Onion Price: प्याज के दाम में 9% की गिरावट, 48 शहरों में ₹35 किलो बिक्री; जानें अब क्या है रेट
थोक भाव 9% घटे, सरकार 48 शहरों में ₹35 प्रति किलो प्याज बेच रही है
Onion Price: देश भर में रसोई के बजट को बिगाड़ रही प्याज की आसमान छूती कीमतों के बीच आम उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार की सक्रिय बाजार दखलअंदाजी और मंडियों में ताजा आवक के चलते बीते नौ दिनों के भीतर थोक बाजारों में प्याज के दामों में लगभग नौ प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय का मानना है कि थोक मंडियों में दर्ज हुई इस नरमी का सीधा असर आगामी कुछ दिनों में खुदरा दुकानों और स्थानीय सब्जी मंडियों पर भी देखने को मिलेगा, जिससे आम परिवारों को रोजमर्रा के खर्च में बड़ी राहत मिल सकेगी।
थोक कीमतों में आई इस गिरावट के बीच केंद्र सरकार ने देश के लगभग 48 प्रमुख शहरों में 35 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर प्याज की खुदरा बिक्री तेज कर दी है। हालांकि, खुले खुदरा बाजार में प्याज की दरें अब भी सरकारी दरों के मुकाबले काफी ऊंची बनी हुई हैं। उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक देश में प्याज का औसत खुदरा भाव 53.92 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा पिछले महीने की तुलना में करीब 48 प्रतिशत और बीते वर्ष की इसी समान अवधि की तुलना में लगभग 94 प्रतिशत अधिक है, जिसके चलते सरकार बफर स्टॉक के जरिए कीमतों पर लगातार लगाम कसने में जुटी है।
Onion Price: थोक मंडियों में 9% टूटे दाम, खुदरा बाजार में जल्द दिखेगा असर
उपभोक्ता मामलों की केंद्रीय सचिव निधि खरे ने प्याज की कीमतों और आपूर्ति की ताजा स्थिति की समीक्षा करते हुए बताया कि देश भर की प्रमुख मंडियों के दैनिक आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट हुआ है कि बीते नौ दिनों में थोक दरों में औसतन नौ प्रतिशत तक की कमी आई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि थोक मंडियों में आवक की यही गति बनी रही, तो खुदरा बाजार में भी कीमतें तेजी से नीचे आएंगी।
सब्जी व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार, थोक मंडी से स्थानीय किराना या सब्जी की दुकान तक माल पहुंचने और पुराने महंगे स्टॉक के खत्म होने में तीन से पांच दिनों का समय लगता है। इसलिए थोक भाव में आई इस 9 प्रतिशत की कमी का वास्तविक असर बहुत जल्द मोहल्लों की खुदरा दुकानों पर दिखाई देने लगेगा। सरकार थोक और खुदरा दोनों स्तरों पर मूल्य निगरानी प्रकोष्ठ के माध्यम से दैनिक भावों पर पैनी नजर रख रही है।
48 शहरों में ₹35 प्रति किलो पर सरकारी प्याज: NCCF, NAFED और केंद्रीय भंडार का नेटवर्क
खुले बाजार में 50 से 60 रुपये किलो बिक रहे प्याज से आम जनता को राहत दिलाने के लिए सरकार ने सीधे हस्तक्षेप की रणनीति अपनाई है। इस व्यवस्था के अंतर्गत देश के 48 बड़े शहरों में राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी महासंघ (NCCF), भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (NAFED) और केंद्रीय भंडार के आउटलेट्स के माध्यम से 35 रुपये प्रति किलो की दर से गुणवत्तापूर्ण प्याज बेचा जा रहा है।
स्थिर बिक्री केंद्रों के अतिरिक्त घनी आबादी वाले आवासीय इलाकों, कॉलोनियों और साप्ताहिक हाट-बाजारों में विशेष मोबाइल वैन तैनात की गई हैं। इन मोबाइल वैनों के जरिए सीधे उपभोक्ताओं तक 35 रुपये किलो प्याज उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि बिचौलियों के मुनाफे पर अंकुश लगाया जा सके और खुले बाजार के दुकानदारों पर भी अपनी कीमतें घटाने का मनोवैज्ञानिक दबाव बने।
