Nepal Flood: चिलिमे हाइड्रोपावर सुरंग से पांच शव बरामद, कई दिनों की मशक्कत के बाद पहुंची भारत-नेपाल की संयुक्त टीम
भारत-नेपाल की संयुक्त टीम ने कई दिनों के रेस्क्यू के बाद चिलिमे पावरहाउस तक पहुंच बनाई
Nepal Flood: नेपाल के उत्तरी हिमालयी क्षेत्र में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन की विभीषिका के तीन सप्ताह बाद राहत एवं बचाव दलों को एक हृदयविदारक सफलता मिली है। चीन सीमा से सटे रसुवा जिले में स्थित चिलिमे जलविद्युत परियोजना (Chilime Hydropower Project) की जलमग्न और मलबे से पटी सुरंग में कई दिनों तक चले अत्यधिक चुनौतीपूर्ण अभियान के बाद पांच कर्मियों के पार्थिव शरीर बरामद कर लिए गए हैं। भारतीय सेना और नेपाली सेना के संयुक्त बचाव दल ने टन-दर-टन कीचड़, विशालकाय पत्थरों और लगातार हो रहे पानी के रिसाव को पार करते हुए आखिरकार भूमिगत पावरहाउस तक अपनी पहुंच बनाई।
नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने आधिकारिक तौर पर इस संयुक्त अभियान के निष्कर्ष की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि भारतीय और नेपाली दलों ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में कई दिनों तक मलबे को साफ करने का काम किया और अंततः बुधवार की सुबह पावरहाउस तक पहुंचे। दुर्भाग्यवश, सुरंग के भीतर कोई भी जीवित व्यक्ति नहीं मिल सका और वहां से पांच शवों को बाहर निकाला गया। इस त्रासदी ने बाढ़ के दिन से अपनों की वापसी की राह देख रहे परिवारों की अंतिम उम्मीदों को भी तोड़ दिया है।
Nepal Flood: 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई प्रलयंकारी बाढ़ ने मचाई थी तबाही
यह भीषण त्रासदी 26 अगस्त 2026 को नेपाल-तिब्बत सीमा के समीप हुए हिमस्खलन और रॉक स्लाइड के कारण उत्पन्न हुई अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) से शुरू हुई थी। हिमालयी ढलानों से नीचे उतरी भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के उफान ने अपने रास्ते में आने वाले गांवों, कस्बों, पुलों, सड़कों और राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया।
नदी के प्रचंड वेग ने रसुवा जिले में संचालित और निर्माणाधीन कई प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं को अपनी चपेट में ले लिया। बाढ़ का पानी सुरक्षा दीवारों को तोड़ते हुए सीधे चिलिमे परियोजना के भूमिगत बुनियादी ढांचे और सुरंगों में घुस गया। जलस्तर के अचानक बढ़ने और सुरंग का मुहाना बंद हो जाने के कारण ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को बाहर निकलने का कोई अवसर नहीं मिल सका।
मलबे, पानी और संकरी सुरंग में संयुक्त टीम का जानलेवा रेस्क्यू ऑपरेशन
चिलिमे की सुरंग के भीतर फंसे कर्मचारियों तक पहुंचना बचाव दलों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। बाढ़ के साथ बहकर आई भारी सिल्ट और विशाल चट्टानों ने सुरंग के प्रवेश द्वार से लेकर भीतर तक लगभग 1,000 मीटर से अधिक हिस्से को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया था। इसके अतिरिक्त, सुरंग के भीतर पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा था, जिससे भारी खुदाई मशीनों (Excavators) का आगे बढ़ना असंभव हो गया था।
इस जटिल स्थिति से निपटने के लिए भारतीय सेना और नेपाली सेना के इंजीनियरिंग विंग ने एक समन्वित रणनीति तैयार की। हेलिकॉप्टरों की मदद से भारी उपकरण प्रभावित क्षेत्र तक एयरलिफ्ट किए गए। मशीनरी की सीमा समाप्त होने के बाद बचावकर्मियों ने टॉर्च की रोशनी में संकरी जगहों से हाथ से मलबा हटाना शुरू किया। पानी के भीतर खोजबीन करने के लिए विशेष गोताखोरों (Deep Divers) को उतारा गया। बुधवार को जब एक ट्रॉली के जरिए पावरहाउस के समीप का रास्ता खोला गया, तब जाकर भीतर पड़े शवों तक पहुंचना संभव हो सका।
सुबह की शिफ्ट में छह कर्मचारी थे तैनात, डीएनए से होगी पहचान
परियोजना प्रबंधन के आधिकारिक रिकॉर्ड्स के अनुसार, 26 अगस्त की सुबह जब जलप्रलय आया, उस समय चिलिमे पावर प्लांट में छह कर्मचारी नियमित शिफ्ट पर कार्यरत थे। इनमें एक प्रोजेक्ट इंजीनियर, दो सुपरवाइजर, दो सुरक्षा गार्ड और एक कार्यालय सहायक शामिल थे।
