Rudram-II Missile: Rudram-II एयर-टू-सर्फेस मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण, स्वदेशी हथियारों को मिली नई ताकत

DRDO-IAF ने 300 किमी+ रेंज वाली स्वदेशी मिसाइल का सफल परीक्षण किया

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Rudram-II Missile: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय वायुसेना (IAF) ने एक बार फिर देश की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई दी है। 2 जून 2026 को ओडिशा तट के पास एक एयरबोर्न प्लेटफॉर्म से Rudram-II एयर-टू-सर्फेस मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया गया। यह परीक्षण पूरी तरह सफल रहा और मिसाइल ने अपने लक्ष्य को सटीक रूप से भेदा।

रक्षा मंत्रालय ने इस उपलब्धि को भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता का और मजबूत प्रमाण बताया है। Rudram-II मिसाइल दुश्मन के रडार, कमांड सेंटर और अन्य हाई-वैल्यू टारगेट्स को नष्ट करने में सक्षम है। यह परीक्षण भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण कदम है, जो देश को आधुनिक युद्ध प्रणालियों से लैस करने की दिशा में आगे बढ़ाता है।

Rudram-II मिसाइल परीक्षण की पूरी डिटेल

DRDO और भारतीय वायुसेना की संयुक्त टीम ने सुबह करीब 11 बजे एक Su-30 MKI फाइटर जेट से Rudram-II मिसाइल को लॉन्च किया। मिसाइल ने अपना निर्धारित पाथ पूरा किया और पूर्व निर्धारित लक्ष्य को सटीकता से भेदा। परीक्षण के दौरान सभी पैरामीटर्स सफल रहे।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, मिसाइल की रेंज 300 किलोमीटर से ज्यादा है। यह उच्च गति वाली सुपरसोनिक मिसाइल है, जो दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को बेअसर करने में सक्षम है। परीक्षण में इस्तेमाल किए गए सभी सेंसर और टेलीमेट्री सिस्टम ने बेहतरीन प्रदर्शन किया।

मिसाइल की खासियतें और तकनीकी क्षमता

Rudram-II भारत की रुद्रम (Rudram) सीरीज की दूसरी मिसाइल है। इसकी प्रमुख तकनीकी खूबियों को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:

  • एंटी-रेडिएशन तकनीक: यह एक अत्याधुनिक एंटी-रेडिएशन मिसाइल है, जो मुख्य रूप से दुश्मन के रडार सिग्नलों और ट्रांसमिशन स्रोतों को ट्रैक करके उन्हें पूरी तरह नष्ट कर सकती है।

  • उन्नत नेविगेशन: मिसाइल में अत्याधुनिक सैटेलाइट गाइडेंस सिस्टम के साथ-साथ इंटरफेरेंस-प्रूफ कम्युनिकेशन और हाई-स्पीड प्रोसेसिंग यूनिट लगाई गई है।

  • ऑपरेशनल क्षमता: यह मिसाइल दिन और रात दोनों ही समय, हर प्रकार के मौसम में सटीक वार करने के लिए डिज़ाइन की गई है। लगभग 800 किलोग्राम वजनी इस मिसाइल को लड़ाकू विमानों द्वारा विभिन्न ऊंचाइयों से दागा जा सकता है।

इस मिसाइल का डिज़ाइन DRDO की प्रमुख लेबोरेटरीज – रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) हैदराबाद, डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL) हैदराबाद और एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ADE) बेंगलुरु ने मिलकर तैयार किया है।

भारत की रक्षा क्षमता में नया आयाम

यह सफल परीक्षण भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल करता है जिनके पास अपनी स्वदेशी एंटी-रेडिएशन मिसाइल तकनीक है। Rudram-II की सफलता से भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह मिसाइल सीमा पर एयर डिफेंस सिस्टम के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगी। Rudram-II दुश्मन के सैम (सर्फेस-टू-एयर मिसाइल) साइट्स, रडार इंस्टॉलेशन्स और कमांड सेंटर्स को निशाना बनाने में बेहद प्रभावी होगी।

Rudram-II Missile: रणनीतिक महत्व और भविष्य की योजनाएं

Rudram-II का सफल परीक्षण भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा को काफी मजबूत करने वाला है। यह मिसाइल वायुसेना के Su-30 MKI, राफेल और भविष्य में आने वाले AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) जैसे फाइटर जेट्स के साथ इंटीग्रेट की जा सकेगी। इससे भारतीय वायुसेना की पेनेट्रेटिव स्ट्राइक क्षमता काफी बढ़ जाएगी।

परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) में नौसेना और तटरक्षक बल की निगरानी में रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के साथ पूरा किया गया। इस सफलता पर रक्षा मंत्री ने वैज्ञानिकों और वायुसेना के पायलट्स को बधाई दी। वर्तमान में DRDO इस सीरीज को और लंबी रेंज देने के लिए Rudram-III और Rudram-IV जैसी अधिक उन्नत मिसाइलों पर भी काम कर रहा है।

निष्कर्ष

DRDO और भारतीय वायुसेना द्वारा Rudram-II मिसाइल का सफल परीक्षण भारत की बढ़ती सैन्य और तकनीकी क्षमता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इस प्रकार की स्वदेशी हथियार प्रणालियों का विकास विदेशी आयात पर निर्भरता कम करके विदेशी मुद्रा की बचत करता है और घरेलू रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देता है। यह सफलता ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर है।

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