Lucknow power crisis: भीषण गर्मी में 20 से 27 घंटे बिजली गुल, निवासियों में आक्रोश, जानें कारण और राहत के उपाय
भीषण गर्मी में बिजली कटौती से लोग परेशान, प्रशासन ने दिए त्वरित राहत के निर्देश
Lucknow power crisis: राजधानी लखनऊ में इन दिनों भीषण गर्मी और लू का प्रकोप जारी है। तापमान 44 डिग्री के पार पहुंचने के साथ बिजली की मांग आसमान छू रही है, लेकिन बिजली आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। कई इलाकों में बिजली 20 से 27 घंटे तक गुल रह रही है, जिससे लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। पानी की सप्लाई ठप, घरों में गर्मी से हाल बेहाल और बच्चों-बुजुर्गों की सेहत को खतरा, ऐसे में निवासी बिजली विभाग और सरकार के खिलाफ आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं। लखनऊ विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (LDA) के अधिकारियों का कहना है कि अत्यधिक लोड और कुछ ट्रांसफार्मरों के खराब होने से यह समस्या पैदा हुई है, लेकिन आम लोगों को लगता है कि विभाग की तैयारी नाकाफी रही। गर्मी की छुट्टियों में स्कूल-कॉलेज बंद होने और घरों में एसी-कूलर चलने से बिजली की खपत बढ़ गई है, जिसका असर पूरे शहर पर पड़ रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं इस बिजली संकट की पूरी स्थिति, प्रभावित इलाके, कारण और राहत के उपाय।
प्रचंड हीटवेव के बीच गहराया अभूतपूर्व बिजली संकट: राजधानी के कई वीआईपी इलाकों में 20-27 घंटे का कड़ा आउटेज
लखनऊ के गोमती नगर, इंदिरानगर, अलीगंज, राजाजीपुरम, चौक, अमीनाबाद, हुसैनाबाद और वीआईपी रोड जैसे घनी आबादी वाले प्रमुख रिहायशी व कमर्शियल इलाकों में इस समय बिजली आपूर्ति की कस्टमाइज्ड स्थिति सबसे बदतर दौर में पहुंच गई है। इन विशिष्ट क्षेत्रों में रहने वाले लाखों नागरिकों को पिछले कुछ दिनों से लगातार 20 से लेकर 27 घंटे तक के कड़े और अवांछित पावर कट (बिजली कटौती) का सामना पूरी कड़ाई से करना पड़ रहा है। भीषण लू के थपेड़ों के बीच लोग दिन भर अपने घरों और दफ्तरों में पसीने से पूरी तरह तर-बतर हो रहे हैं और रात के समय भी उमस के कारण उन्हें कोई राहत नहीं मिल पा रही है। एक स्थानीय पीड़ित निवासी ने कैमरे पर अपना कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए बताया कि वोल्टेज की भारी फ्लक्चुएशन और लंबे पावर कट के कारण घरों में एसी चलाने की तो बात ही छोड़िए, सामान्य पंखे और लाइटें भी पूरी तरह से बंद पड़ी हैं, जिससे बच्चे, बीमार और बुजुर्ग दिन-रात तड़प रहे हैं; सबसे बड़ी आफत यह आ गई है कि बिजली न होने से ओवरहेड पानी की मोटरें भी नहीं चल पा रही हैं जिससे समूचे वीआईपी इलाकों में पीने के साफ पानी का एक नया और गंभीर संकट खड़ा हो गया है, जिसे देखते हुए हालांकि बिजली विभाग ने कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में आपातकालीन जनरेटर लगाने की बात कही है, लेकिन धरातल पर यह कस्टमाइज्ड व्यवस्था अभी तक पूरी नहीं हो सकी है।
बिजली संकट के मुख्य तकनीकी कारण: ओवरलोडिंग की मार, पुरानी केबलिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर का फेल होना