आपदा प्रबंधन अधिकारियों का कहना है कि तीन सप्ताह तक पानी और मलबे के नीचे दबे रहने के कारण बरामद शवों की स्थिति काफी क्षत-विक्षत हो चुकी है। मृतकों की विधिक और वैज्ञानिक पहचान सुनिश्चित करने के लिए सभी शवों के डीएनए (DNA) नमूने सुरक्षित किए जा रहे हैं। इन नमूनों का मिलान संबंधित कर्मचारियों के परिजनों के जैविक नमूनों से किया जाएगा, जिसके बाद ही औपचारिक रूप से शव उनके परिवारों को सौंपे जाएंगे।
अपर त्रिशूली-1 प्रोजेक्ट से भी 5 शव बरामद, जलविद्युत क्षेत्र पर गहरा आघात
चिलिमे प्रोजेक्ट में चलाए गए इस अभियान के समानांतर रसुवा जिले की एक अन्य 216 मेगावाट क्षमता वाली प्रमुख परियोजना ‘अपर त्रिशूली-1’ (Upper Trishuli-1 Hydropower Project) में भी बुधवार को बड़े पैमाने पर शव बरामद किए गए। स्थानीय पुलिस और नेपाली सेना के संयुक्त दल ने उत्तरगया क्षेत्र में स्थित ऑडिट-3 सुरंग के भीतर लगभग 800 मीटर गहराई से पांच और अज्ञात शवों को बाहर निकाला।
एक ही दिन में दो अलग-अलग जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों से दस शवों की बरामदगी ने नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र में हुए व्यापक जान-माल के नुकसान को उजागर किया है। नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (NEA) और स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादक संघ (IPPAN) के अनुसार, इस आपदा में 13 से अधिक पनबिजली संयंत्र गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। कई परियोजनाओं में अब भी सैकड़ों स्थानीय और विदेशी कामगार लापता बताए जा रहे हैं, जिसके चलते अधिकांश जलमग्न परियोजनाओं में अब जीवित बचे लोगों के मिलने की उम्मीदें लगभग समाप्त मानी जा रही हैं।
नेपाल में आपदा के बाद का भयावह मंजर: हजारों लापता और पुनर्निर्माण की चुनौती
26 अगस्त की इस प्राकृतिक आपदा ने पूरे नेपाल को गहरे मानवीय और आर्थिक संकट में धकेल दिया है। अंतरराष्ट्रीय मानवीय एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस बाढ़ और भूस्खलन में अब तक 1,400 से अधिक लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 5,000 से अधिक नागरिक अब भी लापता दर्ज हैं। हजारों हेक्टेयर उपजाऊ कृषि भूमि बह चुकी है और प्रमुख राजमार्गों के ध्वस्त होने से सुदूर हिमालयी बस्तियों का संपर्क पूरी तरह कट चुका है।
नेपाल सरकार ने इस भीषण तबाही से उबरने के लिए प्रारंभिक आकलन में पुनर्निर्माण लागत लगभग 5 अरब डॉलर रहने का अनुमान लगाया है। पहाड़ी इलाकों में सड़कें, बिजली ग्रिड और दूरसंचार ढांचे को पुनः बहाल करना एक बेहद धीमी और खर्चीली प्रक्रिया साबित हो रही है। भारत सरकार और उसकी आपदा राहत टीमें पड़ोसी देश के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खोज, राहत और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में निरंतर जुटी हुई हैं।
Nepal Flood: निष्कर्ष
चिलिमे हाइड्रोपावर सुरंग से पांच शवों का मिलना उस भयंकर विभीषिका का एक और त्रासद अध्याय है जिसने प्रकृति के अप्रत्याशित रौद्र रूप के आगे आधुनिक इंजीनियरिंग को भी लाचार बना दिया। भारत और नेपाल की सेनाओं का यह संयुक्त खोज अभियान आपसी सहयोग, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय संवेदनाओं का अप्रतिम उदाहरण बनकर उभरा है, जिन्होंने शून्य दृश्यता और निरंतर खतरों के बावजूद अपने नागरिकों को ढूंढ निकालने का कार्य पूरा किया। अब दोनों देशों और स्थानीय प्रशासन के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती लापता व्यक्तियों की खोज को तार्किक परिणति तक पहुंचाना और हिमालयी क्षेत्र में भविष्य की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को जलवायु परिवर्तन के खतरों से सुरक्षित बनाना है।
Read more here
Radha Ashtami 2026: 18 या 19 सितंबर कब है राधा अष्टमी? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Vishwakarma Puja 2026: 17 सितंबर को मशीनों, औजारों और वाहनों की पूजा विधि जानें
Petrol-Diesel Price 17 September 2026: पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट, जानें शहरवार भाव
BMW i5 LWB Launch: ₹79.60 लाख में 669KM रेंज वाली लग्जरी इलेक्ट्रिक सेडान