FTA Impact Becomes Visible: FTA का असर दिखा, सिंगापुर-श्रीलंका को भारत का एक्सपोर्ट दोगुना, ASEAN में 61.6% बढ़ा
सिंगापुर को निर्यात 101.2% और श्रीलंका को 123.8% बढ़ा, ASEAN को भी बड़ा फायदा
FTA Impact Becomes Visible: भारत के विदेशी व्यापार परिदृश्य में चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अत्यंत उत्साहवर्धक और ठोस आंकड़े सामने आए हैं। भारत द्वारा विभिन्न देशों एवं क्षेत्रीय व्यापारिक समूहों के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौतों (Free Trade Agreements – FTAs) और व्यापक आर्थिक सहयोग समझौतों का सकारात्मक प्रभाव अब सीधे तौर पर निर्यात आंकड़ों में परिलक्षित होने लगा है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत के प्रमुख एफटीए साझेदार देशों को होने वाले वस्तु निर्यात में अभूतपूर्व उछाल दर्ज किया गया है।
विशेष रूप से दक्षिण-पूर्व एशियाई व्यापारिक केंद्र सिंगापुर और पड़ोसी देश श्रीलंका को किए जाने वाले भारतीय निर्यात में वार्षिक आधार पर शत-प्रतिशत से अधिक यानी दोगुने से भी ज्यादा का उछाल आया है। इसके साथ ही दस सदस्यीय आसियान (ASEAN) क्षेत्रीय समूह को किए जाने वाले कुल भारतीय निर्यात में 61 प्रतिशत से अधिक की जबर्दस्त वृद्धि देखी गई है। यह तीव्र विस्तार यह सिद्ध करता है कि भारतीय विनिर्माता और निर्यातक अब तरजीही बाजार पहुंच (Preferential Market Access) और शून्य अथवा रियायती सीमा शुल्क का लाभ उठाने में रणनीतिक रूप से कहीं अधिक सक्षम हो चुके हैं।
FTA Impact Becomes Visible: सिंगापुर को निर्यात में 101.2 प्रतिशत का उछाल
वाणिज्य मंत्रालय के तुलनात्मक विश्लेषण के अनुसार, पहली तिमाही के दौरान भारत के प्रमुख एफटीए साझेदारों में सिंगापुर का प्रदर्शन सर्वाधिक आकर्षक रहा है। अप्रैल-जून 2026 के दौरान भारत ने सिंगापुर को 6.52 अरब अमेरिकी डॉलर का माल निर्यात किया, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की समान अवधि में यह आंकड़ा 3.24 अरब अमेरिकी डॉलर था। इस प्रकार एक वर्ष के भीतर सिंगापुर को होने वाले निर्यात में 101.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है, जो मूल्य के आधार पर ठीक दोगुना से भी अधिक है।
सिंगापुर केवल एक स्वतंत्र उपभोक्ता बाजार नहीं है, बल्कि वह संपूर्ण एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए एक बड़ा समुद्री ट्रांसशिपमेंट और व्यापारिक पुनर्वितरण हब है। वहां भारतीय इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और फार्मास्यूटिकल्स के निर्यात में आई यह तेजी संपूर्ण दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजार में भारतीय उत्पादों की पैठ को दर्शाती है। उल्लेखनीय है कि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सिंगापुर को कुल वस्तु निर्यात 11.86 अरब डॉलर रहा था, जिसकी तुलना में पहली तिमाही के यह आंकड़े एक मजबूत वार्षिक वृद्धि का आधार तैयार कर रहे हैं।
श्रीलंका को एक्सपोर्ट में 123.8 प्रतिशत की ऐतिहासिक छलांग
दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र और द्विपक्षीय व्यापार ढांचे के अंतर्गत भारत और श्रीलंका के बीच आर्थिक सहयोग ने नए आयाम स्थापित किए हैं। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में श्रीलंका को होने वाला भारतीय वस्तु निर्यात 123.8 प्रतिशत की भारी वृद्धि के साथ 2.35 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। विगत वर्ष की समान तिमाही (अप्रैल-जून 2025) में यह आंकड़ा मात्र 1.05 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया था।