लखनऊ विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के वरिष्ठ तकनीकी इंजीनियरों और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष ग्रीष्मकालीन मौसम और प्रचंड लू के थपेड़े उम्मीद से बहुत पहले और अत्यधिक मारक क्षमता के साथ आए हैं। जून के इस कड़े सप्ताह में वायुमंडल का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर 44 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाने से प्रत्येक घर और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में हाई-कैपेसिटी एयर कंडीशनर्स (AC) और हैवी कूलरों की खुदरा खपत में एक बहुत ही अप्रत्याशित और बड़ा सांख्यिकीय उछाल दर्ज किया गया है। मांग और आपूर्ति के बीच उपजे इस भारी अंतर के कारण स्थानीय डिस्ट्रीब्यूशन सबस्टेशनों के दर्जनों कस्टमाइज्ड ट्रांसफार्मर ओवरलोड होकर अचानक बुरी तरह फुंक गए हैं या तकनीकी रूप से पूरी तरह खराब हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त, शहर के भीतर बिछी हुई दशकों पुरानी जर्जर एल्युमिनियम ओवरहेड लाइनें, फीडर ट्रिपिंग की विसंगतियां और समय पर प्री-समर मेंटेनेंस (गर्मी से पहले की कड़ाई से होने वाली मरम्मत) का ठीक से न होना इस विकराल समस्या को और अधिक अपग्रेड कर रहा है; विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने विनियामक स्तर पर यह कड़वा सच स्वीकार भी किया है कि इस बार के ग्रीष्मकालीन पीक लोड (Peak Load) को संभालने के लिए उनकी विभागीय तैयारी सांख्यिकीय रूप से नाकाफी रही थी और यद्यपि कुछ चुनिंदा सबस्टेशनों की क्षमता अपग्रेड करने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है, लेकिन इसे पूरी तरह धरातल पर उतरने में अभी कुछ और दिनों का समय लगेगा।
नाराज निवासियों का चौतरफा आक्रोश: बिजली कार्यालयों के बाहर कड़ा प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
राजधानी के विभिन्न उपनगरों और चौराहों पर पानी और बिजली के अभाव से जूझ रहे उग्र नागरिक अब भारी तादाद में अपने घरों से निकलकर स्थानीय सब-स्टेशनों और मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के कार्यालयों के बाहर पूरी कड़ाई से सड़कों पर उतर आए हैं। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और कई थानों में लिखित शिकायतें दर्ज कराने के साथ-साथ सूचना के अधिकार (RTI) और विनियामक उपभोक्ता फोरम के माध्यम से कड़े कानूनी कदम उठाने की मांग भी शुरू कर दी है। एक बेबस महिला निवासी ने रोते हुए अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि “चिलचिलाती गर्मी में बिजली न होने से घर के छोटे बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, लगातार पानी की किल्लत बनी हुई है और उमस के कारण रात भर कोई सो नहीं पा रहा है; सरकार को केवल टैक्स वसूलने की बजाय हमारे इन बुनियादी मानवाधिकारों पर तुरंत कड़ा ध्यान देना चाहिए।” धरातल के इस जमीनी विरोध के समानांतर डिजिटल इंडिया के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी हैशटैग #LucknowPowerCrisis बहुत तेजी से नंबर वन पर कड़क ट्रेंड कर रहा है, जहां शहर के जागरूक युवा अपने अंधेरे घरों, फुंके हुए ट्रांसफार्मरों और गर्मी से बेहाल बुजुर्गों की लाइव तस्वीरें और वीडियो शेयर करके सरकार के 24 घंटे निर्बाध बिजली देने के वादे पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं।
प्रशासन और गृह मंत्रालय का सख्त रुख: ऊर्जा मंत्री और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के कड़े विनियामक निर्देश
