Harsha Richhariya: ‘दिल टूटा तो पहाड़ों पर चली गई’, प्रयागराज महाकुंभ से वायरल हुईं इस साध्वी ने बताया ब्रेकअप के बाद का दर्द

Harsha Richhariya: रिश्तों में मिले धोखे और तनाव से आने लगे थे माइग्रेन अटैक, ग्लैमर की दुनिया छोड़ अब बनीं साध्वी।

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Harsha Richhariya: प्रयागराज महाकुंभ से सोशल मीडिया पर रातों-रात सुर्खियां बटोरने वाली हर्षा रिछारिया इन दिनों इंटरनेट पर खूब चर्चा में हैं। एक समय था जब हर्षा ग्लैमर की दुनिया में सक्रिय थीं और मॉडलिंग व एंकरिंग किया करती थीं। लेकिन आज वे सांसारिक मोह-माया को छोड़कर संन्यासी जीवन अपना चुकी हैं और एक साध्वी बन गई हैं। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू ने अपने प्रेम संबंधों और ब्रेकअप के बाद के मानसिक तनाव को लेकर खुलकर बात की है।

इस इंटरव्यू में हर्षा ने बताया कि कैसे एक के बाद एक मिले दुखों और रिश्तों के टूटने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। उन्होंने अपने दिल टूटने की कहानी साझा करते हुए बताया कि जब उनका रिश्ता टूटा, तो वे सब कुछ छोड़कर पहाड़ों पर चली गई थीं।

Harsha Richhariya: जब प्यार और दोस्तों ने छोड़ा साथ- हर्षा रिछारिया का पुराना कल

इंटरव्यू के दौरान जब साध्वी हर्षा रिछारिया से उनके निजी जीवन और प्रेम संबंधों को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने बहुत ही ईमानदारी से इसका जवाब दिया। हर्षा ने कहा कि अगर वे यह कहें कि उन्हें कभी किसी से प्यार नहीं हुआ या उनका कोई पार्टनर नहीं रहा, तो यह कहना पूरी तरह से गलत और झूठ होगा।

हर्षा ने स्वीकार किया कि उन्हें भी अपने जीवन में प्यार हुआ था, लेकिन वह रिश्ता टिक नहीं सका और छूट गया। इस अनुभव के बाद उन्हें समझ आया कि कुछ लोगों की किस्मत में शायद प्यार या लंबे समय तक टिकने वाले रिश्ते लिखे ही नहीं होते हैं।

हर्षा ने स्पष्ट किया कि जब वे रिश्तों और प्यार की बात करती हैं, तो उनका मतलब सिर्फ किसी लाइफ पार्टनर से नहीं है। उन्होंने अपने दोस्तों का उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय ऐसा होता है जब हमारे इर्द-गिर्द पचास दोस्त होते हैं। लेकिन जिंदगी में एक वक्त ऐसा भी आता है जब मुश्किल घड़ी में आपके पास सिर्फ एक या दो सच्चे दोस्त ही बचते हैं, जो आपको संभालते हैं। बाकी सब धीरे-धीरे दूर हो जाते हैं।

‘रिश्ता टूटा तो पहाड़ों पर निकल गई थी, आने लगे थे माइग्रेन अटैक’

इंटरव्यू में जब हर्षा से यह पूछा गया कि क्या उन्होंने अपना कोई खास रिश्ता टूटने के दुख में संन्यास का मार्ग चुना? इस पर उन्होंने साफ इनकार किया। हर्षा ने कहा कि संन्यास का फैसला उनका अभी का है, जबकि उनका रिश्ता बहुत पहले ही टूट चुका था। दोनों चीजों का आपस में सीधा संबंध नहीं है।

हर्षा ने अपने उस कठिन दौर को याद करते हुए बताया कि जब उनका ब्रेकअप हुआ था, तब वे मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गई थीं और शांति की तलाश में पहाड़ों पर रहने चली गई थीं। उस समय वे एक के बाद एक कई तरह के मानसिक आघात (ट्रॉमा) से गुजर रही थीं।

