Saudi Arabia BRICS: सऊदी अरब न सदस्य है, न बाहर, BRICS के साथ क्यों बनाए हुए है ऐसा अनोखा रिश्ता?

Saudi Arabia BRICS: सऊदी अरब न सदस्य है, न बाहर, BRICS के साथ क्यों बनाए हुए है ऐसा अनोखा रिश्ता?

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Saudi Arabia BRICS: BRICS समूह के साथ सऊदी अरब का रिश्ता कूटनीतिक दुनिया में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि यह देश न तो पूरी तरह इस समूह का हिस्सा है और न ही इससे दूरी बनाए हुए है। नई दिल्ली में हुए हालिया ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान शनिवार देर रात पहुंचे और रविवार दोपहर तक वापस लौट गए। वे क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान का प्रतिनिधित्व करने के लिए इस आयोजन में शामिल हुए थे और उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। दिलचस्प बात यह है कि सऊदी अरब को 2023 में ही आधिकारिक तौर पर ब्रिक्स में शामिल होने का न्योता मिल चुका है, लेकिन उसने अभी तक इस आमंत्रण को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सऊदी अरब बिना पूर्ण सदस्यता के भी ब्रिक्स के साथ इतना करीबी संपर्क क्यों बनाए हुए है।

Saudi Arabia BRICS: आमंत्रित देश के तौर पर हुई भागीदारी

ब्रिक्स की वेबसाइट पर न्योता मिलने के बाद सऊदी अरब को सदस्यों की सूची में तो जगह दे दी गई थी, लेकिन नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में उसने पूर्ण सदस्य के बजाय एक ‘आमंत्रित देश’ के तौर पर ही हिस्सा लिया। मौजूदा समय में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश इस समूह के पूर्ण सदस्य हैं, जो मिलकर दुनिया की करीब 40 प्रतिशत जीडीपी और आधी से ज्यादा आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं।

तेल पर निर्भरता घटाने की रणनीति से जुड़ा है जुड़ाव

सऊदी अरब लंबे समय से अपनी अर्थव्यवस्था की तेल पर निर्भरता कम करने की कोशिश में जुटा है और इसी दिशा में वह गैर-तेल निर्यात को लगातार बढ़ावा दे रहा है। वर्ष 2021 में उसका गैर-तेल निर्यात कुल निर्यात का लगभग 30 प्रतिशत था, जो 2025 तक बढ़कर 44 प्रतिशत हो चुका है। ब्रिक्स जैसे मंच से जुड़ाव सऊदी अरब को उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ संबंध मजबूत करने के साथ-साथ व्यापार के नए विकल्प तलाशने का मौका भी देता है।

अमेरिका से रिश्तों के चलते अटकी है औपचारिक सदस्यता

विशेषज्ञों के मुताबिक सऊदी अरब ब्रिक्स को आर्थिक संबंध गहरे करने के एक बड़े अवसर के रूप में देखता है, लेकिन वह अपने रिश्तों को औपचारिक रूप देने के बजाय विकल्पों को खुला रखना पसंद करता है। इसकी एक बड़ी वजह अमेरिका के साथ उसके गहरे रणनीतिक संबंध हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ब्रिक्स को अमेरिकी प्रभुत्व के लिए एक चुनौती के तौर पर देखते रहे हैं, हालांकि समूह के सदस्य इस दावे का लगातार खंडन करते आए हैं।

रक्षा और तकनीकी समझौतों पर असर की आशंका

सुरक्षा के मोर्चे पर सऊदी अरब काफी हद तक अमेरिकी हथियारों और रक्षा प्रणालियों पर निर्भर है, साथ ही वह बड़े प्रौद्योगिकी और नागरिक परमाणु समझौतों पर भी अमेरिका के साथ मिलकर काम कर रहा है। ऐसे हालात में ब्रिक्स की औपचारिक सदस्यता लेने से अमेरिका के साथ उसके रिश्तों में जटिलताएं पैदा हो सकती हैं, खासकर उस समय जब कई अहम समझौतों पर बातचीत चल रही हो।

यूएई से मतभेद के बावजूद हुई शिरकत

सऊदी के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के नई दिल्ली से रवाना होने के कुछ ही घंटों बाद वहां पहुंचे थे। फैसल ने रविवार के आउटरिच सत्र में हिस्सा लिया, जिसमें यूएई का कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं था। क्षेत्रीय संघर्षों के साथ-साथ यमन और सूडान को लेकर अलग-अलग रुख के चलते यूएई और सऊदी अरब के बीच कई मुद्दों पर मतभेद बने रहते हैं।

भारत के साथ मजबूत होते आर्थिक रिश्ते

क्षेत्रीय मतभेदों के बावजूद सऊदी अरब और यूएई, दोनों के भारत के साथ बेहद मजबूत संबंध हैं, यही वजह है कि दोनों देशों ने भारत की मेजबानी वाले इस बड़े कूटनीतिक आयोजन में रुचि दिखाई। हाल के वर्षों में सऊदी अरब और भारत ने अपने आर्थिक रिश्तों को ऊर्जा क्षेत्र से आगे बढ़ाते हुए निवेश, बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी, खाद्य सुरक्षा और पर्यटन तक विस्तार दिया है। वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 41.88 अरब डॉलर तक पहुंचा, जिसमें भारत का निर्यात 11.76 अरब डॉलर और आयात 30.12 अरब डॉलर दर्ज किया गया।

Saudi Arabia BRICS: रणनीतिक साझेदारी परिषद और भारतीय समुदाय की भूमिका

भारत और सऊदी अरब ने रणनीतिक साझेदारी परिषद के जरिए हाल के वर्षों में अपने संबंधों को तेजी से आगे बढ़ाया है, जो अब पारंपरिक तेल खरीद-बिक्री के रिश्ते से काफी आगे निकल चुके हैं। सऊदी अरब में रहने वाला बड़ा भारतीय समुदाय भी दोनों देशों के संबंधों की एक अहम कड़ी माना जाता है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक करीब 24 से 27 लाख भारतीय नागरिक फिलहाल सऊदी अरब में रह रहे हैं।

कुल मिलाकर, सऊदी अरब के लिए BRICS एक ऐसा मंच है जो उसे आर्थिक साझेदारों तक पहुंचने का बड़ा अवसर देता है, बिना इसके लिए अपने अन्य रणनीतिक संबंधों को दांव पर लगाए। यही वजह है कि वह औपचारिक सदस्यता के सवाल को अनसुलझा रखते हुए भी इस समूह के साथ करीबी से जुड़ा हुआ है। भविष्य में अमेरिका के साथ उसके रिश्तों में आने वाले बदलाव और वैश्विक आर्थिक समीकरण ही यह तय करेंगे कि सऊदी अरब कब तक इस संतुलन को बनाए रख पाता है।

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