Rajesh Exports: चेयरमैन राजेश मेहता का बड़ा दावा, प्रोमोटरों ने हिस्सेदारी नहीं बेची

राजेश मेहता बोले- प्रोमोटरों ने हिस्सेदारी नहीं बेची, LIC की 10.80% हिस्सेदारी

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Rajesh Exports: भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) द्वारा राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के शेयरों में की गई खरीदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कंपनी के चेयरमैन राजेश मेहता ने स्पष्ट किया है कि LIC ने ये शेयर खुले बाजार से खरीदे हैं और किसी भी प्रोमोटर ने अपनी हिस्सेदारी बीमा कंपनी को नहीं बेची है। राजेश एक्सपोर्ट्स में LIC की कुल 10.80 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो लंबे समय में धीरे-धीरे जमा हुई है। मेहता ने कहा कि यह LIC का अपना व्यावसायिक फैसला है और कंपनी या प्रोमोटरों को इससे कोई सीधा फायदा नहीं हुआ। इस बयान से बाजार में कुछ राहत महसूस की जा रही है, लेकिन कंपनी के शेयरों में हालिया गिरावट और नियामकीय मुद्दों को देखते हुए निवेशकों की चिंता बनी हुई है।

चेयरमैन राजेश मेहता का स्पष्ट बयान: एलआईसी के निवेश में प्रोमोटरों की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं

राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन राजेश मेहता ने पीटीआई (PTI) से विशेष बातचीत में पूरी कड़ाई से स्पष्ट किया है कि जीवन बीमा निगम (LIC) ने कंपनी के शेयरों की यह भारी खरीदारी किसी एकल सौदे में नहीं, बल्कि लगभग 20 सालों की एक लंबी अवधि में सीधे द्वितीयक और खुले बाजार (Open Market) से खुदरा निवेशकों के माध्यम से की है। उन्होंने शेयर बाजार की अफवाहों का खंडन करते हुए इस बात पर विशेष जोर दिया कि न तो उन्होंने व्यक्तिगत रूप से और न ही कंपनी के किसी अन्य प्रमोटर समूह ने अपनी कोई भी हिस्सेदारी एलआईसी को सीधे तौर पर बेची है, और इसके साथ ही कंपनी के आंतरिक बोर्ड ने भी बीमा कंपनी को कोई भी नए इक्विटी शेयर जारी नहीं किए हैं। मेहता ने विनियामक पारदर्शिता को स्पष्ट करते हुए बताया कि एलआईसी का यह रणनीतिक निवेश उनका अपना सूझ-बूझ वाला और स्वायत्त व्यावसायिक फैसला है, जिसकी बैक-एंड में कंपनी प्रबंधन को कोई प्रत्यक्ष पूर्व जानकारी नहीं थी और न ही एलआईसी के फंड मैनेजर्स के साथ प्रमोटर ग्रुप का कोई सीधा संपर्क है; चेयरमैन का यह स्पष्टीकरण उन गंभीर चिंताओं को दूर करने की एक बड़ी कोशिश माना जा रहा है जो हाल ही में कंपनी के कामकाज पर लगे कुछ खुदरा वित्तीय हेराफेरी के आरोपों और स्टॉक एक्सचेंज पर शेयरों की कीमतों में आई भारी मंदी के बाद निवेशकों के मन में अचानक पैदा हो गई थीं।

LIC की 10.80% हिस्सेदारी का विवाद और सर्राफा व खुदरा बाजार की लाइव प्रतिक्रिया

घरेलू शेयर बाजार के सांख्यिकीय सूचकांकों के अनुसार राजेश एक्सपोर्ट्स के कुल फ्री-फ्लोट में एलआईसी की यह 10.80 प्रतिशत की बड़ी हिस्सेदारी कॉरपोरेट गवर्नेंस के दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्वपूर्ण और कूटनीतिक मानी जाती है। चेयरमैन राजेश मेहता ने इस निवेश चक्र का एक अनोखा और कड़क पक्ष सामने रखते हुए कहा कि यदि ऐतिहासिक रूप से इस शेयर में उतार-चढ़ाव के कारण एलआईसी को बही-खातों में कोई आंशिक वित्तीय नुकसान हुआ भी है, तो उसका सीधा वास्तविक फायदा देश की आम खुदरा भारतीय जनता को ही मिला है, क्योंकि ये सभी शेयर खुले बाजार में छोटे और खुदरा विक्रेताओं से ही खरीदे गए थे जिससे प्रमोटर को कोई व्यक्तिगत नकदी हासिल नहीं हुई। उन्होंने आगे की व्यावसायिक संभावनाओं पर बोलते हुए कहा कि यदि भविष्य में एलआईसी अपनी मर्जी से इस निवेश से बाहर निकलने का कड़ा फैसला लेती है और उससे शेयर की कीमतों में कोई तात्कालिक अस्थिरता आती भी है, तो वह स्थिति देश के नए मूल्य-आधारित खुदरा खरीदारों और वैल्यू इन्वेस्टर्स के लिए पोर्टफोलियो अपग्रेड करने का एक बहुत ही शानदार व नया कस्टमाइज्ड मौका साबित होगी; मेहता का यह मजबूत रुख शेयर बाजार के विश्लेषकों द्वारा कंपनी की वित्तीय साख को वापस मजबूत दिखाने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, विशेष रूप से ऐसे परिदृश्य में जब कंपनी का शेयर 3 जून से लेकर अब तक लगभग 14 प्रतिशत से ज्यादा की खुदरा गिरावट दर्ज करा चुका है और हाल ही में 94.50 रुपये के अपने नए निचले स्तर (52-Week Low) पर पहुंच गया था।

