EO सुशील कुमार के ठिकानों पर छापेमारी, 1.37 करोड़ की छह संपत्तियों का खुलासा

बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने पटना, मुजफ्फरपुर और सहरसा में एक साथ तलाशी अभियान चलाया।

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Bihar Vigilance Raid: बिहार में भ्रष्ट लोकसेवकों और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने वाले अधिकारियों के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने अपनी सख्त कार्रवाई का दायरा और बढ़ा दिया है। गुरुवार को निगरानी ब्यूरो की विशेष टीमों ने मुजफ्फरपुर जिले के नगर पंचायत माधोपुर सुस्ता के कार्यपालक पदाधिकारी (EO) सुशील कुमार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके पटना, मुजफ्फरपुर और सहरसा स्थित ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की। तलाशी अभियान के दौरान कार्यपालक पदाधिकारी, उनकी धर्मपत्नी चांदनी गुप्ता तथा अन्य पारिवारिक सदस्यों के नाम पर दर्ज छह अचल संपत्तियों के महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इन अचल संपत्तियों का अनुमानित सरकारी मूल्य लगभग 1.37 करोड़ रुपये आंका गया है, जबकि बाजार मूल्य इससे कहीं अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

जांच एजेंसी की यह कार्रवाई न्यायालय से विधिवत सर्च वारंट प्राप्त करने के उपरांत एक सुनियोजित रणनीति के तहत संचालित की गई। सुबह-सुबह तीनों जिलों में एक साथ शुरू हुए इस सर्च ऑपरेशन से संबंधित नगर निकाय और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया।

Bihar Vigilance Raid: ज्ञात स्रोतों से 110 प्रतिशत अधिक संपत्ति का प्राथमिक आरोप

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा साझा की गई प्राथमिक जानकारी के अनुसार, कार्यपालक पदाधिकारी सुशील कुमार के विरुद्ध सेवाकाल के दौरान अवैध माध्यमों और पद के दुरुपयोग से अकूत परिसंपत्तियां जुटाने की पुख्ता गुप्त सूचनाएं प्राप्त हो रही थीं। प्राथमिक जांच और खुफिया पड़ताल के उपरांत ब्यूरो ने पाया कि अधिकारी के पास उनके वैध आय के ज्ञात स्रोतों की तुलना में करीब 110 प्रतिशत अधिक परिसंपत्तियां मौजूद हैं।

पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के बाद निगरानी ब्यूरो ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत निगरानी थाना कांड संख्या 131/26 दर्ज किया। जांच रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि सुशील कुमार ने अवैध रूप से लगभग 1 करोड़ 58 हजार 733 रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है। इस प्राथमिकी के आधार पर ही विशेष निगरानी न्यायालय से परिसरों की तलाशी के आदेश प्राप्त किए गए थे।

बैंक खातों में 28.54 लाख रुपये की जमा पूंजी और निवेश के दस्तावेज

तलाशी अभियान के दौरान छह भूखंडों और मकानों से जुड़े रजिस्ट्री दस्तावेजों के अतिरिक्त वित्तीय निवेश से संबंधित अहम साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं। ब्यूरो की पड़ताल में पता चला है कि अधिकारी और उनके परिजनों के नाम पर संचालित विभिन्न बैंकों के खातों में लगभग 28.54 लाख रुपये की राशि जमा है।

निगरानी की तकनीकी और वित्तीय जांच शाखा इन सभी बैंक खातों के स्टेटमेंट, लेन-देन की प्रकृति और विभिन्न सावधि जमाओं (FD) का सूक्ष्म विश्लेषण कर रही है। जांच एजेंसी इस पहलू पर भी काम कर रही है कि क्या इन खातों में नगर पंचायत की विकास योजनाओं या निविदा प्रक्रियाओं से जुड़ी अवैध कमीशन की रकम अंतरित की गई थी। इसके अलावा जीवन बीमा पॉलिसी और अन्य निजी निवेशों की भी गहन छानबीन जारी है।

पटना, मुजफ्फरपुर और सहरसा में तीन विशेष दलों ने ली तलाशी

निगरानी ब्यूरो के आला अधिकारियों के निर्देश पर इस वृहद कार्रवाई के लिए तीन अलग-अलग विशेष तलाशी दलों का गठन किया गया था। प्रत्येक दल का नेतृत्व पुलिस उपाधीक्षक स्तर के वरीय अधिकारियों को सौंपा गया था। पहली टीम ने मुजफ्फरपुर स्थित उनके प्रशासनिक कार्यालय और किराये के आवास पर धावा बोला, जहां से कई सरकारी पत्रावलियां और लैपटॉप जब्त किए गए।

दूसरी टीम ने पटना के भुसौला दानापुर स्थित उनके वर्तमान आवासीय परिसर में व्यापक तलाशी ली, जहां से अधिकांश संपत्ति दस्तावेज और निवेश से जुड़े कागजात मिले। वहीं, तीसरी टीम ने सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम तरियामा स्थित उनके पैतृक आवास पर सर्च ऑपरेशन चलाया। तीनों स्थानों पर एक साथ हुई कार्रवाई के कारण किसी भी प्रकार के साक्ष्य को हटाने या नष्ट करने का अवसर नहीं मिल सका।

Bihar Vigilance Raid: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विधिक शिकंजा

निगरानी ब्यूरो ने कार्यपालक पदाधिकारी सुशील कुमार के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(बी) के अंतर्गत मामला दर्ज किया है। ये धाराएं लोकसेवक द्वारा अपने पद का दुरुपयोग कर जानबूझकर अवैध संपत्ति अर्जित करने और भ्रष्ट आचरण अपनाने से संबंधित हैं।

जांच एजेंसी के अधिकारियों के अनुसार, छापेमारी में जब्त किए गए सभी मूल दस्तावेजों, भूमि की डीड, बैंक पासबुक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सील कर विशेष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। जांच अधिकारी जल्द ही संबंधित अधिकारी और उनकी पत्नी को आय के इन स्रोतों का कानूनी ब्योरा देने के लिए तलब करेंगे। यदि वे इन संपत्तियों के वैध अर्जन का संतोषजनक प्रमाण प्रस्तुत करने में असमर्थ रहते हैं, तो इन संपत्तियों को जब्त (Confiscate) करने की विधिक प्रक्रिया भी प्रारंभ की जा सकती है।

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