Bihar Flood 2026: 15 जिलों में 50 लाख लोग प्रभावित, गंगा समेत कई नदियां उफान पर

गंगा-कोसी समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर, NDRF-SDRF का राहत-बचाव अभियान तेज

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Bihar Flood 2026: बिहार में मानसूनी बारिश और नेपाल के तराई क्षेत्रों से लगातार आ रहे पानी के कारण बाढ़ की विभीषिका अत्यंत गंभीर रूप धारण कर चुकी है। राज्य के 15 प्रमुख जिलों में जलप्रलय जैसी स्थिति बनी हुई है, जिससे अब तक लगभग 50 लाख से अधिक की आबादी प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो चुकी है। गंगा, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती और पुनपुन जैसी सदानीरा नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही हैं।

हालात की गंभीरता को देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टुकड़ियों को संवेदनशील तटीय और निचले इलाकों में तैनात कर दिया है। सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता जलमग्न गांवों में फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकालना और उन तक सूखा राशन, पका हुआ भोजन, स्वच्छ पेयजल व जीवनरक्षक दवाएं पहुंचाना है।

Bihar Flood 2026: 15 जिलों में विकराल रूप, 50 लाख आबादी का जनजीवन अस्त-व्यस्त

आपदा प्रबंधन विभाग की नवीनतम स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ का फैलाव अब राज्य के 15 जिलों के विस्तृत भूभाग तक पहुंच चुका है। अत्यधिक प्रभावित जनपदों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया शामिल हैं। इन जिलों के सैकड़ों गांवों का जिला मुख्यालयों से सड़क संपर्क पूरी तरह टूट चुका है।

निचले इलाकों में पानी भर जाने से लाखों हेक्टेयर में लगी खरीफ फसलें, विशेषकर धान और मक्का, जलमग्न होकर नष्ट हो गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे मकानों के ढहने और सड़कों के बह जाने से सामान्य आवागमन ठप हो गया है। कई स्थानों पर ग्रामीण रेलवे पटरियों, ऊंचे राष्ट्रीय राजमार्गों और तटबंधों पर शरण लेने को विवश हैं।

गंगा कई घाटों पर लाल निशान के पार, सुल्तानगंज में 1.69 मीटर ऊपर बहाव

राज्य में मुख्य रूप से गंगा नदी का बढ़ा हुआ जलस्तर विकराल संकट का कारण बना हुआ है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के आंकड़ों के मुताबिक, भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा खतरे के निशान से 1.69 मीटर ऊपर बह रही है, जहां जलस्तर 36.19 मीटर रिकॉर्ड किया गया है।

इसके अतिरिक्त पटना के दीघा घाट, गांधी घाट, हाथीदह, मुंगेर और कहलगांव में भी गंगा नदी लाल निशान के काफी ऊपर बह रही है। गंगा के बैकवाटर के कारण उसकी सहायक नदियों—पुनपुन, हरूहर और सोन—का जलस्तर भी उफान पर है, जिससे दियारा और टाल क्षेत्रों में पानी का भारी दबाव बना हुआ है।

नेपाल से भारी जलप्रवाह और बैराजों से लगातार डिस्चार्ज

बिहार की वर्तमान बाढ़ की स्थिति नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही भारी वर्षा और सीमावर्ती बैराजों से छोड़े जा रहे पानी से और अधिक जटिल हो गई है। पश्चिमी चंपारण स्थित वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से 1,09,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जबकि सुपौल के बीरपुर स्थित कोसी बैराज से 1,63,315 क्यूसेक पानी का निरंतर डिस्चार्ज दर्ज किया गया है।

नदियों के ऊपरी क्षेत्रों से अत्यधिक मात्रा में सिल्ट (गाद) और पानी के आने से मैदानी भागों में नदियों की जल-वहन क्षमता सीमित हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप पानी तटबंधों पर दबाव बनाते हुए आसपास के रिहायशी इलाकों में तेजी से फैल रहा है। जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों की टीमें 24 घंटे संवेदनशील तटबंधों पर गश्त कर रही हैं ताकि किसी भी प्रकार के कटाव को समय रहते रोका जा सके।