1.21 लाख टन का बफर स्टॉक और ‘कांदा एक्सप्रेस’ से त्वरित आपूर्ति
कीमतों में किसी भी आकस्मिक उछाल को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार के पास वर्तमान में लगभग 1.21 लाख टन प्याज का सुरक्षित बफर स्टॉक मौजूद है। इस बफर स्टॉक को उन राज्यों और उपभोग केंद्रों में प्राथमिकता के आधार पर भेजा जा रहा है जहां खुदरा कीमतें राष्ट्रीय औसत से अधिक दर्ज की जा रही हैं।
आपूर्ति की गति को तेज करने के लिए सड़क मार्ग के साथ-साथ भारतीय रेल के रैक यानी ‘कांदा एक्सप्रेस’ का प्रभावी इस्तेमाल किया जा रहा है। कांदा एक्सप्रेस के जरिए महाराष्ट्र के नासिक और मध्य प्रदेश के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों से प्याज की बड़ी खेपें सीधे दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों तक बिना किसी देरी के पहुंचाई जा रही हैं। इस मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के कारण माल ढुलाई के समय और लागत दोनों में भारी बचत हो रही है।
महंगाई के आंकड़ों में प्याज का दबाव: उत्पादन स्थिर, आपूर्ति प्रबंधन पर जोर
प्याज के खुदरा दामों में हुई बढ़ोतरी का असर राष्ट्रीय मुद्रास्फीति के आंकड़ों में भी साफ दिखाई दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में प्याज की वार्षिक महंगाई दर बढ़कर 48.27 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई, जबकि जुलाई के महीने में यह 22.54 प्रतिशत पर थी। एक महीने के भीतर मुद्रास्फीति दर का दोगुना होना यह दर्शाता है कि मानसून के दौरान कुछ क्षेत्रों में आवक प्रभावित होने से कीमतों पर अत्यधिक दबाव बना था।
वहीं यदि उत्पादन के आधारभूत आंकड़ों को देखें, तो देश में प्याज की कुल पैदावार में कोई बड़ा संकट नहीं है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में देश का कुल प्याज उत्पादन लगभग 307.37 लाख टन रहा है, जो पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 के 307.67 लाख टन उत्पादन के लगभग बराबर है। दोनों वर्षों के उत्पादन में कोई बड़ा अंतर न होने के कारण यह स्पष्ट है कि हालिया तेजी केवल मौसमी आपूर्ति बाधाओं और अस्थायी जमाखोरी की वजह से थी, जिसे बफर स्टॉक के जरिए अब पूरी तरह नियंत्रित किया जा रहा है।
Onion Price: निष्कर्ष
प्याज की थोक कीमतों में नौ दिनों के भीतर आई नौ प्रतिशत की गिरावट और 48 शहरों में 35 रुपये प्रति किलो की रियायती बिक्री आम उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत का संकेत है। केंद्र सरकार के पास मौजूद 1.21 लाख टन बफर स्टॉक और कांदा एक्सप्रेस के जरिए त्वरित आपूर्ति से बाजार में प्याज की कोई वास्तविक कमी नहीं है। यद्यपि वर्तमान में राष्ट्रीय औसत खुदरा भाव 53.92 रुपये प्रति किलो के आसपास बना हुआ है, किंतु मंडियों में नई फसल की आवक बढ़ते ही आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों में और अधिक नरमी आने की पूरी संभावना है।
Read more here
Wedding Vastu Tips: घर में शादी होने वाली है तो आज ही निकाल दें ये 5 चीजें, वरना आ सकती हैं अड़चनें
Mulank 4: बर्थ डेट 4, 13, 22 या 31 है आपकी? एक्सपर्ट से जानें क्या कहती है आपकी पर्सनैलिटी का राज
FASTag Bank Change: अब स्टिकर बदले बिना बदलें बैंक, OneTag से आसान होगा पोर्ट