ITR Filing: इस साल आईटीआर भरने से पहले देख लें ये 5 बड़े बदलाव, जरा सी गलती पर आ सकता है आयकर विभाग का नोटिस

ITR Filing: बैंक क्लोजिंग बैलेंस और डूबे किराए की रिपोर्टिंग हुई अनिवार्य; जरा सी चूक पर आ सकता है टैक्स नोटिस।

0

ITR Filing: आयकर रिटर्न (Income Tax Return) दाखिल करने वाले करदाताओं के लिए यह खबर बेहद जरूरी है। इस साल सरकार ने टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अगर आप भी इस साल अपना आईटीआर (ITR) भरने जा रहे हैं, तो इन नए नियमों को अच्छी तरह समझ लें। नियमों की जानकारी न होने पर आईटीआर फॉर्म भरते समय बड़ी गलती हो सकती है। ऐसी स्थिति में आपका रिटर्न खारिज हो सकता है या फिर आयकर विभाग (Income Tax Department) आपको सीधे टैक्स नोटिस भेज सकता है।

टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस साल हुए बदलावों से टैक्स फाइलिंग का मूल तरीका भले ही न बदला हो, लेकिन करदाताओं को फॉर्म भरते समय पहले के मुकाबले ज्यादा सावधानी बरतनी होगी। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस साल आईटीआर फॉर्म में कौन से 5 बड़े बदलाव किए गए हैं और आपको नोटिस से बचने के लिए क्या करना होगा।

1. ITR Filing: दो घरों से होने वाली कमाई की दे सकेंगे जानकारी

इस साल उन करदाताओं को सरकार ने बहुत बड़ी राहत दी है जिनके पास एक से अधिक घर हैं। पहले के नियमों के अनुसार, जिन नौकरीपेशा लोगों के पास एक से ज्यादा घर थे और वे दूसरे घर से किराया कमाते थे, उन्हें जानकारी देने के लिए सीमित विकल्प मिलते थे।

अब नए नियमों के तहत, सैलरी पाने वाले लोग जो ITR-1 (सहज) फॉर्म भरते हैं और छोटे कारोबारी या प्रोफेशनल्स जो ITR-4 (सुगम) फॉर्म का इस्तेमाल करते हैं, वे अपने दो अलग-अलग घरों से होने वाली कमाई या नुकसान की पूरी जानकारी सीधे इन फॉर्म में दे सकते हैं। इस बदलाव से मध्यम वर्ग के उन करदाताओं को बड़ी राहत मिलेगी जो एक से अधिक संपत्ति के मालिक हैं।

2. कैपिटल गेन्स टैक्स की पुरानी उलझनें हुईं खत्म

अगर पिछले साल जमीन, मकान या शेयर बाजार से हुए मुनाफे यानी कैपिटल गेन्स (Capital Gains) की रिपोर्टिंग करते समय आप उलझन में पड़ गए थे, तो इस साल आपके लिए प्रक्रिया को आसान बना दिया गया है।

आकलन वर्ष (Assessment Year) 2025–26 में, बजट में हुए संशोधनों के कारण करदाताओं को 23 जुलाई 2024 से पहले और उसके बाद हुए लेन-देन की अलग-अलग रिपोर्टिंग करनी पड़ रही थी, क्योंकि दोनों अवधियों के लिए शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स की टैक्स दरें अलग थीं।

लेकिन वर्तमान आकलन वर्ष AY 2026–27 के लिए, आयकर विभाग ने आईटीआर फॉर्म से उन पुराने और उलझाने वाले कॉलम को पूरी तरह हटा दिया है। चूंकि अब पूरे वित्त वर्ष में एक ही टैक्स ढांचा लागू है, इसलिए करदाताओं को अब तारीखों के आधार पर अपने लेन-देन को अलग-अलग बांटने की जरूरत नहीं होगी।

3. न मिल पाए किराए की देनी होगी अलग जानकारी

मकान मालिकों और किराए से कमाई करने वाले करदाताओं के लिए भी एक नया नियम जोड़ा गया है। अब अगर आपका कोई किराएदार बिना किराया दिए चला गया है या आपको तय किराया वसूल नहीं हो पाया है, तो उसकी स्पष्ट जानकारी देनी होगी।

आयकर विभाग ने ITR-1 और ITR-4 समेत अन्य सभी प्रमुख आईटीआर फॉर्म में ‘वसूल नहीं हो पाया किराया’ (Unrealized Rent) नाम का एक नया और अलग कॉलम (Field) जोड़ दिया है। इससे पहले टैक्सपेयर्स के पास ऐसे डूबे हुए किराए की जानकारी अलग से दर्ज करने की कोई जगह नहीं होती थी। सरकार का मकसद इस बदलाव के जरिए किराए से होने वाली आमदनी की रिपोर्टिंग को ज्यादा पारदर्शी और विस्तृत बनाना है।