“उस वक्त मुझसे बहुत कुछ छूट गया था। मुझे एक के बाद एक गहरे सदमे मिल रहे थे। एक तरफ मुझे बड़ा आर्थिक नुकसान (फाइनेंशियल लॉस) हुआ था, तो दूसरी तरफ मेरे दोस्त और पार्टनर भी मुझे छोड़कर जा चुके थे। उस मानसिक तनाव के कारण मुझे माइग्रेन के गंभीर अटैक आने लगे थे। वह दौर ऐसा था जिसने मुझे अंदर से पूरी तरह हिलाकर रख दिया था।”

इस घटना के बाद बदल गई पूरी जिंदगी: संसार से मोह भंग

हर्षा रिछारिया ने बताया कि पहाड़ों पर बिताए समय और जीवन के उतार-चढ़ाव ने उनकी पूरी सोच को बदल दिया। उन्हें इस बात का गहरा अहसास हो गया कि इस पूरे संसार में कोई भी इंसान पूरी तरह से आपका नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि इस दुनिया में अगर आप किसी के लिए अपने प्राण भी त्याग देंगे, तो भी सामने वाले को आपकी कोई परवाह नहीं होगी। कोई भी व्यक्ति शत-प्रतिशत आपका नहीं बन सकता। हर्षा ने यहां तक कहा कि संसार में कोई गुरु भी पूरी तरह सिर्फ आपका नहीं हो सकता, क्योंकि उनके भी हमारे जैसे बहुत से शिष्य होते हैं। इसी वैराग्य की भावना ने धीरे-धीरे उन्हें संन्यास के मार्ग की ओर अग्रसर किया।

शादी को लेकर क्या हैं हर्षा के विचार? जानिए कब करेंगी विवाह

प्रयागराज महाकुंभ के दौरान हर्षा रिछारिया के साथ-साथ दो और चेहरे ‘आईआईटी बाबा’ और ‘मोनालिसा’ भी काफी प्रसिद्ध हुए थे। ये दोनों ही अब शादी के पवित्र बंधन में बंध चुके हैं। ऐसे में जब हर्षा से उनकी शादी की योजनाओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने सनातन धर्म के इतिहास का हवाला देते हुए एक बेहद व्यावहारिक जवाब दिया।

हर्षा ने कहा कि हमारे त्रेतायुग और द्वापरयुग में जो बड़े-बड़े संत और ऋषि-मुनि रहे हैं, वे सभी विवाहित (शादीशुदा) थे। लेकिन उन्होंने संसार का त्याग दूसरों को दिखाने के लिए नहीं किया था। उन संतों ने धर्म को आगे बढ़ाने और समाज को एक योग्य संतान देने के उद्देश्य से विवाह किया था ताकि संस्कृति सुरक्षित रहे।

साध्वी हर्षा का मानना है कि केवल दूसरों को दिखाने के लिए परिवार या समाज का त्याग नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संन्यास का मतलब यह नहीं है कि आप जबरन सब कुछ छोड़ दें। इससे कहीं बेहतर यह है कि आप एक सही और योग्य जीवनसाथी का चुनाव करें और उसके साथ मिलकर धर्म और जीवन के मार्ग पर आगे बढ़ें।

Harsha Richhariya: ग्लैमर से अध्यात्म तक का सफर

हर्षा रिछारिया की यह कहानी साफ तौर पर दर्शाती है कि ग्लैमर और चकाचौंध से भरी दुनिया में दिखने वाली खुशियां हमेशा स्थायी नहीं होती हैं। जीवन में मिलने वाले धोखे, आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव कई बार इंसान को आत्मनिरीक्षण करने पर मजबूर कर देते हैं। हर्षा ने अपनी जिंदगी के सबसे बुरे दौर का सामना करते हुए अध्यात्म का सहारा लिया। आज वे महाकुंभ के माध्यम से लोगों के बीच एक संन्यासी के रूप में अपनी नई पहचान बना चुकी हैं और सोशल मीडिया पर उनकी यह यात्रा लाखों लोगों को प्रेरित कर रही है।

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