Disha Salian Case: पिता ने आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख को भेजा 500 करोड़ का नोटिस

दिशा सालियन के पिता ने आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख से 7 दिन में माफी मांगी

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Disha Salian Case: बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की संदिग्ध मौत का करीब छह साल पुराना मामला अब एक बड़े कानूनी और मानहानि के विवाद में तब्दील हो गया है। बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा नियमित प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू किए जाने के बीच दिशा सालियन के पिता सतीश सालियन ने आक्रामक कानूनी रुख अख्तियार किया है। सतीश सालियन ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से शिवसेना (यूबीटी) के युवा नेता आदित्य ठाकरे और महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री एवं एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के वरिष्ठ नेता अनिल देशमुख को 500 करोड़ रुपये के हर्जाने का मानहानि संबंधी कानूनी नोटिस भेजा है।

कानूनी नोटिस में दोनों कद्दावर नेताओं पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। नोटिस में कहा गया है कि आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख ने सार्वजनिक मंचों और मीडिया में बयान देकर सतीश सालियन द्वारा अपनी मृत बेटी के लिए मांगी जा रही निष्पक्ष न्यायिक जांच को ‘राजनीति से प्रेरित’ और ‘दुर्भावनापूर्ण’ करार देने का प्रयास किया। पिता का आरोप है कि इन बयानों से एक शोकग्रस्त पिता की सत्यनिष्ठा, ईमानदारी और सामाजिक प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंची है। नोटिस में दोनों नेताओं को सात दिनों की समयसीमा देते हुए बिना शर्त सार्वजनिक रूप से लिखित और वीडियो माध्यम से माफी मांगने का अल्टीमेटम दिया गया है।

Disha Salian Case: 500 करोड़ के मानहानि नोटिस में लगाए गए गंभीर आरोप

सतीश सालियन की ओर से उनके विधिक सलाहकार द्वारा भेजे गए इस कानूनी नोटिस में विस्तार से उल्लेख किया गया है कि किस प्रकार दोनों नेताओं ने अपने राजनीतिक बचाव के लिए एक पीड़ित परिवार के आंसुओं और न्याय की गुहार को षड्यंत्र का नाम दिया। नोटिस के अनुसार, नेताओं ने आम जनता के बीच यह भ्रामक धारणा बनाने की कोशिश की कि सीबीआई पूर्व में ही दिशा सालियन प्रकरण की जांच पूरी कर चुकी है और आदित्य ठाकरे को इस मामले में पूर्ण ‘क्लीन चिट’ मिल चुकी है। सतीश सालियन के पक्ष ने इस दावे को पूरी तरह सफेद झूठ और जनता को गुमराह करने वाला बताया है।

नोटिस में कहा गया है कि आदित्य ठाकरे ने बार-बार यह दावा किया कि दिशा के पिता को केवल उनके राजनीतिक विरोधियों द्वारा एक हथियार या मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। कानूनी नोटिस में इन दावों को पूरी तरह आधारहीन, गैर-जिम्मेदाराना और मानहानिकारक बताते हुए रेखांकित किया गया है कि एक बेबस पिता केवल अपनी बेटी की संदेहास्पद मौत के पीछे छिपे तथ्यों और कथित सामूहिक दुष्कर्म व हत्या के आरोपों की पारदर्शी जांच की मांग कर रहा था। किसी भी वैध साक्ष्य के बिना एक पिता की कानूनी लड़ाई को अदालत का दुरुपयोग बताना सीधे तौर पर उनकी व्यक्तिगत साख पर खुला हमला है।

सात दिन में बिना शर्त माफी और 3 मिनट का वीडियो जारी करने की शर्त

कानूनी नोटिस में केवल 500 करोड़ रुपये के आर्थिक मुआवजे का ही प्रावधान नहीं है, बल्कि दोनों नेताओं के समक्ष अत्यंत सख्त शर्तें रखी गई हैं। नोटिस में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख को नोटिस प्राप्ति के सात दिनों के भीतर अपने सभी पूर्व बयानों को तत्काल प्रभाव से वापस लेना होगा और बिना शर्त लिखित माफीनामा जारी करना होगा। इस माफीनामे को देश के सभी प्रमुख समाचार पत्रों, राष्ट्रीय टेलीविजन चैनलों और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रमुखता से प्रकाशित और प्रसारित कराना अनिवार्य होगा।

इसके अतिरिक्त, नोटिस में एक अनोखी शर्त जोड़ते हुए यह मांग भी की गई है कि दोनों नेता कम से कम तीन मिनट की अवधि का एक स्पष्ट माफी वीडियो रिकॉर्ड करेंगे। इस वीडियो माफीनामे को उनके अपने सत्यापित और आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स पर प्रसारित करना होगा, ताकि जिन माध्यमों से उनकी छवि खराब की गई थी, उन्हीं मंचों पर सतीश सालियन की प्रतिष्ठा बहाल हो सके। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि सात दिनों के भीतर माफी और हर्जाने की शर्तों को पूरा नहीं किया गया, तो वे सक्षम दीवानी और फौजदारी अदालत में 500 करोड़ रुपये का औपचारिक मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे।

