India-UK FTA: ब्रिटेन से 642 कारों के आयात को DGFT की मंजूरी, कम ड्यूटी का मिलेगा लाभ

DGFT ने 7 कंपनियों को 642 कारों का कोटा दिया, FTA के तहत कम कस्टम ड्यूटी का लाभ

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India-UK FTA: भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते यानी कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट के औपचारिक क्रियान्वयन के बाद ऑटोमोबाइल क्षेत्र में इसके ठोस परिणाम धरातल पर दिखने लगे हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने ब्रिटेन से भारत में 642 प्रीमियम कारों के आयात को हरी झंडी दे दी है। ये सभी वाहन भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते में निर्धारित टैरिफ रेट कोटा (TRQ) व्यवस्था के तहत रियायती सीमा शुल्क पर देश में लाए जाएंगे। सरकारी सूत्रों के अनुसार कैलेंडर वर्ष 2026 की शेष अवधि के लिए कुल सात ऑटोमोबाइल कंपनियों और अधिकृत वितरकों के आवेदनों को विधिवत मंजूरी प्रदान की गई है।

यह निर्णय दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को गति देने और भारतीय बाजार में ब्रिटिश ऑटोमोटिव ब्रांड्स के प्रवेश को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। ऐतिहासिक रूप से भारत में पूरी तरह निर्मित कारों (CBU) के आयात पर 100 प्रतिशत से भी अधिक का भारी-भरकम सीमा शुल्क लागू रहा है, जिसके चलते लग्जरी और प्रीमियम गाड़ियां आम ग्राहकों के लिए अत्यधिक महंगी हो जाती थीं। इस मुक्त व्यापार समझौते के तहत लागू की गई रियायती शुल्क व्यवस्था से ब्रिटिश मूल की प्रीमियम कारों की लागत संरचना में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।

India-UK FTA: DGFT ने 7 कंपनियों को दी मंजूरी, 8 में से एक आवेदन में मिलीं कमियां

विदेश व्यापार महानिदेशालय द्वारा जारी आधिकारिक विवरण के अनुसार, टैरिफ रेट कोटा के अंतर्गत ब्रिटिश कारों के आयात के लिए कुल आठ कंपनियों ने आवेदन प्रस्तुत किए थे। डीजीएफटी द्वारा गठित जांच समिति ने सभी दस्तावेजों, आयात अनुबंधों और पात्रता शर्तों का सूक्ष्म परीक्षण किया। इस जांच प्रक्रिया में सात कंपनियों के आवेदन एफटीए के मूल नियमों और निर्धारित मानकों के पूर्णतः अनुरूप पाए गए, जिसके आधार पर कुल 642 यात्री वाहनों के आयात का कोटा आवंटित कर दिया गया।

वहीं शेष एक आवेदन में आवश्यक कानूनी और प्रक्रियात्मक दस्तावेज अधूरे पाए जाने के कारण संबंधित कंपनी को डेफिशिएंसी लेटर जारी किया गया है। इसका अर्थ यह है कि उक्त आवेदक द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर कमियों को दूर कर लिए जाने के बाद उसके मामले पर अलग से विचार किया जा सकता है। वर्तमान में आवंटित 642 वाहनों की खेप वर्ष 2026 के बचे हुए महीनों के दौरान भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने के लिए अधिकृत कर दी गई है।

15 जुलाई 2026 से प्रभावी हुआ CETA: क्या है टैरिफ रेट कोटा व्यवस्था

भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता आधिकारिक तौर पर 15 जुलाई 2026 से प्रभावी हुआ था। समझौते के प्रावधानों के अंतर्गत दोनों देशों ने संवेदनशील उद्योगों, विशेष रूप से ऑटोमोबाइल क्षेत्र की घरेलू विनिर्माण इकाइयों के हितों की रक्षा करते हुए सीमित आयात की रूपरेखा तैयार की। इसी संतुलन को साधने के लिए टैरिफ रेट कोटा यानी टीआरक्यू व्यवस्था को आधार बनाया गया।