लखनऊ में गहराते इस भयंकर जन-आक्रोश और कानून-व्यवस्था की नाजुक स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन और मुख्यमंत्री कार्यालय ने पूरे मामले को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता पर लेते हुए संज्ञान लिया है। प्रदेश के माननीय ऊर्जा मंत्री ने लखनऊ विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक और सभी मुख्य अभियंताओं की एक आपातकालीन कड़क समीक्षा बैठक बुलाई है और उन्हें बिना किसी हीलाहवाली के युद्धस्तर पर इस गंभीर समस्या को तत्काल सुलझाने के विनियामक निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत जिन सबस्टेशनों के ट्रांसफार्मर फुंके हैं, वहां कस्टमाइज्ड मोबाइल ट्रांसफार्मर वैन तैनात करने, पुरानी अंडरग्राउंड केबलों की त्वरित मरम्मत करने और रोस्टरिंग के नाम पर होने वाली अनावश्यक अवांछित पावर कटिंग को पूरी तरह से बंद करने के प्रयास काफी अपग्रेड कर दिए गए हैं; इसके साथ ही लखनऊ के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) ने भी स्वयं प्रभावित क्षेत्रों का औचक जमीनी निरीक्षण किया है और बिजली कंपनियों को 24 घंटे के भीतर प्रभावित मोहल्लों में सामान्य आपूर्ति बहाल करने का कड़ा अल्टीमेटम दिया है, जिसके तहत अस्पतालों, आपातकालीन पेयजल केंद्रों और जरूरी सरकारी सेवाओं वाले क्षेत्रों में निर्बाध बिजली के बैकअप के लिए विशेष भारी मोबाइल जनरेटर गाड़ियां कड़ाई से मुस्तैद की जा रही हैं।
स्वास्थ्य और चिकित्सा पर बिजली कटौती का मारक असर: हीट स्ट्रोक और तीव्र डिहाइड्रेशन का बढ़ा जोखिम
इस प्रचंड वातावरणीय हीटवेव के बीच लगातार 27 घंटे तक बिजली का गुल रहना राजधानी के आम नागरिकों के शारीरिक स्वास्थ्य के लिए एक बहुत ही खतरनाक और जानलेवा स्थिति पैदा कर रहा है। बिना पंखे और कूलर के बंद कमरों के भीतर का तापमान अचानक 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर अपग्रेड हो रहा है, जो विशेष रूप से छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और क्रोनिक बीमारियों से पीड़ित बुजुर्गों में अचानक भयंकर हीट स्ट्रोक (लू लगना), तीव्र डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) और गंभीर घबराहट जैसी घातक चिकित्सीय विसंगतियों के मामलों को अस्पतालों में बहुत तेजी से बढ़ा रहा है। शहर के बड़े गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और फिजीशियन डॉक्टरों का इस पर कड़ा परामर्श है कि इस विकट बिजली संकट के दौरान लोग खुद को अंदर से हाइड्रेटेड रखने के लिए लगातार साफ पानी, ओआरएस घोल और घरेलू छाछ का अत्यधिक सेवन कड़ाई से सुनिश्चित करें। यद्यपि शहर के बड़े सरकारी हॉस्पिटलों और ट्रामा सेंटरों में मरीजों के इलाज के लिए हैवी-ड्यूटी बैकअप जनरेटर चलाए जा रहे हैं, लेकिन लगातार इतने लंबे समय तक बिना ग्रिड पावर के केवल डीजल जनरेटरों के भरोसे इस नाजुक चिकित्सा व्यवस्था को लंबे समय तक सुरक्षित रख पाना विधिक और तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण है।
शहरी अर्थव्यवस्था, कृषि और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर पावर क्राइसिस की कड़वी मार
बिजली आपूर्ति के इस तरह पूरी तरह से ठप हो जाने का एक बहुत ही मारक और प्रतिकूल प्रभाव लखनऊ व इसके आसपास के ग्रामीण व अर्ध-शहरी अंचलों के खुदरा व्यापार, लघु उद्योगों और कृषि अर्थव्यवस्था पर भी बहुत कड़ाई से पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में बिजली के कड़े संकट के चलते ट्यूबवेल और वाटर पंप न चल पाने से खरीफ की अगेती फसलों और मौसमी सब्जियों की सिंचाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है जिससे किसान बेहद परेशान हैं। वहीं दूसरी ओर, मुख्य शहर के भीतर स्थित बड़े व्यावसायिक बाजारों, कपड़ा शोरूमों, रेस्टोरेंट्स, कोल्ड स्टोरेज चेन, आइसक्रीम पार्लरों और कॉर्पोरेट आईटी दफ्तरों में बिजली न रहने से उनका दैनिक कामकाज पूरी तरह से ठप हो चुका है जिससे उन्हें हर दिन करोड़ों रुपये का कड़ा खुदरा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है; बैकअप के लिए इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल जनरेटरों में लगने वाले महंगे डीजल के कारण व्यापारियों की इनपुट परिचालन लागत काफी हद तक अपग्रेड हो गई है जिससे खुदरा मंदी का खतरा भी मंडराने लगा है।
