उसे सीमा पार से आए प्रशिक्षित विदेशी आतंकियों का सीधा सहयोग और मार्गदर्शन भी मिल रहा है।
सुरक्षा एजेंसियां इन आतंकियों के नेटवर्क, उनकी पनाहगाहों और मददगारों की कड़ियों को जोड़ने में लगातार जुटी हुई हैं। आईजीपी ने स्पष्ट किया कि घाटी में विदेशी आतंकियों की सटीक और स्थिर संख्या का अनुमान लगाना अत्यंत कठिन है, क्योंकि वे सुरक्षा बलों के दबाव के कारण अपनी लोकेशन लगातार बदलते रहते हैं और एक स्थान पर लंबे समय तक नहीं टिकते।

Jammu Kashmir News: अनंतनाग और कुलगाम में सक्रिय आतंकी नेटवर्क पर सुरक्षा बलों की पैनी नजर

कश्मीर जोन के आईजीपी सुजीत कुमार ने श्रीनगर में सुरक्षा समीक्षा बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि दक्षिण कश्मीर का इलाका भौगोलिक और सामरिक दृष्टि से संवेदनशील रहा है। जांच में इस बात के पुख्ता प्रमाण मिले हैं कि स्थानीय स्तर पर सक्रिय एक आतंकी अनंतनाग और कुलगाम के इलाकों में दहशत फैलाने की साजिशों को अंजाम दे रहा है।
स्थानीय आतंकी को आगे कर विदेशी आतंकी पृष्ठभूमि में रहकर तकनीकी और रणनीतिक मदद मुहैया करा रहे हैं। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि स्थानीय आतंकियों का इस्तेमाल मुख्य रूप से रास्तों की पहचान, साजो-सामान जुटाने और ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) के नेटवर्क को सक्रिय रखने के लिए किया जाता है। पुलिस, सेना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की संयुक्त टीमें इनपुट के आधार पर संदिग्ध इलाकों में लगातार घेराबंदी और तलाशी अभियान (CASO) चला रही हैं।

विदेशी आतंकियों की संख्या का सटीक आकलन क्यों है चुनौतीपूर्ण?

घाटी में मौजूद विदेशी आतंकियों की तादाद से जुड़े सवाल पर आईजीपी ने कहा कि किसी निश्चित आंकड़े पर पहुंचना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। यह आतंकी समूह लगातार गतिशील रहते हैं और एक जिले से दूसरे जिले के जंगलों तथा पहाड़ी इलाकों में आवाजाही करते रहते हैं।
यदि आज किसी खुफिया सूचना में आतंकियों की मौजूदगी किसी विशेष जंगल या बस्ती के आसपास पाई जाती है, तो सुरक्षा बलों के पहुंचने से पहले ही वे दुर्गम रास्तों का फायदा उठाकर दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरित हो जाते हैं। आईजीपी ने जोर देकर कहा कि बिना अकाट्य तकनीकी और जमीनी साक्ष्यों के कोई आधिकारिक संख्या बताना सुरक्षा प्रोटोकॉल के लिहाज से भी उचित नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने यह आश्वस्त किया कि सुरक्षा तंत्र हर इनपुट का बारीकी से विश्लेषण कर रहा है और किसी भी संभावित खतरे को विफल करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

राष्ट्रीय राजमार्ग की सुरक्षा के लिए कड़े मानक, यात्रियों की सुविधा पर भी विचार

प्रेस वार्ता के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई। रणनीतिक और नागरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण इस लाइफलाइन पर आतंकी घटनाओं और अतीत में मिले संदिग्ध विस्फोटकों (IED) के मद्देनजर कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं।
राजमार्ग के संवेदनशील हिस्सों पर समय-समय पर विस्फोटक सामग्री मिलने और संदिग्ध गतिविधियों की आशंका को देखते हुए रोड ओपनिंग पार्टी (ROP), डॉग स्क्वॉड और अत्याधुनिक ड्रोन कैमरों के जरिए 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है। इसके साथ ही आईजीपी ने स्वीकार किया कि सघन जांच और सुरक्षा चौकियों के कारण दैनिक यात्रियों और पर्यटकों को कुछ असुविधा का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि पुलिस मुख्यालय अन्य सहयोगी सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर रहा है, ताकि सुरक्षा मानकों से कोई समझौता किए बिना जांच प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाया जा सके और आम नागरिकों की आवाजाही में अनावश्यक रुकावट न आए।

बडगाम के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हुआ सफल ऑपरेशन

आईजीपी सुजीत कुमार ने बडगाम जिले के दुर्गम और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा बलों द्वारा हाल ही में चलाए गए आतंकवाद विरोधी अभियान का भी उल्लेख किया। इस मुठभेड़ में मार गिराए गए आतंकी पुंछ, राजौरी और बडगाम के ऊंचे जंगलों के बीच बने प्राकृतिक रास्तों का इस्तेमाल कर अपनी गतिविधियां संचालित कर रहे थे।
इन इलाकों की भौगोलिक बनावट बेहद जटिल है, जहां खड़ी ढलानें, घने जंगल और अचानक बदलता मौसम अभियान को कठिन बना देते हैं। इसके बावजूद भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (SOG) के जवानों ने अदम्य साहस और पेशेवर दक्षता का परिचय देते हुए इन आतंकियों को ढेर किया। इस सफल कार्रवाई से आतंकियों के एक बड़े अंतर-जिला नेटवर्क को ध्वस्त करने में बड़ी सफलता हासिल हुई है।

Jammu Kashmir News: 154 करोड़ की संपत्तियां कुर्क, युवाओं से सतर्क रहने की अपील

आईजीपी ने घाटी में आतंकवाद को मिलने वाले वित्तीय पोषण पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए नार्को-टेररिज्म (मादक पदार्थों के जरिए आतंकवाद) के गठजोड़ को पूरी तरह समाप्त करने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि सीमा पार से भेजे जाने वाले नशीले पदार्थों की बिक्री से अर्जित धन का बड़ा हिस्सा आतंकी गतिविधियों, हथियारों की खरीद और हिंसा भड़काने में इस्तेमाल किया जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा इस साल चलाए गए नशा विरोधी अभियानों के आंकड़े साझा करते हुए उन्होंने बताया कि एनडीपीएस (NDPS) अधिनियम के तहत कुल 1,651 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें संलिप्त 1,941 स्थानीय तस्करों और दलालों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। इसके अलावा, अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार से खड़ी की गई लगभग 154 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को विधिक प्रक्रिया के तहत कुर्क किया गया है और तस्करों के बैंक खातों में मौजूद करीब 1.71 करोड़ रुपये की धनराशि को फ्रीज किया गया है।
आईजीपी ने घाटी के युवाओं और उनके अभिभावकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि वे नशे और साइबर अपराधों के जाल से दूर रहें। यदि कोई युवा किसी कारणवश नशे की लत का शिकार हो गया है, तो परिवार को इसे सामाजिक कलंक मानकर छिपाने के बजाय पुलिस के नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों (Drug De-addiction Centers) की मदद लेनी चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने और उनका सुरक्षित भविष्य संवारने के लिए प्रशासन हर स्तर पर सहायता प्रदान करेगा।

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