Ola Uber Rapido: राइड से पहले नहीं दे सकेंगे ₹10-₹50 की टिप, सरकार का बड़ा फैसला

अब टिप राइड खत्म होने के बाद ही स्वेच्छा से दे सकेंगे यात्री, जानें सरकार का फैसला

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Ola Uber Rapido: देश में ओला, उबर और रैपिडो जैसी ऐप-आधारित कैब और बाइक-टैक्सी सेवाओं का रोजाना इस्तेमाल करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और नीतिगत फैसला लिया है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने इन सभी एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म्स को अपनी मोबाइल ऐप्लिकेशंस पर यात्रा शुरू होने से पहले यानी राइड बुकिंग के समय ड्राइवर को टिप देने के विकल्प को तत्काल प्रभाव से बंद करने का सख्त निर्देश दिया है। उपभोक्ता मामलों की केंद्रीय सचिव निधि खरे ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि राइड कन्फर्म होने या यात्रा शुरू होने से पूर्व अतिरिक्त टिप मांगने या उसका विकल्प प्रस्तुत करने की प्रक्रिया उपभोक्ताओं को भ्रमित करती है और यह उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के तहत अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है।

सरकार के इस कड़े कदम का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ग्राहकों से जबरन या मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर अतिरिक्त वसूली करने के चलन पर रोक लगाना है। पारंपरिक और नैतिक दृष्टि से टिप हमेशा सेवा उपभोग के बाद मिलने वाले अनुभव, संतुष्टि और ग्राहक की विशुद्ध इच्छा पर आधारित होती है। यात्रा शुरू होने से पहले ही स्क्रीन पर टिप का विकल्प थोपना यात्रियों के मन में यह आशंका पैदा करता है कि अतिरिक्त भुगतान किए बिना उन्हें समय पर कैब नहीं मिलेगी या ड्राइवर उनकी राइड रद्द कर सकता है। इसी अनुचित व्यवस्था को समाप्त करने के लिए सरकार ने नियामकीय डंडा चलाया है।

Ola Uber Rapido: राइड से पहले टिप का विकल्प हटने की मुख्य वजह

उपभोक्ता मामलों के विभाग को राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के जरिए कैब और बाइक-टैक्सी एग्रीगेटर कंपनियों के खिलाफ हजारों शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। इन शिकायतों के गहन विश्लेषण में यह तथ्य उजागर हुआ कि कई प्लेटफॉर्म्स पर बुकिंग प्रक्रिया के दौरान ही 10 रुपये, 20 रुपये या 50 रुपये की अतिरिक्त टिप जोड़ने का विकल्प प्रमुखता से दिखाया जा रहा था। विशेष रूप से व्यस्त घंटों या बारिश के समय यात्रियों को ऐसा प्रतीत कराया जाता था कि यदि वे अतिरिक्त टिप का चयन नहीं करेंगे, तो कोई भी ड्राइवर उनकी राइड स्वीकार नहीं करेगा।

उपभोक्ता मामलों की सचिव ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसी भी उपभोक्ता को सामान्य सेवा प्राप्त करने के लिए अग्रिम टिप देने को विवश महसूस कराना सरासर गलत है। यह व्यवस्था सेवा प्रदाता और उपभोक्ता के बीच निष्पक्ष सौदेबाजी के संतुलन को बिगाड़ती है। इसी कारण सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि राइड शुरू होने से पहले टिप का कोई भी विकल्प यूजर इंटरफेस पर नहीं दिखना चाहिए, ताकि ग्राहक बिना किसी दबाव के सामान्य किराये पर अपनी यात्रा तय कर सके।

टिप पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं: सेवा समाप्ति के बाद स्वेच्छा से भुगतान की रहेगी छूट

सरकार के इस आदेश को लेकर आम लोगों या ड्राइवरों के बीच कोई संशय न रहे, इसलिए मंत्रालय ने स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया है। सरकार ने ड्राइवर को टिप देने की परंपरा को प्रतिबंधित नहीं किया है, बल्कि इसके समय और तरीके को सुधारा है। नई व्यवस्था के तहत यदि किसी यात्री को ड्राइवर का व्यवहार, सुरक्षित ड्राइविंग और समग्र यात्रा का अनुभव संतोषजनक या उत्कृष्ट लगता है, तो वह गंतव्य पर पहुंचने और राइड पूरी होने के बाद अपनी मर्जी से ड्राइवर को कितनी भी टिप दे सकता है।

इस बुनियादी अंतर से यह सुनिश्चित होगा कि टिप केवल वास्तविक अच्छी सेवा का पुरस्कार बने, न कि राइड हासिल करने का कोई अघोषित शुल्क या रिश्वत। इससे ड्राइवरों को भी अपने व्यवहार और सेवा की गुणवत्ता बेहतर रखने की प्रेरणा मिलेगी और यात्रियों पर बुकिंग के समय कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।

रैपिडो पर लगा 10 लाख रुपये का जुर्माना: डार्क पैटर्न्स और भ्रामक तौर-तरीकों पर कार्रवाई

