El Nino Impact India Rainfall: मानसून पर एल नीनो का गहरा असर, जून में बारिश की भारी कमी से देश भर में बढ़ी चिंता

El Nino Impact India Rainfall: जून में बारिश की भारी कमी, एल नीनो के असर से बढ़ी चिंता

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El Nino Impact India Rainfall: भारत में इस बार मानसून का महीना उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है। प्रशांत महासागर में सक्रिय एल नीनो के कारण जून का महीना पिछले 100 वर्षों के इतिहास में तीसरा सबसे सूखा महीना साबित हुआ है। देश भर में सामान्य से 42 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे किसानों और आम लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। जून के अंत तक औसत बारिश का आंकड़ा 157.7 मिमी होना चाहिए था, लेकिन अब तक यह बमुश्किल 92.2 मिमी तक ही पहुंच पाया है। मौसम की यह बेरुखी न केवल कृषि पर बल्कि जल संकट के रूप में भी भविष्य के लिए चुनौती बन रही है।

शहरों की सड़कों पर झुलसा देने वाली गर्मी और खेतों में नमी की कमी के बीच यह आंकड़े देश के बदलते मौसम चक्र की कहानी कह रहे हैं। बीते कुछ दिनों से मानसून की सुस्त रफ्तार ने प्रशासन को भी सतर्क कर दिया है। यदि आज महीने के आखिरी दिन अच्छी बारिश भी हो जाती है, तब भी यह कमी पूरी होना नामुमकिन है। पिछले 100 सालों के आंकड़ों को देखें तो केवल वर्ष 2009 और 2014 ऐसे साल रहे हैं, जब जून के महीने में इससे भी कम बारिश दर्ज की गई थी। इस बार की स्थिति उन वर्षों की कतार में खड़ी हो गई है।

El Nino Impact India Rainfall: मानसून में कहां और कितनी रही कमी?

बारिश की यह कमी देश के किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरा भारत इसकी चपेट में है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति मध्य भारत की है, जहां बारिश में 54 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। यह इलाका देश का प्रमुख कृषि क्षेत्र है, जहां धान और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई के लिए पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। इसके अलावा पूर्वी और उत्तरपूर्वी भारत में 41 प्रतिशत, उत्तर पश्चिमी भारत में 30 प्रतिशत और दक्षिण भारत में 28 प्रतिशत बारिश कम हुई है।

दैनिक आधार पर भी मानसून की स्थिति निराशाजनक रही है। जून के पूरे महीने में केवल एक ही दिन ऐसा आया जब देश भर में बारिश का आंकड़ा सामान्य से अधिक दर्ज किया गया। मानसून 4 जून को केरल के तट पर पहुंचा तो था, लेकिन उसके बाद वह आगे बढ़ने में काफी सुस्त रहा। उत्तर भारत के राज्यों में अभी भी उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर रही है और किसान बादलों की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं।

क्या है एल नीनो का असर?

एल नीनो एक ऐसी प्राकृतिक घटना है जो प्रशांत महासागर के पानी को गर्म कर देती है। इसका सीधा असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ता है। जब प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म होता है, तो हवाओं का रुख बदल जाता है, जो भारतीय मानसून के लिए अनुकूल नहीं होता। इंटरनेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट एंड सोसाइटी के अनुसार, इस साल एल नीनो मध्यम तीव्रता के करीब है और इसके आने वाले महीनों में और अधिक मजबूत होने की आशंका है।

हवाओं का यह बदला हुआ रुख भारतीय उपमहाद्वीप में नमी लाने वाले बादलों को रोक देता है, जिससे मानसून की सक्रियता कम हो जाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि एल नीनो का प्रभाव इस बार मानसून के आने के साथ ही शुरू हो गया था, जो बारिश में आई भारी कमी के रूप में स्पष्ट दिख रहा है। यह समुद्री हलचल न केवल बारिश को प्रभावित करती है, बल्कि तापमान में भी असामान्य वृद्धि का मुख्य कारण बनती है।

El Nino Impact India Rainfall, राहत की उम्मीद: जुलाई में कैसा रहेगा मौसम?

जून की निराशा के बाद अब सबकी नजरें जुलाई के पहले हफ्ते पर टिकी हैं। भारतीय मौसम विभाग का अनुमान है कि जुलाई की शुरुआत के साथ ही मानसून अपनी खोई हुई रफ्तार को फिर से पा सकता है। मध्य भारत सहित देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दायरा बढ़ने की उम्मीद है। विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में बादलों का दबाव बढ़ेगा और देश के कई हिस्सों में झमाझम बारिश होने के आसार हैं।

हालांकि, चुनौती यह है कि अगर जुलाई में बारिश सामान्य रहती है, तो भी जून की कमी की भरपाई करना आसान नहीं होगा। फसलों की बुवाई का चक्र पहले ही पीछे हो चुका है, जिसका असर भविष्य में पैदावार पर पड़ सकता है। प्रशासन और कृषि विभाग अब उन क्षेत्रों पर नजर रखे हुए हैं जहां सूखे जैसे हालात बन सकते हैं। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन पर लगातार नजर रखें।

El Nino Impact India Rainfall: क्या आने वाला समय और कठिन होगा?

मौसम की यह अनिश्चितता केवल एक साल की बात नहीं है, बल्कि यह जलवायु में हो रहे बड़े बदलावों का संकेत है। पिछले 20 सालों में यह तीसरा ऐसा मौका है जब मानसून की शुरुआत इतनी कमजोर रही है। यह दिखाता है कि एल नीनो जैसी घटनाएं अब अधिक आवृत्ति के साथ हो रही हैं। देश की एक बड़ी आबादी आज भी कृषि के लिए सीधे तौर पर मानसून पर निर्भर है। यदि बारिश का चक्र इसी तरह प्रभावित होता रहा, तो जल प्रबंधन और कृषि की नीतियों को बदलना होगा।

फिलहाल, पूरा देश राहत की पहली अच्छी बारिश का इंतजार कर रहा है। आने वाले सप्ताह में बादलों की सक्रियता से यह तय होगा कि भारत का मानसून अपनी पूरी क्षमता के साथ लौट पाएगा या इस साल भी हमें कम बारिश के प्रभाव का सामना करना पड़ेगा। उम्मीद है कि जुलाई का महीना न केवल खेतों के लिए खुशहाली लाएगा, बल्कि आम जनता को चिलचिलाती गर्मी से राहत भी दिलाएगा। प्रकृति का यह मिजाज अब इस बात पर निर्भर करता है कि आने वाले दिनों में मानसून की हवाएं कितनी ताकत के साथ देश में प्रवेश करती हैं।

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