Delhi High Court: गैंगस्टर नीरज बवानिया को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत, नवजात बच्चों से मिलने के लिए मिली 6 घंटे की कस्टडी पैरोल

Delhi High Court: गैंगस्टर नीरज बवानिया को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत, नवजात बच्चों से मिलने के लिए मिली 6 घंटे की कस्टडी पैरोल

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Delhi High Court: जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर नीरज बवानिया को दिल्ली हाईकोर्ट से एक अहम मगर सीमित राहत मिली है। अदालत ने उसे अपनी पत्नी और अस्पताल के एनआईसीयू में भर्ती दो नवजात बच्चों से मिलने के लिए छह घंटे की कस्टडी पैरोल देने की मंजूरी दी है। नीरज बवानिया ने अपने नवजात बच्चों और पत्नी की देखभाल का हवाला देते हुए अदालत से अंतरिम जमानत की मांग की थी, लेकिन सुरक्षा कारणों को देखते हुए हाईकोर्ट ने उसकी यह अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने साफ किया कि गैंगवार की आशंका और नीरज बवानिया के हाई-रिस्क कैदी होने की वजह से उसे पूरी तरह जमानत पर छोड़ना उचित नहीं होगा। इसके बजाय अदालत ने उसे सीमित समय के लिए पुलिस सुरक्षा में परिवार से मिलने की इजाजत दी है। इस फैसले के बाद गुरुवार को गैंगस्टर को कड़ी निगरानी में अस्पताल ले जाया जाएगा, जहां वह अपनी पत्नी और नवजात बच्चों से मुलाकात कर सकेगा।

Delhi High Court: क्या थी नीरज बवानिया की गुहार

नीरज बवानिया ने अदालत के समक्ष अर्जी दाखिल कर कहा था कि उसकी पत्नी ने हाल ही में जुड़वां बच्चों को जन्म दिया है, जो फिलहाल अस्पताल के एनआईसीयू यानी नवजात गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती हैं। उसने अपने बच्चों और पत्नी की देखभाल के लिए अदालत से अंतरिम जमानत देने की गुहार लगाई थी। उसकी दलील थी कि परिवार इस नाजुक समय में उसकी मौजूदगी और सहयोग का हकदार है, इसलिए उसे कुछ समय के लिए जेल से बाहर आने की अनुमति दी जाए।

जमानत अर्जी क्यों हुई खारिज

दिल्ली हाईकोर्ट ने नीरज बवानिया की अंतरिम जमानत की अर्जी को सुरक्षा से जुड़े गंभीर कारणों के आधार पर खारिज कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि नीरज बवानिया एक हाई-रिस्क कैदी है, जिसे लेकर गैंगवार की आशंका लगातार बनी रहती है। ऐसे में उसे लंबे समय के लिए जेल से बाहर छोड़ना कानून-व्यवस्था के लिहाज से जोखिम भरा साबित हो सकता था। यही वजह रही कि अदालत ने पूर्ण जमानत के बजाय सीमित अवधि की कस्टडी पैरोल का विकल्प चुना।

छह घंटे की कस्टडी पैरोल का आदेश

गंभीरता से मामले पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने नीरज बवानिया को छह घंटे की कस्टडी पैरोल देने का आदेश दिया। इस दौरान वह पुलिस की कड़ी सुरक्षा में अस्पताल जाकर अपनी पत्नी और नवजात बच्चों से मुलाकात कर सकेगा। अदालत के इस फैसले से यह साफ है कि परिवार से मिलने का उसका मानवीय अधिकार सुनिश्चित किया गया है, लेकिन साथ ही सुरक्षा के मोर्चे पर किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती गई है।

गुरुवार को होगी अस्पताल यात्रा

अदालत के आदेश के अनुसार, नीरज बवानिया को गुरुवार को सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक अस्पताल ले जाने की अनुमति दी गई है। इस दौरान पुलिस की सख्त सुरक्षा व्यवस्था उसके साथ मौजूद रहेगी, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके। छह घंटे की यह समयसीमा खासतौर पर इसलिए तय की गई है ताकि वह परिवार के साथ पर्याप्त समय बिता सके, लेकिन साथ ही सुरक्षा एजेंसियों के लिए निगरानी करना भी आसान रहे।

Delhi High Court: हाई-रिस्क कैदियों को लेकर अदालत का रुख

इस मामले से यह साफ झलकता है कि अदालतें हाई-रिस्क कैदियों के मामलों में मानवीय पहलुओं और सुरक्षा जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती हैं। नीरज बवानिया जैसे गैंगस्टरों से जुड़े मामलों में पूर्ण जमानत देना अक्सर जोखिम भरा माना जाता है, क्योंकि इससे प्रतिद्वंद्वी गिरोहों के बीच टकराव या हिंसा की आशंका बढ़ सकती है। ऐसे में सीमित अवधि की कस्टडी पैरोल एक बीच का रास्ता माना जाता है, जो कैदी के परिवारिक अधिकारों का सम्मान करते हुए कानून-व्यवस्था को भी बनाए रखता है।

कुल मिलाकर, दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला गैंगस्टर नीरज बवानिया के लिए एक सीमित लेकिन महत्वपूर्ण राहत है। भले ही उसकी पूर्ण जमानत की अर्जी खारिज कर दी गई हो, लेकिन अदालत ने उसे अपने नवजात बच्चों और पत्नी से मिलने का मौका जरूर दिया है। यह मामला एक बार फिर इस बहस को सामने लाता है कि किस तरह अदालतें अपराधियों के मानवीय अधिकारों और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन साधने की कोशिश करती हैं। गुरुवार को पुलिस सुरक्षा में होने वाली यह मुलाकात कड़ी निगरानी के बीच पूरी होगी, ताकि किसी भी तरह की चूक की गुंजाइश न रहे।

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