दीर्घकालिक समाधान का रणनीतिक रोडमैप: स्मार्ट ग्रिड तकनीक, रूफटॉप सोलर और विभागीय जवाबदेही की जरूरत
ऊर्जा क्षेत्र के बड़े विशेषज्ञों और सांख्यिकीय विश्लेषकों का इस भीषण क्राइसिस पर साफ तौर पर मानना है कि लखनऊ जैसे तेजी से फैलते हुए महानगर में आबादी और इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ-साथ बिजली की कुल कस्टमाइज्ड मांग का ग्राफ हर साल लगभग 15 से 20 प्रतिशत की रिकॉर्ड रफ्तार से अपग्रेड हो रहा है। इस भारी भावी मांग को पूरी संप्रभुता के साथ संभालने के लिए अब केवल पुराने पारंपरिक ग्रिड के भरोसे नहीं रहा जा सकता, बल्कि सरकार को जल्द से जल्द पूरे शहर में अत्याधुनिक ‘स्मार्ट ग्रिड तकनीक’ (Smart Grid), कस्टमाइज्ड डिस्ट्रीब्यूशन ऑटोमेशन और घरों की छतों पर ‘रूफटॉप सोलर पावर प्लांट’ (Solar Energy) को एक बड़े राष्ट्रीय अभियान के रूप में कड़ाई से बढ़ावा देना होगा ताकि पारंपरिक पावर स्टेशनों पर पड़ने वाला अतिरिक्त लोड काफी हद तक कम हो सके। इसके समानांतर, बिजली कंपनियों को ग्रीष्मकालीन पीक लोड सीजन के शुरू होने से कम से कम तीन महीने पहले से ही अपनी एडवांस प्लानिंग और सांख्यिकीय डेटा के आधार पर नए अतिरिक्त सबस्टेशनों का विनिर्माण पूरा कर लेना चाहिए; साथ ही आम समझदार नागरिकों को भी इस संकट की घड़ी में विभागीय जवाबदेही तय करने के साथ-साथ व्यक्तिगत स्तर पर भी ऊर्जा संरक्षण (Power Saving) के उपायों को कड़ाई से अपनी आदत बनाना चाहिए और दोपहर के पीक ऑवर्स के दौरान अनावश्यक एसी या फालतू लाइटों को बंद करके एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका पूरी निष्ठा से निभानी चाहिए।
निष्कर्ष
समग्र रूप से देखा जाए तो राजधानी लखनऊ के भीतर इस समय उपजा यह भीषण बिजली संकट (Lucknow power crisis) और 20 से 27 घंटे का यह लंबा कड़ा आउटेज असल में शहर की समूची आम जनता के धैर्य की कड़ी परीक्षा ले रहा है जिसने पूरे नागरिक जीवन की गतिशीलता को कड़ाई से प्रभावित कर दिया है। इस अभूतपूर्व संकट से पार पाने के लिए जहां एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार और बिजली वितरण निगम लिमिटेड को बिना किसी हीलाहवाली के युद्धस्तर पर तात्कालिक राहत कार्य चलाकर ट्रांसफार्मरों को अपग्रेड करना होगा, वहीं दूसरी ओर दीर्घकालिक भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए एक अभेद्य और आधुनिक पावर इंफ्रास्ट्रक्चर का रोडमैप भी तैयार करना होगा। हमारी तरफ से लखनऊ के सभी प्रभावित नागरिकों से यह भावुक व कस्टमाइज्ड अपील है कि वे इस अत्यंत कठिन और तपते हुए मौसमी दौर में पूरी तरह से संयम व धैर्य बनाए रखें, किसी भी प्रकार की भ्रामक डिजिटल अफवाहों का हिस्सा बनने से पूरी कड़ाई से बचें और अपने-अपने घरों में बिजली की फिजूलखर्ची को रोककर इस राष्ट्रीय ऊर्जा बचत अभियान में अपना अमूल्य सहयोग प्रदान करें। बिजली कटौती के वेरिएंट वाइज लाइव शेड्यूल्स, आपके वार्ड में नए ट्रांसफार्मर की अलॉटमेंट स्थिति और विद्युत विभाग की तात्कालिक विनियामक घोषणाओं की सटीक व प्रामाणिक जानकारी प्राप्त करने के लिए नियमित रूप से केवल मध्यांचल विद्युत वितरण निगम (MVVNL) के आधिकारिक डिजिटल शिकायत पोर्टल और सरकारी बयानों के रेगुलर अपडेट्स पर ही अपनी पैनी नजर बनाए रखें क्योंकि सही और समय पर मिली जानकारी ही इस कड़े संकट से निपटने की सबसे असली चाबी है।
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