ED raids: दिल्ली-NCR में ED की बड़ी कार्रवाई, सबवेंशन स्कीम के नाम पर होम बायर्स से कथित ठगी के मामले में दो बिल्डरों के ठिकानों पर छापेमारी

सबवेंशन स्कीम के नाम पर होम बायर्स से कथित ठगी मामले में ED की बड़ी कार्रवाई

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ED raids:  दिल्ली-एनसीआर में घर खरीदने का सपना देखने वाले हजारों परिवारों के साथ कथित धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने दिल्ली-एनसीआर स्थित कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। यह कार्रवाई एवीजे डेवलपर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड और रुद्रा बिल्डवेल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत हुई है।
दोनों कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने ‘नो ईएमआई टिल पजेशन’ यानी फ्लैट का कब्जा मिलने तक कोई किस्त न चुकाने जैसी आकर्षक सबवेंशन स्कीम का लालच देकर होम बायर्स से बुकिंग कराई। हालांकि, सालों बीत जाने के बाद भी खरीदारों को उनके घर नहीं मिले और बैंक लोन का भारी बोझ उनके सिर पर बना रहा।

ED raids: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शुरू हुई सीबीआई जांच

इस पूरे मामले की जड़ सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण आदेश से जुड़ी हुई है। अप्रैल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डर-बैंक गठजोड़ की जांच के कड़े निर्देश दिए थे। अदालत ने अनुचित गठजोड़ की ओर इशारा करते हुए सीबीआई को कई विवादित प्रोजेक्ट्स में जांच करने को कहा था। इसके अनुपालन में सीबीआई ने जुलाई 2025 में एवीजे डेवलपर्स और रुद्रा बिल्डवेल से जुड़ी कई प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थीं।
सीबीआई की इन एफआईआर के आधार पर ही ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि होम बायर्स और बैंकों से जुटाए गए करोड़ों रुपये का इस्तेमाल कहां हुआ, क्या पैसा परियोजनाओं में लगाया गया या अन्य जगहों पर डायवर्ट कर दिया गया।

सबवेंशन स्कीम कैसे बनी ठगी का हथियार

सबवेंशन स्कीम होम लोन की एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें बिल्डर या डेवलपर शुरुआती वर्षों में प्री-ईएमआई का भुगतान खुद करता है और खरीदार को कब्जा मिलने तक कोई किस्त नहीं चुकानी पड़ती। इस आकर्षण में दिल्ली-एनसीआर के कई मध्यमवर्गीय परिवार फंस गए। उन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा डाउन पेमेंट के रूप में दिया और बाकी रकम बैंक से लोन लेकर चुकाई।
आरोप है कि दोनों कंपनियों ने इस स्कीम का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर बुकिंग कराई। रुद्रा बिल्डवेल के नोएडा सेक्टर-16 स्थित ‘केबीनोज़ अपार्टमेंट्स’ प्रोजेक्ट और एवीजे डेवलपर्स के ग्रेटर नोएडा स्थित ‘एवीजे हाइट्स’ प्रोजेक्ट में सैकड़ों फ्लैट बेचे गए। जांच में सामने आया कि कुछ फ्लैट पहले से बेचे जा चुके थे और उन्हें दोबारा बेच दिया गया। जब परियोजनाएं अधूरी रहीं, तो बिल्डरों ने प्री-ईएमआई का भुगतान रोक दिया, जिसके बाद बैंकों ने खरीदारों पर ईएमआई का दबाव बनाना शुरू कर दिया।

बिल्डर-बैंक नेक्सस पर ईडी का फोकस

ईडी की जांच सिर्फ बिल्डरों तक सीमित नहीं है, बल्कि एजेंसी पूरे बिल्डर-बैंक गठजोड़ की पड़ताल कर रही है। आरोप है कि कुछ बैंक अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी कर लोन स्वीकृत किए। कुछ मामलों में फर्जी या प्रॉक्सी खरीदारों के नाम पर भी लोन जारी होने के संकेत मिले हैं।
सीबीआई पहले ही एवीजे डेवलपर्स मामले में कुछ बैंक अधिकारियों और प्रॉक्सी बायर्स के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है, जिसमें बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक और यूको बैंक के अधिकारियों के नाम शामिल हैं। ईडी अब यह देख रही है कि होम बायर्स से जुटाए गए फंड्स को कहां ट्रांसफर किया गया। छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल सबूत जब्त किए गए हैं।

होम बायर्स की पीड़ा और कानूनी लड़ाई

दिल्ली-एनसीआर में सबवेंशन स्कीम के नाम पर हुई इस धोखाधड़ी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 1200 से ज्यादा होम बायर्स की याचिकाएं लंबित रही हैं। खरीदारों का कहना है कि बैंक उन्हें ईएमआई चुकाने के लिए मजबूर कर रहे हैं, जबकि प्रोजेक्ट्स अधूरे पड़े हैं और घर का कोई अता-पता नहीं है।
कई परिवारों ने बच्चों की शिक्षा और शादी के लिए जमा किया गया पैसा इस उम्मीद में लगा दिया था कि उन्हें समय पर घर मिलेगा। अब न घर है और न पैसा, ऊपर से बैंक संपत्ति जब्त करने की धमकियां दे रहे हैं।

ED raids: जांच एजेंसियों की कार्रवाई का महत्व और आगे की राह

ईडी की इस कार्रवाई को पीड़ित होम बायर्स के लिए उम्मीद की एक नई किरण माना जा रहा है। मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत ईडी बिल्डरों की संपत्तियों को अटैच कर सकती है। यदि फंड डायवर्जन साबित होता है, तो जब्त संपत्तियों के जरिए पीड़ितों को राहत दिलाने का प्रयास किया जा सकता है।
सबवेंशन स्कीम का दुरुपयोग कर आम लोगों को ठगने वाले बिल्डरों और बैंक अधिकारियों पर शिकंजा कसने से भविष्य में ऐसे अपराधों पर लगाम लगेगी। सुप्रीम कोर्ट की लगातार निगरानी के बीच ईडी और सीबीआई की इस संयुक्त कार्रवाई से दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता आने की संभावना जताई जा रही है।

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