FASTag Bank Change: अब स्टिकर बदले बिना बदलें बैंक, OneTag से आसान होगा पोर्ट

Rajmarg Yatra App से FASTag पोर्ट करें, टैग ID और वाहन नंबर वही रखकर बैंक बदलें

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FASTag Bank Change:  देश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले करोड़ों निजी और वाणिज्यिक वाहन चालकों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी राहत भरी डिजिटल सुविधा शुरू की है। यदि आपकी कार की विंडशील्ड पर चिपका हुआ फास्टैग किसी तकनीकी खामी, सर्वर डाउन होने या बैंक की लचर ग्राहक सेवा के कारण ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो अब आपको पुराना स्टिकर खुरचकर निकालने और नया आरएफआईडी टैग खरीदने के झंझट से मुक्ति मिल जाएगी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने फास्टैग उपयोगकर्ताओं के लिए मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP) की तर्ज पर ‘वनटैग’ (OneTag) पोर्टेबिलिटी सेवा को औपचारिक रूप से लागू कर दिया है। इस क्रांतिकारी व्यवस्था के तहत वाहन मालिक अपने मौजूदा भौतिक फास्टैग स्टिकर, टैग आईडी और वाहन पंजीकरण संख्या को यथावत रखते हुए अपनी पसंद के किसी भी नए बैंक या अधिकृत जारीकर्ता में अपनी सेवाएं डिजिटल रूप से स्थानांतरित कर सकेंगे।

लंबे समय से वाहन चालकों को फास्टैग जारीकर्ता बैंक बदलने के लिए पूर्व टैग को स्थायी रूप से निष्क्रिय कराने, सुरक्षा जमा के रिफंड के लिए हफ्तों प्रतीक्षा करने और विंडशील्ड पर नया स्टिकर चिपकाने की दोहरी मशक्कत झेलनी पड़ती थी। कई बार स्टिकर बदलते समय विंडशील्ड पर लगे डिफॉगर या टिंटेड ग्लास को नुकसान पहुंचने की शिकायतें भी सामने आती थीं। ‘वनटैग’ प्रणाली इन सभी व्यावहारिक समस्याओं को समाप्त करते हुए डिजिटल टोलिंग पारिस्थितिकी तंत्र को अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और उपभोक्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर सिद्ध होगी।

FASTag Bank Change: ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में नितिन गडकरी ने लॉन्च की OneTag पोर्टेबिलिटी

इस अभिनव डिजिटल सेवा का औपचारिक अनावरण केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा मुंबई में आयोजित प्रतिष्ठित ‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट’ (GFF) के दौरान किया गया। इस प्रणाली को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की तकनीकी इकाई भारतीय राजमार्ग प्रबंधन कंपनी लिमिटेड (IHMCL) और देश के खुदरा भुगतान नेटवर्क का संचालन करने वाले नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।

समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री ने रेखांकित किया कि देश में इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (ETC) के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन के बाद अब प्राथमिक ध्यान प्रणाली की दक्षता और उपभोक्ता सुविधा को बढ़ाना है। ‘वनटैग’ आर्किटेक्चर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि बैंक बदलने पर टोल प्लाजा के आरएफआईडी रीडर्स के स्तर पर कोई तकनीकी व्यवधान न आए। वाहन का मौजूदा आरएफआईडी चिप ही बैकएंड पर नए बैंकिंग पार्टनर के नोडल खाते से लिंक हो जाएगा, जिससे टोल प्लाजा पर लेन-देन की गति पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

क्या है FASTag OneTag और कैसे काम करता है इसका डिजिटल ढांचा?

तकनीकी दृष्टि से ‘वनटैग’ प्रणाली दूरसंचार क्षेत्र में वर्षों से सफलतापूर्वक चल रही मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी व्यवस्था के समान सिद्धांतों पर काम करती है। जिस प्रकार कोई मोबाइल उपभोक्ता अपना दस अंकों का मोबाइल नंबर बदले बिना अपनी सुविधा अनुसार एयरटेल, जियो या वोडाफोन-आइडिया में स्विच कर सकता है, ठीक उसी प्रकार वाहन मालिक अपनी मौजूदा 24 या 32 अंकों की FASTag Tag ID और वाहन की आरसी (RC) को बदले बिना अपने वित्तीय सर्विस प्रोवाइडर को बदल सकते हैं।

इस पूरी प्रक्रिया में वाहन की विंडशील्ड पर लगा आरएफआईडी चिप मूल पहचानकर्ता बना रहता है। जब कोई उपयोगकर्ता पोर्टेबिलिटी का अनुरोध करता है, तो नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (NETC) का केंद्रीय स्विच उस टैग आईडी की मैपिंग पुराने जारीकर्ता बैंक के डेटाबेस से हटाकर नए बैंक के कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (CBS) से जोड़ देता है। इसके परिणामस्वरूप, वाहन चालक को नया हार्डवेयर खरीदे बिना बेहतर कैशबैक, सुगम मोबाइल बैंकिंग ऐप और त्वरित कस्टमर सपोर्ट वाले बैंक को चुनने की पूर्ण स्वतंत्रता मिल जाती है।

Rajmarg Yatra App के जरिए FASTag पोर्ट करने की ऑनलाइन प्रक्रिया

फास्टैग को एक बैंक से दूसरे बैंक में पोर्ट करने की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस रखा गया है, जिसे एनएचएआई के आधिकारिक ‘राजमार्ग यात्रा’ मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से पूरा किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से आधिकारिक ‘Rajmarg Yatra’ ऐप डाउनलोड करके फास्टैग से जुड़े अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर के जरिए ओटीपी दर्ज कर लॉगिन करना होता है। लॉगिन के बाद ऐप के मुख्य डैशबोर्ड पर उपलब्ध ‘FASTag Services’ अनुभाग में जाकर ‘OneTag / Port FASTag’ विकल्प का चयन करना होगा।

