DUSU चुनाव में ABVP की जीत पर Abhijeet Dipke का बड़ा बयान, बोले- ‘सिर्फ पैसा चलता है’
DUSU चुनाव में ABVP की जीत पर Abhijeet Dipke का बड़ा बयान, बोले- 'सिर्फ पैसा चलता है'
Abhijeet Dipke: दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन यानी डूसू चुनाव में भाजपा के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की शानदार जीत के बाद अब इस पर सियासी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी के मुखिया अभिजीत दीपके ने आखिरकार इस नतीजे पर अपनी चुप्पी तोड़ी और एबीवीपी की जीत को सीधे तौर पर धनबल से जोड़ने की कोशिश की। डीयू चुनाव में एबीवीपी ने अध्यक्ष पद सहित कुल तीन पदों पर जीत हासिल की, जबकि उपाध्यक्ष पद पर एक निर्दलीय उम्मीदवार ने कब्जा जमाया। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी से जुड़े छात्र संगठनों एनएसयूआई और एएसएपी के लिए यह चुनाव परिणाम बेहद निराशाजनक साबित हुआ। यह चुनाव इसलिए भी खास अहमियत रखता है क्योंकि नीट पेपर लीक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली में एक बड़ा जेन जी आंदोलन खड़ा किया था, जिसकी वजह से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसी पृष्ठभूमि में डीयू के इन नतीजों पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई थीं।
Abhijeet Dipke: डूसू चुनाव के नतीजे और सियासी अहमियत
दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ के इस चुनाव को कई मायनों में बेहद अहम माना जा रहा था, क्योंकि यह जेन जी आंदोलन के बाद पहला बड़ा चुनावी मुकाबला था, जिसमें उम्मीदवार और मतदाता दोनों इसी युवा पीढ़ी से जुड़े हुए थे। छात्र आंदोलनों के दौरान कथित बल प्रयोग की घटनाओं और दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने से हुई छात्रों की मौत जैसे संवेदनशील मुद्दों के बीच यह चुनाव एबीवीपी के लिए एक बड़ी परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा था। हालांकि जब अंतिम नतीजे सामने आए तो भाजपा खेमे में उत्साह का माहौल देखने को मिला। अध्यक्ष पद सहित तीन महत्वपूर्ण पदों पर मिली इस जीत के बाद भाजपा ने विपक्षी दलों और कॉकरोच जनता पार्टी पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि डीयू के नतीजों ने साफ कर दिया है कि युवा पीढ़ी किस दल के साथ खड़ी है।
विपक्ष का पक्ष और कॉकरोच जनता पार्टी की प्रतिक्रिया
एबीवीपी की इस जीत के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरभ दास ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था कि इस चुनाव में विपक्षी वोटों के बिखराव और कांग्रेस की तरफ से टिकट बंटवारे में हुई गड़बड़ियों का सीधा फायदा भाजपा को मिला है। यानी विपक्षी खेमे के भीतर ही एकजुटता की कमी को इस हार का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। इस बीच पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान इस विषय पर अपनी पहली विस्तृत प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने चुनावी नतीजों के पीछे की वजह को पूरी तरह आर्थिक ताकत से जोड़ने की कोशिश की।
अभिजीत दीपके ने क्यों कहा ‘सिर्फ पैसा चलता है’
पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए अभिजीत दीपके ने अपनी संक्षिप्त टिप्पणी में तीन बार दोहराया कि चुनावों में केवल और केवल पैसा ही निर्णायक भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि डीयू चुनाव में जो प्रचार अभियान चलता है, उसमें शामिल होने वाले उम्मीदवार रोल्स रॉयस जैसी महंगी गाड़ियों में पहुंचते हैं, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये से कम नहीं होती। इसके अलावा ऑडी और बीएमडब्ल्यू जैसी लग्जरी गाड़ियों का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। दीपके के इस बयान का मूल भाव यही था कि छात्र राजनीति में वैचारिक समर्थन से कहीं अधिक भूमिका आर्थिक संसाधनों की होती है, और यही वजह उन्होंने एबीवीपी की जीत के पीछे बताने की कोशिश की।
जेन जी आंदोलन और डूसू चुनाव का संबंध
गौरतलब है कि जून-जुलाई महीने में राजधानी दिल्ली में जेन जी वर्ग के मुद्दों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया था, जिसकी शुरुआत नीट पेपर लीक विवाद से हुई थी। इस आंदोलन का असर इतना व्यापक रहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके अलावा दिल्ली के साथ-साथ भाजपा शासित कई अन्य राज्यों में भी इसी तरह के प्रदर्शन देखने को मिले थे, जिन्हें युवा पीढ़ी के आक्रोश के तौर पर पेश किया गया। इसी पृष्ठभूमि में डीयू चुनाव को इस आंदोलन के बाद युवाओं के रुख की पहली बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा था, इसलिए इसके नतीजों पर राजनीतिक हलकों में विशेष रुचि बनी हुई थी।
भाजपा का पलटवार और आगे की राजनीति
डीयू चुनाव में मिली जीत के बाद भाजपा ने इसे युवा वर्ग के समर्थन के तौर पर प्रचारित करना शुरू कर दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जेन जी आंदोलन के दौरान जो नैरेटिव विपक्षी दलों ने गढ़ने की कोशिश की थी, डीयू के नतीजों ने उस नैरेटिव को पूरी तरह खारिज कर दिया है। दूसरी ओर कॉकरोच जनता पार्टी और अन्य विपक्षी संगठन इस हार के लिए आपसी गुटबाजी और संसाधनों की कमी को जिम्मेदार बता रहे हैं। अभिजीत दीपके का धनबल वाला बयान भी इसी राजनीतिक रस्साकशी का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके जरिए वे अपने समर्थकों को यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि हार वैचारिक कमजोरी की वजह से नहीं, बल्कि संसाधनों की असमानता के चलते हुई है।
डीयू छात्र संघ चुनाव के नतीजों ने न केवल भाजपा को एक बड़ी राजनीतिक बढ़त दी है, बल्कि विपक्षी खेमे के भीतर आत्ममंथन की स्थिति भी पैदा कर दी है। अभिजीत दीपके का पैसे को लेकर दिया गया बयान इस बात का संकेत है कि जेन जी आंदोलन के बाद बना राजनीतिक माहौल अब चुनावी नतीजों में उतनी आसानी से नहीं बदल पाया, जितनी उम्मीद विपक्षी दलों को थी। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विपक्ष अपनी रणनीति में बदलाव करता है या यही आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति आगे भी जारी रहती है।
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