1,248 सामुदायिक रसोइयों से भोजन वितरण और 13 राहत शिविर संचालित

बाढ़ प्रभावित परिवारों को भुखमरी से बचाने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक स्तर पर राहत अभियान छेड़ रखा है। वर्तमान में प्रभावित क्षेत्रों में 1,248 सामुदायिक रसोइयां (Community Kitchens) चौबीसों घंटे संचालित की जा रही हैं, जिनके माध्यम से लाखों प्रभावितों को दोनों समय ताजा व गर्म भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

जो लोग बेघर हो चुके हैं, उनके लिए 13 बड़े राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जहां वर्तमान में 11,500 से अधिक लोग शरण लिए हुए हैं। इन शिविरों में स्वच्छ पेयजल, मोबाइल शौचालय और स्वास्थ्य जांच शिविरों की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में डायरिया, हैजा और अन्य जलजनित बीमारियों के संक्रमण को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा हैलोजन की गोलियां, ओआरएस के पैकेट और ब्लीचिंग पाउडर का बड़े पैमाने पर वितरण किया जा रहा है।

मवेशियों के लिए चारा संकट और एनडीआरएफ-एसडीआरएफ का रेस्क्यू ऑपरेशन

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुधन की अहमियत को देखते हुए पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। जलमग्न चारागाहों के चलते मवेशियों के समक्ष उत्पन्न भुखमरी के संकट को हल करने के लिए सूखा और हरा चारा नावों के जरिए पहुंचाया जा रहा है। साथ ही संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए चलंत पशु चिकित्सा वैन तैनात की गई हैं।

बचाव कार्यों में राज्य भर में एसडीआरएफ की 27 और एनडीआरएफ की 10 विशेषज्ञ टीमें पूरी तत्परता से जुटी हुई हैं। मोटरबोट्स और स्थानीय नावों के जरिए अब तक हजारों बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। आपातकालीन स्थिति में गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने के लिए बोट एंबुलेंस का सहारा लिया जा रहा है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और केंद्रीय अध्ययन दल का दौरा

प्राकृतिक आपदा के इस गंभीर दौर में राज्य का राजनीतिक तापमान भी बढ़ गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार पर बिहार के साथ उपेक्षापूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि 50 लाख से अधिक नागरिकों के प्रभावित होने और व्यापक पैमाने पर हुए नुकसान के बावजूद केंद्र की ओर से अब तक किसी विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा नहीं की गई है।

दूसरी ओर, स्थिति की वस्तुनिष्ठ समीक्षा के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गठित अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (IMCT) 15 सितंबर को बिहार के बाढ़ प्रभावित जिलों का हवाई और स्थलीय सर्वेक्षण करेगा। यह केंद्रीय दल राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक कर आधारभूत संरचनाओं, फसलों और मकानों को हुए समग्र नुकसान का आकलन करेगा, जिसके आधार पर राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (NDRF) से वित्तीय सहायता की संस्तुति की जाएगी।

Bihar Flood 2026: निष्कर्ष

बिहार में 15 जिलों की 50 लाख आबादी को अपनी चपेट में लेने वाली यह बाढ़ एक बार फिर राज्य की भौगोलिक संवेदनशीलता और दीर्घकालिक नदी प्रबंधन की आवश्यकता को रेखांकित करती है। यद्यपि प्रशासन सामुदायिक रसोइयों, राहत शिविरों और बचाव दलों के माध्यम से तात्कालिक राहत पहुंचाने में पूरी शक्ति झोंक रहा है, किंतु पानी उतरने के उपरांत उत्पन्न होने वाली महामारियों, पुनर्वास और कृषि क्षतिपूर्ति की चुनौतियां और अधिक विकट होंगी। गंगा और कोसी बेसिन में गाद प्रबंधन और स्थायी तटबंध सुदृढ़ीकरण जैसे ठोस नीतिगत कदमों के बिना हर वर्ष आने वाली इस जल-त्रासदी से बिहार के नागरिकों को स्थायी मुक्ति मिलना कठिन बना रहेगा।

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