Noida Weekend Trip: नोएडा में छिपा राजस्थान, चोखी हवेली में पाएं देसी संस्कृति का मजा

लोक नृत्य, कठपुतली, ऊंट की सवारी और राजस्थानी थाली का आनंद, जानें टिकट और रास्ता

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Noida Weekend Trip: भागदौड़ भरी शहरी जिंदगी और सप्ताह भर के तनाव के बाद हर किसी का मन करता है कि वीकेंड पर कहीं शांति और आनंद के पल बिताए जाएं। किंतु समय की कमी या लंबी यात्रा की थकान के कारण हर बार दिल्ली-एनसीआर से बाहर दूर निकलना संभव नहीं होता। यदि आप राजधानी या आसपास के शहरों में रहते हैं और बिना राजस्थान की लंबी यात्रा किए ठेठ राजस्थानी संस्कृति, लोक कला, पारम्परिक संगीत और शाही जायके का आनंद लेना चाहते हैं, तो नोएडा के सेक्टर 33A स्थित ‘चोखी हवेली’ एक मुकम्मल और अनूठा डेस्टिनेशन बनकर उभरी है। नोएडा हाट परिसर में बसा यह छोटा सा सांस्कृतिक संसार आधुनिकता की चकाचौंध के बीच ग्रामीण भारत की समृद्ध विरासत का जीवंत अहसास कराता है।

यह मनोरम स्थल परिवार, बच्चों और दोस्तों के समूह के लिए एक ऐसा केंद्र है, जहां प्रवेश करते ही शहर का कंक्रीट का जंगल पीछे छूट जाता है और माटी की महक के साथ मरुधरा की रंगत सामने आ जाती है। राजस्थानी लोक कलाकारों के नृत्यों की थाप, कठपुतलियों की प्राचीन कला, पारंपरिक खेलों का रोमांच और प्रामाणिक थाली का शाही स्वाद मिलकर इस जगह को दिल्ली-एनसीआर के सबसे लोकप्रिय वीकेंड गेटवेज में शुमार करते हैं।

Noida Weekend Trip: नोएडा हाट में कैसे बसा राजस्थान का यह गांव

चोखी हवेली नोएडा के सेक्टर 33A में स्थित शिल्प और सांस्कृतिक केंद्र ‘नोएडा हाट’ के भीतर विकसित की गई है। इस पूरे परिसर की बनावट और आंतरिक सज्जा राजस्थान के पारंपरिक ग्रामीण परिवेश से पूरी तरह प्रेरित है। परिसर के प्रवेश द्वार से लेकर आंतरिक गलियारों तक गोबर और मिट्टी से लिपी दीवारें, उन पर उकेरी गई पारंपरिक मांडणा चित्रकारी, झरोखे, लालटेन और रंग-बिरंगी चंदेरी-बाटिक की छतरियां आगंतुकों को एक अलग ही युग में ले जाती हैं।

इस अर्बन विलेज का मुख्य उद्देश्य महानगरों में पली-बढ़ी नई पीढ़ी और शहर के व्यस्त परिवारों को भारत की लोक परंपराओं, ग्रामीण जनजीवन और समृद्ध आतिथ्य सत्कार से सीधे जोड़ना है। यहां का स्टाफ पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा—पगड़ी, अंगरखा और धोती-कुर्ते—में ‘खम्मा घणी’ कहकर अतिथियों का स्वागत करता है, जिससे आने वाले पर्यटकों को किसी बड़े शाही रजवाड़े के गांव में कदम रखने जैसा सजीव अनुभव मिलता है।

मनोरंजन और लोक कलाओं का संगम: लोक नृत्य, कठपुतली और मैजिक शो

चोखी हवेली का आकर्षण केवल दिखावे तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां हर शाम लोक उत्सव जैसी जीवंत हो उठती है। खुले चौपालों में पारंपरिक वाद्यों जैसे खड़ताल, ढोलक और रावणहत्था की धुनों पर जब कालबेलिया और घूमर नृत्यांगनाएं चक्करदार घाघरे में थाली या तलवार पर संतुलन बनाते हुए प्रस्तुति देती हैं, तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। संगीत और नृत्य का यह माहौल आगंतुकों को भी कलाकारों के साथ झूमने पर विवश कर देता है।

