Heart Attack Risk: भीषण गर्मी और डिहाइड्रेशन बन रहे हैं हार्ट अटैक का बड़ा कारण! डॉक्टरों ने दी चेतावनी, जानें हीटवेव में दिल को कैसे रखें सुरक्षित
डिहाइड्रेशन और हीटवेव से बढ़ रहा हार्ट स्ट्रेस, डॉक्टरों ने दी सतर्क रहने की सलाह
Heart Attack Risk: इस साल गर्मी ने देशभर में कहर बरपाया हुआ है। दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश समेत देश के अनेक हिस्सों में तापमान 44 से 46 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है। इस झुलसाती धूप और तपती लू के बीच अस्पतालों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि गर्मी का सीधा और गंभीर असर दिल पर पड़ रहा है। हार्ट स्ट्रेस, तेज धड़कन, लो ब्लड प्रेशर और सीने में घबराहट जैसी शिकायतें इन दिनों कार्डियोलॉजी विभागों में तेजी से बढ़ रही हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह है शरीर में होने वाली पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन।
Heart Attack Risk: गर्मी और दिल का सीधा रिश्ता, समझें पूरा विज्ञान
जब बाहर का तापमान बढ़ता है तो शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए पसीना बहाने लगता है। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन इस दौरान शरीर से पानी और जरूरी खनिज लवण यानी इलेक्ट्रोलाइट्स तेज रफ्तार से बाहर निकल जाते हैं। फरीदाबाद स्थित एशियन हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभाग के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. एल.के. झा के अनुसार जब समय पर पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ नहीं लिए जाते तो डिहाइड्रेशन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और इसका सबसे गहरा असर हृदय और रक्त संचार पर पड़ता है। उनका कहना है कि जब खून में पानी की मात्रा कम हो जाती है तो रक्त गाढ़ा होने लगता है और हार्ट को उसे पंप करने के लिए बहुत अधिक ऊर्जा लगानी पड़ती है। यही बढ़ा हुआ दबाव हार्ट स्ट्रेस के रूप में सामने आता है, जो अगर नजरअंदाज किया जाए तो हार्ट अटैक तक की नौबत आ सकती है।
डिहाइड्रेशन से कैसे प्रभावित होता है ब्लड प्रेशर और हृदय की कार्यप्रणाली?
शरीर में जब तरल पदार्थ की कमी होती है तो ब्लड वॉल्यूम घट जाता है। ब्लड वॉल्यूम कम होने से रक्तचाप तेजी से गिरने लगता है और शरीर के विभिन्न अंगों तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए दिल को सामान्य से बहुत तेज गति से काम करना पड़ता है। हृदय की इस असामान्य और अतिरिक्त मेहनत के कारण ही लोगों को तेज धड़कन, कमजोरी, चक्कर आना और बेचैनी जैसे लक्षण महसूस होने लगते हैं। इतना ही नहीं, रक्त के गाढ़े होने से उसमें थक्के जमने का खतरा भी बढ़ जाता है, जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक दोनों के लिए एक प्रमुख जोखिम कारक है। विशेषज्ञ बताते हैं कि गर्मियों में इसीलिए हार्ट संबंधी इमरजेंसी के मामले अचानक बढ़ जाते हैं क्योंकि लोग पसीने से होने वाले नुकसान की भरपाई समय पर नहीं करते।
Heart Attack Risk: किन लोगों को है सबसे अधिक खतरा, जानें डॉक्टरों की राय
हर व्यक्ति पर गर्मी का असर एक जैसा नहीं होता। कुछ लोगों का शरीर अत्यधिक ताप और डिहाइड्रेशन के प्रति कहीं ज्यादा संवेदनशील होता है और उनके लिए यह स्थिति जानलेवा भी बन सकती है। बुजुर्गों में शरीर की प्यास महसूस करने की क्षमता उम्र के साथ कम हो जाती है, जिससे वे पानी पीना भूल जाते हैं और डिहाइड्रेशन की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। जिन लोगों को पहले से हृदय रोग है, उनका दिल पहले से ही सामान्य से ज्यादा मेहनत कर रहा होता है, ऐसे में गर्मी का अतिरिक्त बोझ उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
उच्च रक्तचाप और मधुमेह के मरीजों की रक्त वाहिकाएं पहले से ही कमजोर होती हैं और गर्मी के दौरान उन पर दबाव और बढ़ जाता है। इसके अलावा तेज धूप में लंबे समय तक काम करने वाले मजदूर और शारीरिक श्रमिक भी इस खतरे के दायरे में आते हैं क्योंकि वे पसीना सबसे ज्यादा बहाते हैं और अक्सर पर्याप्त पानी नहीं पी पाते। इसके साथ ही ज्यादा पसीना आने की प्रवृत्ति वाले लोगों को भी इस मौसम में विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत है।
इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज, तुरंत लें डॉक्टरी मदद
गर्मियों में हार्ट स्ट्रेस के शुरुआती संकेतों को अक्सर लोग मामूली थकान या कमजोरी समझकर टाल देते हैं। यही लापरवाही बाद में भारी पड़ सकती है। हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी को अचानक बहुत ज्यादा थकान महसूस हो, सांस लेने में तकलीफ हो, धड़कन असामान्य रूप से तेज हो जाए, सीने में भारीपन या बेचैनी हो, चक्कर आएं या बेहोशी जैसा लगे, तो इन्हें किसी भी हालत में सामान्य न मानें। विशेष रूप से जिन लोगों को पहले से हृदय की कोई बीमारी है, उन्हें इनमें से कोई भी लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। लो ब्लड प्रेशर के साथ अगर शरीर ठंडा और कूटनीतिक रूप से चिपचिपा लगे तो यह हीट स्ट्रोक का संकेत हो सकता है, जो एक गंभीर चिकित्सकीय आपातस्थिति है।
गर्मियों में दिल को सुरक्षित रखने के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय
हृदय को गर्मी के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए सबसे पहली और सबसे जरूरी बात यह है कि पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी पिया जाए। डॉक्टरों के अनुसार एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति को गर्मियों में रोजाना कम से कम तीन से चार लीटर पानी जरूर पीना चाहिए। केवल सादे पानी पर निर्भर न रहें, बल्कि नारियल पानी, ओआरएस, नींबू पानी और छाछ जैसे तरल पदार्थ भी नियमित रूप से लें। ये पेय न केवल पानी की पूर्ति करते हैं बल्कि पसीने के साथ बाहर निकले जरूरी खनिज लवणों की भरपाई भी करते हैं।
दोपहर के 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच का वक्त सबसे खतरनाक होता है क्योंकि इस दौरान सूर्य की तीव्रता और तापमान दोनों अपने चरम पर होते हैं। इस समय अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और अगर निकलना जरूरी हो तो सिर ढककर जाएं और पानी की बोतल हमेशा साथ रखें। हल्के और ढीले कपड़े पहनें ताकि शरीर को हवा मिलती रहे। इसके अलावा खाली पेट बाहर निकलने से भी पूरी तरह बचें क्योंकि खाली पेट में शरीर गर्मी को और तेजी से अवशोषित करता है।
Heart Attack Risk: हार्ट मरीजों के लिए विशेष सावधानियां, इन बातों का रखें खास ध्यान
जिन लोगों को पहले से हार्ट, ब्लड प्रेशर या डायबिटीज की बीमारी है, उनके लिए यह मौसम और भी सतर्कता की मांग करता है। ऐसे लोगों को अपनी दवाओं का समय पर सेवन जारी रखना चाहिए और अपने डॉक्टर से गर्मियों में दवाओं की मात्रा या समय में किसी बदलाव की जरूरत के बारे में सलाह जरूर लेनी चाहिए। कुछ रक्तचाप की दवाएं और मूत्रवर्धक दवाएं गर्मियों में शरीर से पानी और नमक की निकासी को बढ़ा देती हैं, इसलिए डॉक्टर की कूटनीतिक निगरानी में रहना और भी जरूरी हो जाता है। हार्ट मरीजों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि वे अचानक बहुत ठंडे पानी से नहाने या ठंडे कमरे से एकदम गर्म जगह में जाने से बचें क्योंकि तापमान में यह अचानक बदलाव रक्त वाहिकाओं पर प्रतिकूल असर डाल सकता है।
हीटवेव में हाइड्रेशन ही है सबसे बड़ा बचाव, विशेषज्ञों की स्पष्ट सलाह
डॉ. एल.के. झा इस बात पर जोर देते हैं कि हीटवेव के दौरान शरीर को हर हाल में हाइड्रेट रखना केवल एक सामान्य सलाह नहीं, बल्कि हृदय की सुरक्षा के लिए एक अनिवार्य उपाय है। समय पर पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई करने से दिल पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उनका यह भी कहना है कि बहुत से लोग प्यास न लगने पर पानी नहीं पीते, यह गलतफहमी बड़ी खतरनाक है। गर्मियों में प्यास की प्रतीक्षा करने से पहले ही पानी पीने की आदत डालनी चाहिए, खासकर बुजुर्गों को जिनमें प्यास की अनुभूति स्वाभाविक रूप से कम हो जाती है।
इस भीषण गर्मी के मौसम में अपने और अपने परिवार के दिल का ख्याल रखें। छोटी-सी लापरवाही बड़ी मुसीबत बन सकती है, इसलिए सतर्क रहें, हाइड्रेटेड रहें और किसी भी असामान्य लक्षण के दिखते ही तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
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