India US Tariff Threat: ‘भारत अपनी 1.4 अरब आबादी के लिए प्रतिबद्ध’, 100% टैरिफ खतरे के बीच विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान
India US Tariff Threat: ‘भारत अपनी 1.4 अरब आबादी के लिए प्रतिबद्ध’, 100% टैरिफ खतरे के बीच विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान
India US Tariff Threat: अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक पास होते ही भारत सरकार की ओर से तुरंत प्रतिक्रिया सामने आई है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि भारत अपने नागरिकों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। दरअसल यह विधेयक कानून बनने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है, जिसमें भारत भी शामिल है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपनी 1.4 अरब आबादी के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के वास्ते अलग-अलग स्रोतों से तेल खरीदना जारी रखेगा। इस बीच कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला है, जबकि राहुल गांधी ने भी अलग मुद्दे पर सरकार को निशाने पर लिया है।
India US Tariff Threat: किस विधेयक से जुड़ा है यह विवाद
यह पूरा मामला ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम के विधेयक से जुड़ा है। इस विधेयक के जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति को मॉस्को से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाता है। इसके दायरे में भारत और चीन जैसे देश आते हैं, जो रूस से बड़े पैमाने पर तेल और गैस खरीदते हैं।
विदेश मंत्रालय ने दोहराई ऊर्जा सुरक्षा की प्रतिबद्धता
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि जैसा पहले भी कई बार बताया जा चुका है, भारत अपनी 1.4 अरब आबादी के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत अलग-अलग स्रोतों से तेल खरीदकर और बाजार की बदलती परिस्थितियों के आधार पर यह सिलसिला आगे भी जारी रखेगा।
अमेरिकी अधिकारियों से पहले भी हुई थी बातचीत
विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक हाल के महीनों में अमेरिकी अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर उच्च स्तर पर चर्चा हुई थी। भारतीय पक्ष ने उस दौरान न केवल द्विपक्षीय संबंधों बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर इसके संभावित असर को भी बहुत स्पष्ट रूप से सामने रखा था, ताकि अमेरिका को भारत की स्थिति साफ तौर पर समझ में आ सके।
व्यापारिक हितों की रक्षा का लिया संकल्प
विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारतीय पक्ष ने अपने व्यापारिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने का संकल्प स्पष्ट कर दिया है। सरकार का कहना है कि इन घटनाक्रमों के असर से निपटने के लिए वह भारतीय व्यापार और उद्योग निकायों के साथ मिलकर काम करेगी, ताकि किसी भी नुकसान की भरपाई की जा सके।
कांग्रेस ने साधा तुष्टीकरण पर निशाना
विधेयक पारित होने के बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार पर सीधा कटाक्ष किया है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि तुष्टीकरण कभी सफल नहीं हुआ और न कभी होगा। इससे पहले भी रमेश ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए भारत के हितों से समझौता कर रहे हैं।
India US Tariff Threat: राहुल गांधी ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक अलग मुद्दे पर भी केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत चार्ज लगाने के फैसले को लेकर कहा कि मोदी सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने दंडवत होने का फैसला कर लिया है। इस बयान से भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तकरार और तेज होती दिख रही है।
भारत सरकार की ओर से दिए गए बयान से यह साफ है कि देश ऊर्जा सुरक्षा के मामले में किसी भी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है। हालांकि अमेरिकी संसद में पास हुआ यह विधेयक अगर कानून बनता है, तो इसका असर भारत के व्यापारिक और आर्थिक हितों पर पड़ सकता है, जिससे आने वाले समय में कूटनीतिक बातचीत की जरूरत और बढ़ेगी। घरेलू राजनीति में भी इस मुद्दे ने नया मोड़ ले लिया है, क्योंकि कांग्रेस इसे सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाने के मौके के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। कुल मिलाकर यह मसला आने वाले दिनों में भारत की विदेश नीति और घरेलू राजनीति दोनों के लिहाज से अहम बना रहेगा।
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