Gold Price: सोने में 39% का उछाल, पीएम मोदी की अपील से इस दीवाली फीकी पड़ सकती है सोने की चमक
Gold Price: सोने में 39% का उछाल, पीएम मोदी की अपील से इस दीवाली फीकी पड़ सकती है सोने की चमक
Gold Price: भारत में इस साल त्योहारी सीजन के दौरान सोने की खरीदारी को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। दरअसल 1 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील की थी कि वे सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही सोना खरीदें। उनकी इस अपील के साथ-साथ सोने की आसमान छूती कीमतों का असर अब आने वाले त्योहारी और शादी के सीजन की खरीदारी पर साफ नजर आने की उम्मीद है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन यानी IBJA के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता के मुताबिक पीएम मोदी एक बड़े इन्फ्लुएंसर हैं और उनकी अपील का ग्राहकों के सेंटीमेंट पर गहरा असर पड़ेगा। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार मेहता का अनुमान है कि इस अपील के बाद त्योहारी सीजन में सोने की बिक्री में 10 से 12 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिल सकती है। पिछले एक साल में सोने की कीमतों में करीब 39 प्रतिशत का उछाल आ चुका है, जिसने पूरे बाजार की तस्वीर बदल दी है। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
Gold Price: पीएम मोदी की अपील का ग्राहकों पर पड़ेगा असर
पीएम मोदी ने 1 सितंबर को देशवासियों से अपील की थी कि सोने की खरीदारी सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही की जाए। IBJA के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता के अनुसार पीएम मोदी की छवि एक बड़े इन्फ्लुएंसर की तरह है, जिससे उनकी अपील का ग्राहकों की खरीदारी की आदतों पर सीधा असर पड़ सकता है। गौरतलब है कि इससे पहले मई महीने में भी पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और विदेशी मुद्रा खर्च का हवाला देते हुए भारतीयों से सोना कम खरीदने की सलाह दी थी।
सोने की कीमतों में आया रिकॉर्ड उछाल
पिछले साल सितंबर में 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 11,100 रुपये प्रति ग्राम थी, जो इस साल लगभग 39 प्रतिशत उछलकर 15,500 रुपये प्रति ग्राम के आसपास पहुंच चुकी है। कीमतों में आई इस बड़ी बढ़ोतरी ने ग्राहकों के बजट पर सीधा दबाव डाला है, जिसका असर आने वाले त्योहारी सीजन की खरीदारी पर पड़ना तय माना जा रहा है।
कम सोना खरीदने के बावजूद नहीं घटेगा खर्च
इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि भले ही ग्राहक इस बार कम सोना खरीदें, लेकिन उनकी जेब से खर्च होने वाली रकम कम नहीं होने वाली है। इसकी मुख्य वजह सोने की कीमतों में आया बेतहाशा उछाल है, जिसकी वजह से कम मात्रा में सोना खरीदने पर भी ग्राहकों को पहले जितना ही या उससे ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ सकता है।
बदल रही है ग्राहकों की खरीदारी की रणनीति
क्रिसिल रेटिंग्स के डायरेक्टर हिमांक शर्मा के मुताबिक आसमान छूती कीमतों और कस्टम ड्यूटी के चलते ग्राहकों का बजट काफी स्ट्रेच हो चुका है। अपने खर्च को नियंत्रण में रखने के लिए ग्राहक अब अपनी खरीदारी की रणनीति में बदलाव कर रहे हैं। कई ग्राहक अब कम कैरेट वाले सोने की तरफ रुख कर रहे हैं, जबकि कुछ पुराने सोने के गहनों को बदलकर नए गहने बनवाने का विकल्प चुन रहे हैं।
छोटे ज्वेलर्स को लग सकता है बड़ा झटका
क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक कीमतों के इस दबाव के चलते संगठित गोल्ड रिटेलर्स की बिक्री की मात्रा में वित्त वर्ष 2027 में 13 से 15 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है, जबकि पिछले साल यह गिरावट सिर्फ 8 प्रतिशत ही रही थी। इससे साफ है कि इस बार बाजार की चुनौतियां पहले की तुलना में कहीं ज्यादा गंभीर होने वाली हैं।
संगठित रिटेलर्स को मिलेगा फायदा
हालांकि इस मुश्किल बाजार माहौल में भी बड़े और संगठित रिटेलर्स असंगठित खिलाड़ियों को पीछे छोड़ते नजर आएंगे। ब्रांड ट्रस्ट, पारदर्शी हॉलमार्किंग और छोटे शहरों में तेजी से हो रहे विस्तार की वजह से संगठित रिटेलर्स का मार्केट शेयर वित्त वर्ष 2028 तक 50 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है। यह आंकड़ा बताता है कि भले ही कुल बिक्री घटे, लेकिन संगठित क्षेत्र अपनी पकड़ मजबूत करता रहेगा।
नवरात्रि, धनतेरस और शादी के सीजन पर टिकी नजरें
अब सबकी निगाहें अक्टूबर और नवंबर में आने वाले नवरात्रि, धनतेरस और शादियों के सीजन पर टिकी हुई हैं। यही वह समय होगा जब यह साफ हो पाएगा कि पीएम मोदी की अपील और बढ़ी हुई कीमतें, दोनों मिलकर जमीनी स्तर पर सोने की खरीदारी को कितना प्रभावित कर पाती हैं।
कुल मिलाकर, इस साल का त्योहारी सीजन सोने के बाजार के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है। एक तरफ पीएम मोदी की अपील ने ग्राहकों के सेंटीमेंट को प्रभावित किया है, तो दूसरी तरफ कीमतों में आए भारी उछाल ने खरीदारी की मात्रा घटाकर भी खर्च को कम नहीं होने दिया है। छोटे ज्वेलर्स के लिए यह दौर चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, जबकि संगठित रिटेलर्स इस मौके का फायदा उठाकर अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने की स्थिति में नजर आ रहे हैं। आने वाले महीनों में ही यह तय होगा कि बाजार किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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