टीआरक्यू व्यवस्था का सीधा सिद्धांत यह है कि एक वित्तीय अथवा कैलेंडर वर्ष के भीतर पूर्व-निर्धारित संख्या में ही वाहनों को सामान्य आयात शुल्क के बजाय बेहद कम रियायती सीमा शुल्क पर देश में लाने की अनुमति दी जाती है। इस निर्धारित संख्या से ऊपर यदि कोई अतिरिक्त वाहन मंगाया जाता है, तो उस पर पूर्व की भांति मानक उच्च सीमा शुल्क लागू होता है। इस व्यवस्था से घरेलू वाहन निर्माताओं को अचानक विदेशी आयात के सैलाब से सुरक्षा मिलती है, जबकि विदेशी कंपनियों को भी रियायती शर्तों पर अपने चुनिंदा मॉडल्स पेश करने का अवसर प्राप्त होता है।

2026 के लिए 5,200 वाहनों का था कोटा, शुरुआती चरण में आया सीमित उपयोग

भारत-यूके समझौते के प्रारंभिक चरण में पहले पूरे वर्ष के लिए ब्रिटेन से भारत में यात्री कारों के आयात हेतु कुल 20,000 वाहनों का वार्षिक कोटा तय किया गया है। चूंकि यह समझौता वर्ष 2026 के मध्य यानी जुलाई में लागू हुआ, इसलिए शेष बचे हुए लगभग साढ़े पांच महीनों के लिए आनुपातिक आधार पर 5,200 वाहनों का प्रारंभिक कोटा भारतीय बाजार के लिए खोला गया था।

उपलब्ध 5,200 वाहनों के इस कोटे के मुकाबले केवल 642 कारों के लिए ही वैध आवेदन आना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि शुरुआती दौर में वाहन निर्माताओं ने बहुत सतर्कता के साथ कदम आगे बढ़ाए हैं। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि नया व्यापार समझौता लागू होने के तुरंत बाद कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला, नए लॉजिस्टिक्स चैनल और भारतीय सुरक्षा व उत्सर्जन मानकों के अनुसार होमोलोगेशन प्रक्रिया को नए सिरे से व्यवस्थित करना होता है। इसके अतिरिक्त, किसी भी विदेशी मूल के उत्पाद को एफटीए के तहत रियायत लेने के लिए ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन’ यानी मूल देश के कड़े नियमों को प्रमाणित करना अनिवार्य होता है, जिसमें समय लगना स्वाभाविक है।

इंपोर्ट ड्यूटी में ऐतिहासिक कटौती: बड़े इंजन वाली कारों पर 110% से घटकर 30% हुआ शुल्क

भारत-ब्रिटेन एफटीए का सबसे क्रांतिकारी पहलू ब्रिटिश मूल के यात्री वाहनों पर लगने वाले बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) ढांचे में की गई भारी कटौती है। समझौते के तहत लागू की गई रियायती दरों को इंजन क्षमता के आधार पर तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है। पहली श्रेणी में 1,500 सीसी तक की छोटी इंजन वाली कारों पर सामान्य 66 प्रतिशत के शुल्क को घटाकर सीधे 50 प्रतिशत कर दिया गया है।

दूसरी श्रेणी के तहत 1,500 सीसी से अधिक और 3,000 सीसी तक की पेट्रोल कारों तथा 1,500 सीसी से अधिक व 2,500 सीसी तक की डीजल कारों पर भी सामान्य 66 प्रतिशत की दर को घटाकर 50 प्रतिशत के दायरे में लाया गया है। सबसे बड़ा बदलाव तीसरी श्रेणी यानी उच्च क्षमता वाली लग्जरी और स्पोर्ट्स कारों में देखने को मिला है। इसके अंतर्गत 3,000 सीसी से अधिक इंजन वाली पेट्रोल कारों और 2,500 सीसी से अधिक क्षमता वाली डीजल कारों पर लागू सामान्य 110 प्रतिशत के भारी शुल्क को घटाकर मात्र 30 प्रतिशत कर दिया गया है। इस 80 प्रतिशत की भारी कटौती से लैंड रोवर, जगुआर, बेंटले और रोल्स रॉयस जैसी हाई-एंड ब्रिटिश कारों के आयात पर सीधे तौर पर कई लाख से लेकर करोड़ों रुपये तक के टैक्स की बचत होगी।