इसके साथ ही बच्चों और बड़ों दोनों के मनोरंजन के लिए राजस्थान की सदियों पुरानी कठपुतली कला (पपेट शो) का नियमित मंचन किया जाता है, जिसमें अमर सिंह राठौड़ की ऐतिहासिक गाथाओं से लेकर समसामयिक लोक कथाएं रोचक अंदाज में प्रस्तुत की जाती हैं। परिसर में चलने वाला मैजिक शो बच्चों को खूब लुभाता है, जबकि हाथों में पारंपरिक मांडणा और राजस्थानी मेहंदी लगवाने के लिए महिलाओं की कतारें देखने को मिलती हैं।

ऊंट की सवारी और मिट्टी के बर्तन: ग्रामीण जीवन का सजीव अनुभव

शहरी बच्चों के लिए चोखी हवेली ग्रामीण भारत के पारंपरिक शिल्पों और खेलों से रूबरू होने की एक खुली पाठशाला जैसी है। यहां आने वाले पर्यटक कुम्हार के चाक पर बैठकर अपने हाथों से मिट्टी के दीये, कुल्हड़ और छोटे बर्तन बनाने की कला सीखते हैं, जो आज के डिजिटल युग में बच्चों के लिए बेहद रोमांचक अनुभव साबित होता है।

इसके अतिरिक्त, राजस्थान के मरुस्थलीय जीवन का सबसे बड़ा प्रतीक माने जाने वाले ऊंट की सवारी भी यहां का एक प्रमुख आकर्षण है। सजे-धजे ऊंट पर बैठकर परिसर की सैर करना परिवार के साथ आए पर्यटकों को रोमांचित करता है। निशानेबाजी (गुलेल और तीरंदाजी), बायोस्कोप के जरिए पुरानी तस्वीरों की झलक और पारंपरिक खेल चौपालों का हिस्सा हैं, जो वयस्कों को उनके बचपन के दिनों की याद दिलाते हैं।

एक ही टिकट में शाही राजस्थानी भोजन: दाल बाटी चूरमा का प्रामाणिक स्वाद

चोखी हवेली आने का सबसे बड़ा आकर्षण यहां का पारंपरिक खानपान है, जिसे ‘मनुहार’ यानी आत्मीय आग्रह के साथ परोसा जाता है। हालिया जानकारी के अनुसार, लगभग 590 रुपये के प्रवेश टिकट के भीतर ही न केवल सभी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और गतिविधियां शामिल हैं, बल्कि इसमें संपूर्ण पारंपरिक राजस्थानी डिनर बुफे का स्वाद भी समाहित है। हालांकि, यात्रा की योजना बनाने से पूर्व वर्तमान दरों की पुष्टि आधिकारिक टिकटिंग माध्यमों से कर लेना उचित रहता है।

यहां परोसी जाने वाली प्रामाणिक राजस्थानी थाली में शुद्ध देसी घी में डूबी बाटी, पंचमेल दाल, मीठा और दानेदार चूरमा, मारवाड़ी कढ़ी, गट्टे की स्वादिष्ट सब्जी, मिस्सी रोटी, बाजरे की रोटी, लहसुन और लाल मिर्च की तीखी चटनी, आलू-पापड़, दाल-चावल और अंत में केसर युक्त रबड़ी या खीर शामिल होती है। जमीन पर बैठकर या लकड़ी की पारंपरिक बाजोट-पाटल व्यवस्था में जिस सत्कार और स्नेह से भोजन परोसा जाता है, वह इस अनुभव को यादगार बना देता है।