इसके उपरांत स्क्रीन पर आपके वाहन का पंजीकरण नंबर और मौजूदा फास्टैग आईडी स्वतः दिखाई देने लगेगी, जिसके बाद सिस्टम तुरंत बैकएंड पर एनईटीसी डेटाबेस से कनेक्ट होकर यह सत्यापित करेगा कि आपका टैग पोर्टेबिलिटी के योग्य है या नहीं। पात्रता पुष्ट होने के बाद स्क्रीन पर अधिकृत बैंकों और जारीकर्ताओं की सूची प्रदर्शित होती है, जहां अपनी पसंद के नए बैंक का चयन करके आवश्यक डिजिटल सहमति देनी होती है। अंत में पंजीकृत मोबाइल नंबर पर प्राप्त प्रमाणीकरण ओटीपी दर्ज करते ही पोर्टिंग का अनुरोध दर्ज हो जाता है और प्रक्रिया पूर्ण होते ही नए बैंक की ओर से सक्रियण का पुष्टिकरण संदेश प्राप्त हो जाता है।

फास्टैग पोर्ट करने से पूर्व ध्यान रखने योग्य पात्रता और महत्वपूर्ण शर्तें

वनटैग सेवा का उपयोग करने से पूर्व प्रत्येक वाहन स्वामी को अपने फास्टैग खाते की तकनीकी और वित्तीय स्थिति की जांच कर लेनी चाहिए, ताकि पोर्टिंग प्रक्रिया में किसी प्रकार की रुकावट न आए। पोर्टेबिलिटी केवल उन्हीं फास्टैग्स पर लागू होगी जो वर्तमान में पूरी तरह सक्रिय स्थिति में हैं। यदि आपका टैग बैंक या एनएचएआई द्वारा ब्लैकलिस्ट किया गया है, तो पहले उस समस्या का समाधान कराना अनिवार्य होगा।

इसके अतिरिक्त फास्टैग वॉलेट में कोई नकारात्मक शेष या बकाया राशि नहीं होनी चाहिए, अन्यथा पोर्टेबिलिटी अनुरोध स्वतः खारिज कर दिया जाएगा। साथ ही वाहन की विंडशील्ड पर लगा आरएफआईडी स्टिकर भौतिक रूप से सुरक्षित और पढ़ने योग्य होना चाहिए, क्योंकि चिप के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में केवल नया टैग लेना ही विकल्प बचता है। प्रक्रिया के दौरान दो-चरणीय प्रमाणीकरण के लिए ओटीपी उसी नंबर पर भेजा जाएगा, इसलिए फास्टैग से लिंक मोबाइल नंबर का चालू रहना भी बेहद जरूरी है।

पुराने बैंक के सिक्योरिटी डिपॉजिट और वॉलेट बैलेंस का क्या होगा?

वाहन स्वामियों के मन में सबसे बड़ा संशय पुराने बैंक के पास जमा सुरक्षा राशि (Security Deposit) और वॉलेट में बचे पैसों को लेकर रहता है। नियामक दिशानिर्देशों के अनुसार, पोर्टेबिलिटी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुराने बैंक की कानूनी जिम्मेदारी होगी कि वह उपयोगकर्ता के पूर्व वॉलेट खाते को नियमानुसार बंद करे।

पुराने वॉलेट में शेष बची राशि और रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट का निपटारा बैंकिंग विनियमों के तहत निर्धारित समय-सीमा के भीतर सीधे वाहन मालिक के उसी बैंक बचत खाते में ऑटो-रिफंड कर दिया जाएगा, जिससे पूर्व में रिचार्ज किया जाता था। हालांकि, किसी भी विवाद से बचने के लिए यह सलाह दी जाती है कि पोर्टिंग प्रक्रिया शुरू करने से पहले पिछले टोल ट्रांजेक्शंस का मिलान कर लें और यदि वॉलेट में अत्यधिक राशि जमा हो, तो उसका उपयोग कर बैलेंस को न्यूनतम स्तर पर ले आएं।

FASTag Bank Change: टोल प्लाजा संचालन और उपभोक्ता अनुभव पर वनटैग का दूरगामी प्रभाव

वनटैग व्यवस्था के लागू होने से राष्ट्रीय और राज्यीय टोल प्लाजाओं पर होने वाले विवादों और तकनीकी देरी में भारी कमी आने की उम्मीद है। चूंकि टैग की भौतिक संरचना और आरएफआईडी फ्रीक्वेंसी में कोई फेरबदल नहीं होता, इसलिए टोल प्लाजा पर लगे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे और ओवरहेड बूम बैरियर सेंसर्स बिना किसी रुकावट के सामान्य रूप से कार्य करते रहेंगे।

उपभोक्ता के दृष्टिकोण से, यह व्यवस्था फास्टैग जारीकर्ता बैंकों के एकाधिकार को समाप्त कर उनके बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को जन्म देगी। अब बैंक केवल फास्टैग बेचकर निष्क्रिय नहीं बैठ सकेंगे, बल्कि ग्राहकों को अपने साथ बनाए रखने के लिए उन्हें बेहतर सर्वर अपटाइम, त्वरित रिफंड तंत्र, जीरो-चार्ज रिचार्ज विकल्प और 24×7 प्रभावी ग्राहक सहायता उपलब्ध करानी होगी। यह डिजिटल नवाचार भारत के राजमार्ग परिवहन को वैश्विक मानकों के अनुरूप सहज, पारदर्शी और तनावमुक्त बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

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