अनिल देशमुख के 23 मार्च 2025 के बयान को बनाया गया कानूनी आधार

इस 500 करोड़ रुपये के नोटिस में महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख द्वारा दिए गए विशिष्ट बयानों का भी प्रमुखता से हवाला दिया गया है। नोटिस में दर्ज विवरण के अनुसार, 23 मार्च 2025 को अनिल देशमुख ने एक सार्वजनिक प्रेस वक्तव्य में दावा किया था कि दिशा सालियन की मौत के मामले को दोबारा उछालना केवल आदित्य ठाकरे की छवि को ध्वस्त करने और उन्हें राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाने की एक सुनियोजित साजिश है।

नोटिस में तर्क दिया गया है कि राज्य के पूर्व गृह मंत्री जैसे शीर्ष संवैधानिक पद पर रहे व्यक्ति द्वारा ऐसा गैर-जिम्मेदाराना बयान देने से देश भर में व्यापक प्रचार हुआ और जनमानस में यह संदेश गया कि सतीश सालियन आपराधिक न्याय प्रणाली का दुरुपयोग कर रहे हैं। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि सत्ता और राजनीतिक रसूख के दम पर एक सामान्य नागरिक के कानूनी अधिकारों को दुर्भावनापूर्ण बताकर दोनों नेताओं ने घोर कानूनी व नैतिक अपराध किया है।

आदित्य ठाकरे का दो टूक जवाब: ‘दिशा को कभी नहीं जानता था, न कभी मिला’

कानूनी नोटिस और सीबीआई की नई प्राथमिकी के बाद उपजे इस भारी विवाद के बीच आदित्य ठाकरे ने भी सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की है। सोशल मीडिया पर जारी अपने विस्तृत वक्तव्य में उन्होंने दोहराया कि उनका दिशा सालियन से जीवन में कभी कोई व्यक्तिगत, व्यावसायिक या परोक्ष परिचय नहीं रहा और वे कभी उनसे रूबरू नहीं मिले। उन्होंने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पिछले छह वर्षों से एक राजनीतिक दुर्भावना के तहत उनका नाम इस दुखद घटना के साथ घसीटा जा रहा है।

आदित्य ठाकरे का कहना है कि वे किसी भी प्रकार की निष्पक्ष आधिकारिक कानूनी जांच से नहीं डरते और उनका पूरा विश्वास संविधान और न्यायपालिका में है। उन्होंने यह भी कहा कि बिना किसी प्राथमिक साक्ष्य या आधार के केवल राजनीतिक लाभ उठाने के लिए उनके चरित्र हनन का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने जांच एजेंसी से निष्पक्षता से काम करने की अपील करते हुए मामले में अनावश्यक राजनीतिक हस्तक्षेप और दुष्प्रचार से बचने की बात कही।

सीबीआई की नई एफआईआर और कानूनी जांच का दायरा

दिशा सालियन की मृत्यु 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड स्थित जनकल्याण नगर की एक बहुमंजिला इमारत से गिरने से हुई थी। प्रारंभिक दौर में मुंबई पुलिस ने इसे दुर्घटनावश मृत्यु मानते हुए एडीआर के तहत मामला दर्ज किया था। इसके छह दिन बाद 14 जून को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का निधन हुआ, जिसके बाद दोनों घटनाओं के समय अंतराल को लेकर सोशल मीडिया और कानूनी मंचों पर कई संदेह व्यक्त किए जाने लगे।

बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा सितंबर 2026 में मामले की समग्र जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद एजेंसी ने नई नियमित प्राथमिकी दर्ज की है। इस प्राथमिकी में हत्या और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित धाराओं के तहत जांच शुरू की गई है। प्राथमिकी में आदित्य ठाकरे, अभिनेता डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, रिया चक्रवर्ती और उस समय पोस्टमॉर्टम में शामिल रहे डॉक्टरों के नामों का उल्लेख जांच के संदर्भ में किया गया है। विधिक विशेषज्ञों के अनुसार, प्राथमिकी में नाम आने का अर्थ किसी का दोषी होना नहीं है, बल्कि एजेंसी अब निष्पक्ष रूप से पुराने फॉरेंसिक डेटा, कॉल रिकॉर्ड्स और सभी पक्षों के बयानों का वैज्ञानिक सत्यापन करेगी।

Disha Salian Case: निष्कर्ष

दिशा सालियन मामले में सीबीआई की तेज होती जांच के समानांतर 500 करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस ने महाराष्ट्र के सियासी और कानूनी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। जहां एक तरफ देश की शीर्ष जांच एजेंसी छह साल पुरानी मौत के तकनीकी और फॉरेंसिक पहलुओं को सुलझाने में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ पिता द्वारा दी गई 7 दिन की कानूनी मियाद ने इस मामले में एक नया न्यायिक मोर्चा खोल दिया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख की विधिक टीम इस 500 करोड़ रुपये के नोटिस का क्या जवाब देती है और क्या यह विवाद अदालत के भीतर मानहानि के एक बड़े ऐतिहासिक मुकदमे का रूप अख्तियार करेगा।

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