Parenting Tips: बच्चा लोगों के सामने बोलने से घबराता है? पेरेंट्स इन 5 आसान तरीकों से बढ़ाएं उसका कॉन्फिडेंस

Parenting Tips: बच्चा लोगों के सामने बोलने से घबराता है? पेरेंट्स इन 5 आसान तरीकों से बढ़ाएं उसका कॉन्फिडेंस

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Parenting Tips: बहुत से पेरेंट्स की यह आम शिकायत होती है कि उनका बच्चा घर पर तो खूब बातें करता है, लेकिन किसी और के सामने आते ही मानो उसकी जुबान बंद हो जाती है। शुरुआत में इसे सिर्फ एक हल्की झिझक मान लिया जाता है, लेकिन अगर यह आदत लंबे समय तक बनी रहे, तो यह बच्चे के आत्मविश्वास में कमी का संकेत भी हो सकती है। हर बच्चे का स्वभाव अलग होता है, इसलिए कुछ बच्चे माता-पिता और भाई-बहनों के सामने तो सहजता से बात कर लेते हैं, लेकिन टीचर, रिश्तेदार, पड़ोसी या किसी नए व्यक्ति के सामने बोलने में कतराने लगते हैं। कई बार यह झिझक इतनी बढ़ जाती है कि बच्चा किसी बड़े मंच पर बोलने से भी घबराने लगता है। ऐसे में जरूरी नहीं कि बच्चे को डांटा जाए या उसकी तुलना दूसरों से की जाए, बल्कि सही तरीके से उसका मार्गदर्शन किया जाए तो उसका आत्मविश्वास धीरे-धीरे खुद-ब-खुद बढ़ने लगता है।

Parenting Tips: बच्चे की बातों को ध्यान से सुनें

बच्चे अक्सर अपनी बातें सबसे पहले माता-पिता के सामने ही खुलकर रखते हैं, क्योंकि उन्हें भरोसा होता है कि उनके पेरेंट्स उन्हें ध्यान से सुन रहे होंगे। अगर इस दौरान माता-पिता किसी काम में व्यस्त रहते हैं या बच्चे की बातों को नजरअंदाज करते हैं, तो बच्चा यह बात तुरंत भांप लेता है। इसका असर यह होता है कि वह धीरे-धीरे अपनी बात कहने में हिचकिचाने लगता है, फिर चाहे वह पेरेंट्स के सामने हो या किसी और के सामने। इसलिए बच्चे की बात को अनदेखा करने के बजाय उसे पूरे ध्यान से सुनना और उसका उचित जवाब देना जरूरी है।

छोटे-छोटे काम खुद करने का मौका दें

बच्चे के भीतर आत्मविश्वास बढ़ाने का एक कारगर तरीका यह है कि उसे छोटे-छोटे कामों के लिए खुद आगे बढ़ने दिया जाए। जैसे उसे पड़ोसी के घर कोई सामान लेने भेजना, दुकान से कुछ मंगवाना या टीचर से किसी बात के बारे में खुद पूछने के लिए प्रोत्साहित करना। ऐसे छोटे कार्यों से बच्चे की झिझक धीरे-धीरे कम होने लगती है और वह अपनी बात खुलकर कहना सीखता है। इसका मतलब यह नहीं कि बच्चे को हर किसी से बात करना अनिवार्य हो, लेकिन जरूरत पड़ने पर अपनी बात रखना उसे जरूर आना चाहिए।

रोजाना बातचीत की आदत डालें

बच्चा जब स्कूल या ट्यूशन से घर लौटे, तो उसके साथ रोजाना कम से कम 10 मिनट बातचीत करने की आदत डालनी चाहिए। इस दौरान उससे स्कूल, क्लास, टीचर, रूटीन और पढ़ाई से जुड़ी बातें पूछी जा सकती हैं। इसके अलावा उसके मूड, पसंद-नापसंद और दिनभर की गतिविधियों के बारे में भी बात की जा सकती है। इस नियमित संवाद से बच्चे में बात करने की आदत विकसित होती है, जो आगे चलकर उसे दूसरों के सामने आत्मविश्वास के साथ बोलने में मदद करती है।

दूसरे बच्चों से तुलना करने से बचें

अगर बच्चा किसी के सामने कम बोलता है या चुप रहता है, तो उसका मजाक उड़ाना या उसकी तुलना दूसरे बच्चों से करना बिल्कुल सही तरीका नहीं है। इस तरह की तुलना बच्चे की झिझक को और बढ़ा देती है, जिससे उसका आत्मविश्वास बढ़ने के बजाय और कमजोर हो जाता है। इसके बजाय बच्चे को प्यार से समझाना चाहिए और उसे हमेशा अपनी बात खुलकर रखने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

छोटी शुरुआत से बड़े मंच तक ले जाएं

अगर बच्चा किसी के सामने बोलने से शर्माता है, तो उसे सीधे बड़े मंच पर धकेलने के बजाय पहले छोटे स्तर पर अभ्यास करवाना बेहतर रहता है। अगर बच्चे को किसी कार्यक्रम में कुछ बोलना है, तो पहले उसे घर पर माता-पिता, भाई-बहन या करीबी दोस्तों के सामने प्रैक्टिस करवानी चाहिए। इससे बच्चे के भीतर धीरे-धीरे आत्मविश्वास बनता है, और यही अभ्यास आगे चलकर उसे बड़े मंच पर बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करता है।

Parenting Tips: पेरेंट्स की भूमिका क्यों है अहम

बच्चों में आत्मविश्वास की कमी को अक्सर माता-पिता एक स्वाभाविक झिझक समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह आदत बड़े होने के बाद भी बनी रह सकती है। पेरेंट्स का धैर्यपूर्वक व्यवहार और सही मार्गदर्शन बच्चे के व्यक्तित्व विकास में बड़ी भूमिका निभाता है। बच्चे को डांटने या दबाव बनाने के बजाय उसे सहज माहौल देना ज्यादा असरदार साबित होता है।

कुल मिलाकर, अगर बच्चा दूसरों के सामने बोलने से घबराता है, तो यह कोई बड़ी समस्या नहीं बल्कि एक सामान्य व्यवहार है, जिसे सही तरीकों से आसानी से सुधारा जा सकता है। बच्चे की बात ध्यान से सुनना, उसे छोटे कामों में खुद आगे आने का मौका देना, नियमित बातचीत की आदत डालना, तुलना से बचना और छोटे स्तर पर अभ्यास करवाना, ये पांचों तरीके मिलकर बच्चे के आत्मविश्वास को मजबूत बनाते हैं। याद रखें, हर बच्चा अपनी गति से सीखता है, इसलिए धैर्य और सही सहयोग से वह जरूर आत्मविश्वासी बनकर उभरेगा।

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