क्या हर ब्रिटिश कार पर मिलेगा यह फायदा: पात्रता और आयात की कड़ी शर्तें

यह समझना आवश्यक है कि ब्रिटेन में निर्मित होने वाली प्रत्येक कार पर यह रियायती आयात शुल्क अपने आप लागू नहीं होगा। इस व्यवस्था का लाभ केवल उन्हीं वाहनों को मिलेगा जो समझौते के तहत निर्धारित कड़े ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन’ को पूरा करते हैं, जिसके अनुसार कार के कलपुर्जों और असेंबली में ब्रिटेन का न्यूनतम स्थानीय मूल्य संवर्धन (Local Value Addition) प्रमाणित होना चाहिए।

इसके साथ ही, टीआरक्यू कोटे के लिए आवेदन करने का अधिकार भी केवल मूल उपकरण निर्माताओं (OEMs), उनके अधिकृत भारतीय वितरकों या मान्यता प्राप्त चैनल पार्टनर्स तक ही सीमित रखा गया है। प्रत्येक आवेदक को ब्रिटेन के संबंधित वाहन निर्माता के साथ वैध प्री-परचेज एग्रीमेंट और सप्लाई कमिटमेंट लेटर प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है। इन सख्त प्रक्रियाओं के चलते कोई भी अनधिकृत आयातक या ग्रे-मार्केट ऑपरेटर इस रियायती कोटे का दुरुपयोग नहीं कर सकता।

इलेक्ट्रिक कारों और मालवाहक वाहनों के लिए क्या हैं विशेष नियम?

वर्तमान में स्वीकृत 642 वाहनों का कोटा केवल पारंपरिक आंतरिक दहन इंजन यानी पेट्रोल और डीजल से चलने वाले यात्री वाहनों के लिए ही प्रभावी है। समझौते में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), हाइब्रिड और हाइड्रोजन आधारित कारों के लिए एक बिल्कुल अलग और दीर्घकालिक व्यवस्था बनाई गई है। भारत सरकार ने अपने घरेलू इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण और ‘मेक इन इंडिया’ मिशन को संरक्षण देने के लिए ईवी और हाइब्रिड कारों के रियायती आयात को समझौते के छठे वर्ष से लागू करने का प्रावधान रखा है। इसका अर्थ यह है कि वर्तमान कोटे में कोई भी इलेक्ट्रिक कार शामिल नहीं है।

वहीं दूसरी ओर, वाणिज्यिक मालवाहक वाहनों यानी गुड्स कैरियर्स के लिए भी समझौते में अलग टीआरक्यू कोटा बनाया गया है, जिसके तहत आयात शुल्क को सामान्य 44 प्रतिशत से घटाकर 37 प्रतिशत किया गया है। हालांकि वर्ष 2026 के इस प्रारंभिक चरण में वाणिज्यिक वाहन श्रेणी के तहत किसी भी कंपनी ने आयात के लिए आवेदन नहीं किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक ऑटोमोबाइल कंपनियों का प्राथमिक ध्यान फिलहाल भारत के तेजी से बढ़ते प्रीमियम और लग्जरी यात्री कार बाजार पर ही केंद्रित है।

India-UK FTA: निष्कर्ष

डीजीएफटी द्वारा 642 ब्रिटिश कारों के रियायती आयात को दी गई यह मंजूरी भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते की व्यावहारिक सफलता का एक सकारात्मक संकेत है। यद्यपि 5,200 के उपलब्ध कोटे की तुलना में यह संख्या सीमित प्रतीत होती है, किंतु यह दोनों देशों के बीच ऑटोमोबाइल व्यापार के एक नए और उदारवादी युग की मजबूत शुरुआत है। 110 प्रतिशत के स्थान पर 30 प्रतिशत जैसी घटी हुई आयात ड्यूटी से हाई-एंड लग्जरी कारों की भारतीय बाजार में कीमतें अधिक तर्कसंगत होंगी, जिसका लाभ सीधे तौर पर प्रीमियम कार खरीदारों को मिलेगा। आने वाले वर्षों में जैसे-जैसे प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं सुगम होंगी और कंपनियों का वितरण तंत्र मजबूत होगा, वैसे-वैसे इस रियायती कोटे का पूरा इस्तेमाल होने और भारत की सड़कों पर ब्रिटिश ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग के नए मॉडल्स की उपस्थिति और अधिक व्यापक होने की पूरी उम्मीद है।

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