श्रीलंकाई अर्थव्यवस्था की पुनर्बहाली और वहां बुनियादी ढांचे के पुनरुत्थान के चलते भारत से सीमेंट, वस्त्र, कृषि उत्पाद, उर्वरक, ऑटोमोबाइल पुर्जों और जीवनरक्षक दवाओं की मांग में जोरदार तेजी आई है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान श्रीलंका को कुल भारतीय निर्यात 5.52 अरब डॉलर रहा था। पहली तिमाही में 2.35 अरब डॉलर का आंकड़ा छूने से यह संकेत मिलता है कि श्रीलंका अब भारत के शीर्ष विकासशील निर्यात गंतव्यों में अग्रिम पंक्ति में शामिल हो चुका है।
ASEAN क्षेत्र को 14.61 अरब डॉलर का निर्यात: 61.6 प्रतिशत की जबर्दस्त बढ़त
दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन (ASEAN) के साथ भारत के व्यापारिक संबंध नए शिखर पर पहुंच गए हैं। अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में आसियान देशों को भारत का वस्तु निर्यात 61.6 प्रतिशत की तीव्र संवृद्धि के साथ 14.61 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में भारत ने इस समूह को लगभग 9.04 अरब डॉलर का निर्यात किया था।
आसियान क्षेत्र के भीतर मलेशिया के बाजार में भी भारतीय निर्यातकों ने जोरदार बढ़त बनाई है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में मलेशिया को भारतीय निर्यात 75.2 प्रतिशत बढ़कर 2.54 अरब डॉलर हो गया, जो भारत-मलेशिया व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) के प्रभावी उपयोग को सिद्ध करता है। विगत पूर्ण वित्त वर्ष 2025-26 में आसियान देशों को भारत का कुल वस्तु निर्यात 38.42 अरब डॉलर रहा था, जिसमें अकेले मलेशिया की हिस्सेदारी 6.83 अरब डॉलर की थी। चालू वर्ष की पहली तिमाही की यह गति आसियान के साथ भारत के व्यापार घाटे को पाटने में भी सहायक सिद्ध हो रही है।
ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के साथ द्विपक्षीय व्यापार में निरंतर विस्तार
भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (ECTA) के लागू होने के सकारात्मक परिणाम भी आंकड़ों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। अप्रैल-जून 2026 में भारत का ऑस्ट्रेलिया को निर्यात 25.2 प्रतिशत की स्वस्थ वृद्धि के साथ 2.68 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इस समझौते के तहत भारतीय वस्त्र, चमड़ा, रत्न-आभूषण और कृषि उत्पादों को ऑस्ट्रेलियाई बाजार में शत-प्रतिशत शुल्क मुक्त प्रवेश प्राप्त हुआ है।
वहीं दूसरी ओर, भारत और यूनाइटेड किंगडम के मध्य बहुप्रतीक्षित व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) औपचारिक रूप से 15 जुलाई 2026 से प्रभावी हुआ है। इस समझौते के पूरी तरह अमल में आने से पूर्व की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भी ब्रिटेन को भारतीय निर्यात 11.1 प्रतिशत बढ़कर 3.69 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जो विगत वर्ष की समान अवधि में 3.32 अरब डॉलर था। अब जबकि भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता पूर्णतः लागू हो चुका है, आने वाली तिमाहियों में दोनों देशों के मध्य द्विपक्षीय व्यापार में और अधिक गुणात्मक छलांग लगने की संभावना है।
कुल राष्ट्रीय निर्यात 232.73 अरब डॉलर: सेवा और विनिर्माण का साझा संबल
एफटीए साझेदार देशों को होने वाली यह वृद्धि भारत के समग्र राष्ट्रीय निर्यात प्रदर्शन के अनुकूल है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर कुल 863.1 अरब अमेरिकी डॉलर का ऐतिहासिक सर्वकालिक रिकॉर्ड निर्यात दर्ज किया था, जिसमें 441.8 अरब डॉलर का वस्तु निर्यात और 421.3 अरब डॉलर का सेवा निर्यात शामिल था।