सोने और रिफाइनिंग के कारोबार पर लगे आरोपों का संदर्भ तथा विनियामक विसंगतियां

राजेश एक्सपोर्ट्स भारत के भीतर और अंतरराष्ट्रीय खुदरा व्यापार में सोने के आभूषणों के निर्माण, थोक आपूर्ति और अत्याधुनिक गोल्ड रिफाइनिंग (स्वर्ण शोधन) के क्षेत्र का एक बहुत ही बड़ा और स्थापित नाम है। हालांकि पिछले कुछ तिमाहियों के दौरान कंपनी के आंतरिक लेखांकन (अकाउंटिंग), कथित वित्तीय हेराफेरी और बाजार नियामक सेबी (SEBI) के साथ चल रहे कुछ नियामकीय विवादों की कड़वी खबरें मीडिया में लगातार सुर्खियां बन रही हैं। इन संवेदनशील और कानूनी मुद्दों के बीच ही बाजार में एलआईसी की इस बड़ी हिस्सेदारी के औचित्य को लेकर यह अफवाह बहुत तेजी से फैली थी कि कहीं प्रमोटर ग्रुप ने कंपनी के खराब दौर की भनक लगते ही अपनी खुद की व्यक्तिगत हिस्सेदारी को इस सरकारी बीमा दिग्गज के गले तो नहीं मढ़ दिया है; चेयरमैन राजेश मेहता के इस ताजा और आधिकारिक बयान ने इन सभी बाजारू अफवाहों और आशंकाओं पर पूरी कड़ाई से पूर्ण विराम लगाने का काम किया है और उन्होंने दोहराया है कि बीमा कंपनी का निवेश पूरी तरह से सेकेंडरी मार्केट के उतार-चढ़ाव से संचालित हुआ है जिससे कंपनी के चालू खाता पूंजी ढांचे को कोई प्रत्यक्ष लाभ या बाहरी नुकसान नहीं पहुंचा है।

शेयर बाजार में गिरावट का दौर: वर्तमान नियामकीय दबाव के बीच छोटे निवेशकों की रणनीति

राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर की कीमतों में हाल के दिनों में आई इस अप्रत्याशित और कड़क गिरावट के कारण बड़े पैमाने पर देश के छोटे और खुदरा निवेशक बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिनका निवेश फंसा हुआ है। हालांकि चेयरमैन मेहता का यह नया बयान कॉरपोरेट पारदर्शिता और मैनेजमेंट की विश्वसनीयता पर निवेशकों का खोया हुआ भरोसा वापस जगाने की दिशा में एक बहुत ही सकारात्मक कदम साबित हो सकता है। भारतीय शेयर बाजार के बड़े विशेषज्ञों और रिसर्च एनालिस्ट्स का इस पर साफ तौर पर कहना है कि एलआईसी जैसी देश की सबसे बड़ी और भरोसेमंद संस्थागत निवेशक (DII) का किसी कंपनी के शेयर होल्डिंग पैटर्न में बने रहना आमतौर पर एक बहुत ही मजबूत और सकारात्मक दीर्घकालिक संकेत माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद कंपनी पर वर्तमान समय में सेबी और अन्य ऑडिटिंग एजेंसियों द्वारा बनाए गए कड़े नियामकीय दबाव को देखते हुए नए खरीदारों को कोई भी नया दांव खेलने से पहले अत्यधिक सतर्कता और सावधानी बरतनी चाहिए; अतः छोटे निवेशकों को यह कस्टमाइज्ड सलाह दी जाती है कि वे कंपनी के आगामी तिमाही वित्तीय परिणामों, सेबी की आंतरिक जांच रिपोर्ट की प्रोग्रेस और डेली चार्ट्स पर वॉल्यूम की गतिविधियों पर अपनी पैनी नजर कड़ाई से बनाए रखें क्योंकि सोने के वैश्विक व्यापार की मजबूत बुनियादी नींव होने के बावजूद वर्तमान शॉर्ट-टर्म रिस्क को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