फोटोग्राफी और सोशल मीडिया के लिए परफेक्ट विंटेज बैकड्रॉप्स

सोशल मीडिया और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए चोखी हवेली एक आदर्श स्थान है। परिसर के प्रत्येक कोने को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसी साइट्स के लिए एक उत्कृष्ट विंटेज बैकग्राउंड प्रदान करता है। नक्काशीदार लकड़ी के झूले, रंग-बिरंगी लालटेनें, सजी हुई बैलगाड़ियां, पुरानी हवेलियों जैसे प्रवेश द्वार और पारंपरिक राजस्थानी साफे (पगड़ी) पहनकर तस्वीरें खिंचवाने के विशेष फोटो बूथ आगंतुकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।

शाम के समय जब पूरा परिसर पीली रोशनी, दीपकों और पारंपरिक लालटेन के प्रकाश से जगमगाता है, तो इसकी दृश्य अपील कई गुना बढ़ जाती है। आगंतुक पारंपरिक परिधानों के साथ लोक कलाकारों के साथ यादगार तस्वीरें ले सकते हैं, जो शहर के किसी भी सामान्य आधुनिक कैफे या मॉल की तुलना में कहीं अधिक अनूठा और रंगीन फोटो एलबम तैयार करती हैं।

चोखी हवेली कैसे पहुंचें, समय और टिकट बुकिंग की प्रक्रिया

चोखी हवेली नोएडा हाट, सेक्टर 33A में स्थित है, जो दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के किसी भी कोने से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से सुलभ है। यदि आप दिल्ली मेट्रो से आ रहे हैं, तो ब्लू लाइन पर स्थित ‘नोएडा सेक्टर 32’ अथवा ‘वेव सिटी सेंटर नोएडा’ सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन हैं। मेट्रो स्टेशन से बाहर निकलकर आप ई-रिक्शा, ऑटो या कैब के जरिए मात्र 5 से 10 मिनट में सीधे नोएडा हाट पहुंच सकते हैं। निजी वाहनों से आने वाले आगंतुकों के लिए परिसर के बाहर व्यवस्थित पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध है।

चोखी हवेली के प्रवेश टिकट ऑनलाइन टिकटिंग प्लेटफॉर्म बुकमायशो (BookMyShow) और स्थल पर बने टिकट काउंटर दोनों माध्यमों से प्राप्त किए जा सकते हैं। सप्ताहांत (शनिवार और रविवार) पर यहां आगंतुकों की संख्या काफी अधिक रहती है, इसलिए समय से पहले ऑनलाइन टिकट सुरक्षित करना बेहतर विकल्प है। यह केंद्र आमतौर पर दोपहर बाद से लेकर रात्रि तक सक्रिय रहता है, किंतु सभी सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सुकून भरे भोजन का पूरा आनंद लेने के लिए शाम 5:30 से 6:00 बजे तक पहुंचना सबसे उपयुक्त समय माना जाता है।

Noida Weekend Trip: निष्कर्ष

नोएडा की चोखी हवेली केवल एक आउटिंग स्पॉट नहीं, बल्कि आधुनिक महानगर की आपाधापी के बीच भारतीय संस्कृति और लोक जड़ों से पुनः जुड़ने का एक सुंदर प्रयास है। किफायती बजट में राजस्थान के लोक नृत्यों की ऊर्जा, ऊंट की सवारी का रोमांच, बच्चों के लिए कठपुतली का जादू और दाल-बाटी-चूरमा का शाही स्वाद—यह सब कुछ एक ही परिसर के भीतर समेटना इसे एनसीआर का एक नायाब वीकेंड डेस्टिनेशन बनाता है। यदि आप भी इस आने वाले शनिवार या रविवार को परिवार या मित्रों के साथ कुछ अलग, जीवंत और सांस्कृतिक अनुभव करना चाहते हैं, तो बिना किसी हिचकिचाहट के चोखी हवेली का रुख कर सकते हैं।

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