इस निरंतरता को आगे बढ़ाते हुए वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में भारत का कुल अनुमानित निर्यात (वस्तु एवं सेवाएं संयुक्त) 11.37 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर के साथ 232.73 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। विकसित और विकासशील दोनों तरह के व्यापारिक साझेदारों के साथ किए गए समझौतों ने वैश्विक मांग में मंदी के बावजूद भारतीय निर्यात को मजबूती प्रदान की है।
सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन और नियमों का सरलीकरण बना गेम-चेंजर
मुक्त व्यापार समझौतों की सफलता केवल संधियों पर हस्ताक्षर करने से सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि उनका वास्तविक लाभ जमीनी स्तर पर विनिर्माताओं और निर्यातकों तक पहुंचाना अनिवार्य होता है। वाणिज्य मंत्रालय ने विगत वर्षों में नियमों की जटिलता को समाप्त करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से उत्पत्ति प्रमाण पत्र (Certificate of Origin) जारी करने की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और स्वचालित बनाया है।
इसके साथ ही रूल्स ऑफ ओरिजिन (Rules of Origin) से जुड़े विधिक अनुपालन को सरल करने के कारण छोटे और मध्यम उद्यम (MSMEs) भी अब अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप शुल्क रियायतों का दावा करने में सक्षम हुए हैं। परिधान, रत्न-आभूषण, हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग और प्रोसेस्ड फूड जैसे अधिक रोजगार देने वाले श्रम-प्रधान क्षेत्रों को एफटीए के जरिए सीधे वैश्विक खरीदारों से जोड़ा जा रहा है।
वैश्विक आर्थिक चुनौतियां और भविष्य की संभावनाएं
यद्यपि पहली तिमाही के आंकड़े अत्यंत आशाजनक हैं, किंतु वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में कई बाहरी जोखिम अब भी बने हुए हैं। लाल सागर में जारी भू-राजनीतिक तनावों के कारण कंटेनर भाड़े और समुद्री लॉजिस्टिक्स लागत में होने वाली वृद्धि, वैश्विक मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रास्फीति के दबाव निर्यातकों के लाभ मार्जिन को प्रभावित कर सकते हैं।
इसके बावजूद संयुक्त अरब अमीरात (CEPA), ऑस्ट्रेलिया (ECTA), यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (TEPA), ओमान और हाल ही में प्रभावी हुए ब्रिटेन (CETA) समझौते के अतिरिक्त न्यूजीलैंड व यूरोपीय संघ के साथ अंतिम चरण में पहुंची संधियां भारत को एक वैश्विक विनिर्माण और निर्यात महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रही हैं। यदि पहली तिमाही की यह निर्यात गति आगामी तिमाहियों में भी बरकरार रहती है, तो भारत चालू वित्त वर्ष में अपने वार्षिक निर्यात लक्ष्यों को नए ऐतिहासिक स्तर पर ले जाने में पूरी तरह सफल रहेगा।
FTA Impact Becomes Visible: निष्कर्ष
चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में सिंगापुर और श्रीलंका को निर्यात का दोगुना होना तथा आसियान क्षेत्र में 61.6 प्रतिशत की वृद्धि भारत की विदेश व्यापार नीति और एफटीए रणनीति की ठोस सफलता का प्रमाण है। व्यापारिक संधियों का यह व्यावहारिक और परिणामोन्मुखी उपयोग भारतीय अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य की ओर अग्रसर करने के साथ-साथ घरेलू विनिर्माण और रोजगार सृजन को एक नया आधार प्रदान कर रहा है।
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