Karnataka News: कुमारधारा नदी में महिला पर मगरमच्छ का हमला, पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से बचाई जान
कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में कुमारधारा नदी में देर रात एक महिला पर मगरमच्छ ने हमला कर दिया। चीख सुनकर लॉज कर्मचारियों ने पुलिस को सूचना दी।
Karnataka News: कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में स्थित प्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र कुक्के सुब्रमण्य के समीप एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वाकया सामने आया है। यहां पवित्र मानी जाने वाली कुमारधारा नदी में रात के समय उतरी एक महिला पर घात लगाए बैठे विशालकाय मगरमच्छ ने अचानक हमला कर दिया। अंधेरे में पानी के भीतर से आई महिला की चीख-पुकार सुनकर पास के एक निजी लॉज में कार्यरत कर्मचारियों ने तत्परता दिखाई और अविलंब स्थानीय पुलिस को सूचित किया। सूचना मिलते ही सुब्रमण्य पुलिस स्टेशन की टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और स्थानीय निवासियों के सहयोग से नदी में उतरकर महिला को मगरमच्छ के जबड़े से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हमले में महिला को आंशिक चोटें आई हैं, जिसके बाद उसे तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। प्राथमिक उपचार और आवश्यक मानसिक काउंसलिंग के उपरांत पुलिस ने महिला को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया है।
तीर्थ नगरी के निकट घटी इस अप्रत्याशित घटना के बाद नदी तटीय क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय लोगों, तीर्थयात्रियों और वन विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।
Karnataka News: मानसिक तनाव के बीच रात में कुमारधारा नदी में उतरी थी महिला
पुलिस सूत्रों से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह घटना बुधवार, 4 नवंबर की देर रात कुमारधारा पुल के पास घटी। महिला मूल रूप से उडुपी जिले की निवासी बताई जा रही है, जो अपने पारिवारिक और निजी कारणों के चलते गहरे मानसिक तनाव से जूझ रही थी। इसी व्यथा में वह भटकते हुए देर रात कुक्के सुब्रमण्य के समीप कुमारधारा नदी के घाट पर पहुंच गई और पानी के भीतर चली गई।
अंधेरा होने के कारण उसे पानी में मौजूद मगरमच्छ का अहसास नहीं हो सका। जैसे ही महिला गहरे पानी की ओर बढ़ी, वहां छिपे मगरमच्छ ने उस पर हमला करते हुए उसके पैर को अपने जबड़े में दबाने का प्रयास किया। अचानक हुए इस जानलेवा हमले से घबराई महिला ने अपनी पूरी ताकत से खुद को छुड़ाने की कोशिश की और मदद के लिए जोर-जोर से चीखना शुरू कर दिया।
लॉज कर्मियों की सूझबूझ और पुलिस का त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन
नदी के सन्नाटे में महिला की दर्दनाक चीख सुनकर नदी तट के पास स्थित एक लॉज के रात्रि कर्मचारियों ने तुरंत स्थिति की गंभीरता को भांप लिया। उन्होंने बिना एक पल गंवाए मोबाइल टॉर्च की रोशनी नदी की ओर फेंकी और तत्काल सुब्रमण्य पुलिस थाने के आपातकालीन नंबर पर कॉल कर मदद मांगी।
सूचना प्राप्त होते ही रात्रि गश्त पर तैनात पुलिसकर्मी कुछ ही मिनटों में दलबल के साथ मौके पर पहुंच गए। स्थानीय तैराकों और ग्रामीणों की मदद से पुलिसकर्मियों ने रस्सियों और डंडों के सहारे पानी में उतरकर सूझबूझ से मगरमच्छ को दूर भगाया और लहूलुहान महिला को सुरक्षित किनारे पर खींच लिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि कर्मचारियों ने सूचना देने में चंद मिनटों की भी देरी की होती, तो मगरमच्छ महिला को गहरे भंवर में खींच ले जाता, जिससे उसकी जान बचना असंभव हो जाता।
अस्पताल में प्राथमिक उपचार और परिवार के साथ काउंसलिंग
नदी से सकुशल बाहर निकालने के उपरांत पुलिस वाहन से महिला को तुरंत स्थानीय सामुदायिक अस्पताल ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने घावों की सफाई कर एंटी-रैबीज और टिटनेस के इंजेक्शन लगाए तथा आवश्यक मरहम-पट्टी की। चिकित्सकों के अनुसार, महिला के पैरों पर मगरमच्छ के नुकीले दांतों के खरोंच और गहरे निशान हैं, किंतु उसकी मुख्य धमनियां सुरक्षित होने के कारण उसकी जान को कोई खतरा नहीं है।
अस्पताल में उपचार के दौरान पुलिस ने महिला से संपर्क साधकर उसके उडुपी स्थित परिजनों को घटना की सूचना दी। गुरुवार सुबह परिजनों के अस्पताल पहुंचने पर पुलिस अधिकारियों ने मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सहायता से महिला की काउंसलिंग करवाई, ताकि वह इस आघात और अवसाद से बाहर निकल सके। परिजनों के विशेष आग्रह पर पुलिस ने महिला की निजता और सामाजिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की है।
Karnataka News: कुमारधारा नदी के जलस्रोतों में मगरमच्छों का बढ़ता खौफ
इस दिल दहला देने वाली घटना ने कुमारधारा नदी और पश्चिमी घाट से सटे जलस्रोतों में मगरमच्छों की सक्रियता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के बाद जलस्तर कम होने पर अक्सर मगरमच्छ भोजन और धूप सेकने के लिए नदी के छिछले किनारों, झाड़ियों और पत्थरों के समीप डेरा जमा लेते हैं।
कुक्के सुब्रमण्य आने वाले हजारों तीर्थयात्री अक्सर धार्मिक अनुष्ठानों के तहत कुमारधारा नदी में स्नान करते हैं। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग ने पूर्व में भी चेतावनी बोर्ड लगाए थे, किंतु रात के समय नदी तटों पर निगरानी तंत्र कमजोर रहने से इस तरह के हादसों की आशंका बढ़ जाती है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वन विभाग से मांग की है कि नदी के प्रमुख स्नान घाटों और आबादी वाले इलाकों के किनारे मजबूत लोहे की जाली (फेंसिंग) लगाई जाए, ताकि जलीय जीव मानव बस्तियों तक न पहुंच सकें। साथ ही श्रद्धालुओं और आम जनता से भी यह विशेष अपील की गई है कि वे अंधेरे के समय या एकांत स्थानों पर नदी के जल में उतरने का कतई जोखिम न उठाएं।
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