गोल्ड इंडस्ट्री की संप्रभुता, संस्थागत विश्वास और दीर्घकालिक निवेशकों के लिए कड़क सलाह

यदि हम भारतीय रत्न और आभूषण निर्यात क्षेत्र का फॉरेंसिक विश्लेषण करें, तो राजेश एक्सपोर्ट्स भारत की प्रमुख शीर्ष गोल्ड रिफाइनिंग कंपनियों और आभूषण निर्यात के सांख्यिकीय सूचकांकों में एक बहुत बड़ा और संप्रभु स्थान रखती है, जिसका खुदरा और थोक व्यापारिक नेटवर्क भारत से लेकर दुबई और यूरोपीय देशों के वैश्विक बाजारों तक पूरी मजबूती से फैला हुआ है और यह भारतीय अर्थव्यवस्था के कुल निर्यात सूचकांक में सोने के व्यापार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा संभालती है। इस लिहाज से एलआईसी का इस कंपनी में एक दशक से ज्यादा समय तक बने रहना इस क्षेत्र की दीर्घकालिक औद्योगिक क्षमता में संस्थागत विश्वास (Institutional Trust) को प्रामाणिक रूप से प्रमाणित करता है, लेकिन इसके बावजूद हालिया विवादों और कॉरपोरेट साख पर लगे आंशिक बट्टों ने कंपनी की पब्लिक इमेज को बाजार में थोड़ा बहुत प्रभावित जरूर किया है जिसके चलते चेयरमैन मेहता ने अपनी बात में आम भारतीयों के आर्थिक कल्याण की बात को बहुत चतुराई से जोड़कर कंपनी को जनता के पक्ष में खड़ा करने की कूटनीतिक कोशिश की है; बाजार विश्लेषकों का मानना है कि चूंकि अभी तक खुद एलआईसी के फंड प्रबंधकों ने इस हिस्सेदारी को बढ़ाने या घटाने को लेकर कोई आधिकारिक रुख या डिजिटल स्टेटमेंट लाइव नहीं किया है, इसलिए अगले कुछ ट्रेडिंग सेशन्स के दौरान इस शेयर में तेज खुदरा उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिल सकता है जिसके चलते निवेशकों को केवल डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाकर ही निवेश के अवसर तलाशने चाहिए।

निष्कर्ष

समग्र रूप से देखा जाए तो भारतीय जीवन (Rajesh Exports) बीमा निगम (LIC) द्वारा राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के शेयरों को खुले और द्वितीयक बाजार से क्रमिक रूप से खरीदने के ऐतिहासिक सच और उस पर खुद कंपनी के चेयरमैन राजेश मेहता द्वारा दिए गए विनियामक स्पष्टीकरण से वित्तीय बाजार और आम शेयरधारकों के बीच फैली भ्रम की स्थिति में काफी हद तक विधिक स्पष्टता आ गई है। प्रमोटर समूह द्वारा अपनी व्यक्तिगत हिस्सेदारी को पूरी कड़ाई से सुरक्षित रखने और तेल विपणन कंपनियों या किसी अन्य बाहरी सौदे की भूमिका न होने का यह दावा कंपनी की कॉरपोरेट छवि को राष्ट्रीय स्तर पर सुधारने में काफी मददगार साबित होगा। लेकिन इसके बावजूद खुदरा बाजार और सेबी के विनियामक जांच के कड़े दौर को देखते हुए सभी आम और बड़े संस्थागत हितधारकों को जल्दबाजी में पैनिक डिसीजन लेने की बजाय पूरी तरह से सूचित और पारदर्शी तथ्यों के आधार पर ही आगे बढ़ना चाहिए; राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर के पल-पल बदलते लाइव भावों, सेबी के अंतिम अदालती आदेशों और एलआईसी के आधिकारिक शेयरहोल्डिंग डिस्क्लोजर्स की प्रामाणिक व लाइव जानकारी प्राप्त करने के लिए नियमित रूप से केवल बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE), नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और तेल विपणन कंपनियों के आधिकारिक डिजिटल पोर्टल्स के रेगुलर अपडेट्स पर ही अपनी पैनी नजर बनाए रखें।

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