4. बैंक खातों का क्लोजिंग बैलेंस बताना हुआ अनिवार्य (Closing Bank Balance in ITR-4)

प्रिजम्पटिव टैक्सेशन स्कीम (अनुमानित कर योजना) का लाभ उठाने वाले और ITR-4 भरने वाले छोटे व्यापारियों और प्रोफेशनल्स के लिए एक बड़ा सख्त नियम लागू किया गया है। आयकर अधिनियम की धारा 44AD, 44ADA और 44AE के तहत टैक्स भरने वाले लोगों को अब अपनी अतिरिक्त वित्तीय जानकारी साझा करनी होगी।

इन करदाताओं को अब 31 मार्च 2026 तक अपने सभी चालू और सक्रिय बैंक खातों (Active Bank Accounts) में मौजूद कुल क्लोजिंग बैलेंस (अंतिम जमा राशि) की सटीक जानकारी देनी होगी। यह जानकारी आईटीआर-4 फॉर्म के फील्ड E21 में भरनी अनिवार्य है। टैक्स एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि बैंक बैलेंस की जानकारी छुपाने या गलत डेटा देने पर भारी पेनल्टी लग सकती है और आयकर विभाग का स्क्रूटनी नोटिस आ सकता है।

5. सही ITR फॉर्म का चुनाव करना सबसे जरूरी (Selection of Correct ITR Form)

टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय हमेशा से ही सही फॉर्म चुनना जरूरी रहा है, लेकिन इस साल यह कदम और भी ज्यादा संवेदनशील हो चुका है। यदि आपकी कमाई के एक से अधिक साधन हैं, तो आपको बहुत सोच-समझकर फॉर्म चुनना होगा। उदाहरण के लिए:

  • सैलरी (Salary) के साथ-साथ फ्रीलांसिंग या बिजनेस से कमाई।
  • मकान के किराए के साथ शेयर ट्रेडिंग या म्यूचुअल फंड से कैपिटल गेन्स।

अगर आप अपनी कमाई के अनुसार गलत आईटीआर फॉर्म का चुनाव कर लेते हैं, तो आयकर विभाग आपके रिटर्न को ‘डिफेक्टिव रिटर्न’ (Defective Return) मानकर नोटिस भेज सकता है। इसके कारण आपका टैक्स रिफंड अटक सकता है, टैक्स की गणना गलत हो सकती है और आपको बिजनेस घाटे को अगले साल कैरी फॉरवर्ड (आगे ले जाने) का कानूनी फायदा भी नहीं मिलेगा।

रिटर्न फाइल करने से पहले करदाता तुरंत करें ये काम

हालांकि आयकर विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आईटीआर फाइलिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन अधिकांश नौकरीपेशा कर्मचारियों को कंपनियों की तरफ से अभी तक फॉर्म 16 (Form 16) नहीं मिला है।

टैक्स विशेषज्ञों की सलाह है कि जब तक आपको फॉर्म 16 नहीं मिल जाता, तब तक आपको शांत बैठने के बजाय इस समय का सदुपयोग करना चाहिए। नोटिस से बचने के लिए करदाता तुरंत ये तैयारियां पूरी कर लें:

  • अपने सभी बैंक खातों का सालभर का बैंक स्टेटमेंट निकालकर जांच लें।
  • टैक्स छूट का दावा करने के लिए निवेश के सभी जरूरी दस्तावेज और सबूत (जैसे एलआईसी, पीपीएफ, होम लोन सर्टिफिकेट) इकट्ठा कर लें।
  • अपने AIS (Annual Information Statement) और 26AS फॉर्म को डाउनलोड करके देख लें कि कहीं कोई विसंगति तो नहीं है।
  • अपनी कुल आय के स्रोतों का आकलन करके पहले ही तय कर लें कि आप पर कौन सा आईटीआर फॉर्म लागू होता है।

ITR Filing: सावधानी ही टैक्स नोटिस से बचाएगी

इस साल टैक्स रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को जहां एक तरफ सुगम बनाने का प्रयास किया गया है, वहीं दूसरी तरफ पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नए कॉलम भी जोड़े गए हैं। करदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना अपने दस्तावेजों को व्यवस्थित करें। आईटीआर फॉर्म भरते समय प्रत्येक कॉलम को ध्यान से पढ़ें और अपने बैंक स्टेटमेंट से मिलान करने के बाद ही फाइनल सबमिशन करें, ताकि आयकर विभाग की किसी भी दंडात्मक कार्रवाई या नोटिस से बचा जा सके।

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.