सरकार का यह कड़ा रुख केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) द्वारा बाइक-टैक्सी और ऑटो सेवा प्रदाता कंपनी रैपिडो पर 10 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाए जाने के बाद सामने आया है। सीसीपीए की जांच में पाया गया कि प्लेटफॉर्म अपने मोबाइल इंटरफेस पर भ्रामक प्रचार और ऐसे डिजिटल हथकंडों का इस्तेमाल कर रहा था जो सीधे तौर पर उपभोक्ता हितों पर कुठाराघात करते हैं।

प्राधिकरण ने पाया कि ऐप में बुकिंग के दौरान राइड से पहले टिप जोड़ने के ऐसे विकल्प दिए गए थे जो उपयोगकर्ता को भ्रमित करते थे। इसके अतिरिक्त, कैंसिलेशन चार्ज और किराये के ब्रेकअप में भी पारदर्शिता का अभाव पाया गया। नियामक ने रैपिडो को तत्काल इस प्रकार के सभी भ्रामक इंटरफेस बंद करने, जुर्माने की राशि जमा करने और अपनी प्रणाली को पारदर्शी बनाने का वैधानिक आदेश दिया है।

ओला और उबर भी जांच के घेरे में: डिजिटल डार्क पैटर्न्स और ‘कन्फर्म शेमिंग’ की पड़ताल

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जांच का दायरा केवल रैपिडो तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सबसे बड़ी कैब प्रदाता कंपनियां ओला और उबर भी केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की विस्तृत जांच के दायरे में हैं। दोनों कंपनियों के डिजिटल यूजर इंटरफेस, फेयर कैलकुलेशन एल्गोरिदम और टिपिंग विकल्पों की गहन पड़ताल चल रही है। जांच पूरी होते ही इन कंपनियों के संबंध में भी आवश्यक दंडात्मक या सुधारात्मक आदेश जारी किए जा सकते हैं।

नियामक का मुख्य ध्यान इन दिनों डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहे ‘डार्क पैटर्न्स’ पर है। डार्क पैटर्न्स वास्तव में वेबसाइट या ऐप के ऐसे चालाकी भरे डिजाइन होते हैं जो उपयोगकर्ताओं को उनकी सहमति के बिना अतिरिक्त भुगतान, ऑटो-रिन्यूअल या गैर-जरूरी विकल्प चुनने के लिए छलपूर्वक प्रेरित करते हैं। इसी में एक तकनीक ‘कन्फर्म शेमिंग’ की होती है, जिसमें यदि यूजर टिप या अतिरिक्त सेवा नहीं चुनता, तो स्क्रीन पर ऐसी भाषा दिखाई जाती है जिससे उसे असहजता या अपराधबोध महसूस हो। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में उपभोक्ताओं के साथ ऐसा डिजिटल शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कैब यूजर्स के लिए जरूरी सुझाव: बुकिंग के समय बरतें पूरी सावधानी

इस नए सरकारी निर्देश के बाद उपभोक्ताओं को भी डिजिटल सेवाएं लेते समय अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता है। जब भी आप किसी ऐप से ऑटो, बाइक या कैब बुक करें, तो स्क्रीन पर प्रदर्शित होने वाले अंतिम किराये और उसके विस्तृत ब्रेकअप को ध्यान से देखें। बुकिंग के दौरान यदि कोई अतिरिक्त सुविधा या वैकल्पिक चार्ज दिखाई दे, तो उसे तब तक स्वीकार न करें जब तक कि आप स्वयं उसकी आवश्यकता न महसूस करें।

यदि कोई ऐप यात्रा शुरू होने से पहले किसी भी रूप में अनिवार्य या प्रेरित टिपिंग का विकल्प प्रदर्शित करता है, तो उपभोक्ता इसकी शिकायत राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) के पोर्टल या टोल-फ्री नंबर पर दर्ज करा सकते हैं। डिजिटल परिवहन क्रांति का उद्देश्य आम जनता को सुगम आवागमन उपलब्ध कराना है, न कि छिपे हुए शुल्कों और भ्रामक तकनीकों के जरिए उनका शोषण करना।

Ola Uber Rapido: निष्कर्ष

ओला, उबर और रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म्स पर राइड शुरू होने से पहले टिप के विकल्प को खत्म करने का केंद्र सरकार का निर्णय डिजिटल उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक बेहद जरूरी कदम है। 10 लाख रुपये के जुर्माने और जारी जांचों ने यह साफ कर दिया है कि मुनाफे के लिए डार्क पैटर्न्स का सहारा लेने वाली कंपनियों पर अब सरकार की सीधी नजर है। यात्रा पूरी होने के बाद स्वेच्छा से दी जाने वाली टिप का प्रावधान बरकरार रखकर सरकार ने ड्राइवरों के हितों और यात्रियों के विवेक दोनों के बीच एक स्वस्थ संतुलन स्थापित किया है, जिससे देश के शहरी परिवहन तंत्र में पारदर्शिता और निष्पक्षता को नया बल मिलेगा।

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